Monday, 20 April 2026

उसका कसूर क्या है

 उसका कसूर क्या है 


मेरा हर दूसरे तीसरे शर्मा दिन जी के घर आना हुआ था। शर्माजी के घर हरदम चालस्टेपी रहते हैं। शर्माजी का परिवार और उनके छोटे भाई का परिवार एक ही मकान में रहते हैं। दोनों का परिवार हंसता खेलता रहता है। वहाँ चार छोटे लड़के हैं। शर्माजी के एक लड़का और एक लड़की हैं बाकी तीन लड़के शर्माजी के छोटे भाई के बेटे हैं। सभी बॉय हाउस के विज्ञापन में दिए गए मैग गर्ल डॉल भी हमेशा के लिए अपने ऑफिस में रहते हैं। अगर वो भी ज़िद करता है तो उसे लड़की का सहारा लेना है,ये मेने काफी बार नोटिस किया गया लेकिन मैं बोल पर कुछ नहीं कर सका। आज सभी घर के लड़के अपने दोस्तों के साथ मूवी देखने जा रहे हैं और वो भी अपनी सहेलियों के साथ मूवी देखने का विचार कर रही हैं इसलिए उसे भी जाने दिया जाए। शर्मा जी ने अपनी माँ को भी गुड़ियाँ को आश्चर्य का झटका दिया। ऐसा ही कुछ समय हुआ जब मगरजी शर्माजी के भी अपने घर की चार वाली में थी कीमत। इस बात से उसकी मां को बहुत दुख हुआ क्योंकि इस घर में कोई भी महिला या लड़की बाहर नहीं घूमती थी। यहां किसी भी घर के बाहर या किसी सड़क तक किसी से भी बात नहीं की जा सकती। गुड़िया पढ़ने में सभी भाई-बहन की किस्मत थी मगर उसे घर में रख कर ही अपनी पढ़ाई करनी है। मेरी एक बिटिया हैं जिसे मैं अपना लड़का पोस्ट करता हूं और उसे हर बात की छूट देता हूं। और वो मेरे विश्वाश के साथ हमेशा अच्छे नंबर से पास हो रही हैं और गेम जंप में भी भाग ले रही हैं। मेने ये बात शर्माजी को नहीं बल्कि फालतू में एक दो उपदेश दिए और मैं अपनी बिटिया को स्वतंत्र रखना चाहता हूं। गुड़िया और मेरी चुन्नी दोनों एक ही कक्षा में मगर स्कूल में अलग-अलग हैं इसलिए उनका कभी मिलान नहीं हुआ। बारहवीं कक्षा का परिणाम आया। इस प्रकार यह दो में घोषित हुआ इसलिए मुझे इस पर ध्यान नहीं देना चाहिए। किसी काम से जब शर्मा जी के घर गये तो पता चला की परीक्षा परिणाम आये। मैं मन में अपनी बच्ची के लिए सोच ही रहा था कि गुड़िया के पास होने की खबर ले आई। आज वो प्रथम श्रेणी से सिद्धांत हो गए इसलिए अब अच्छे कॉलेज में आसानी से दाखिला मिल जाएगा। ये बात जब गुड़िया की माताजी और गुड़िया ने कही तो शर्माजी को गुस्सा आ गया। उन्होंने कॉलेज न जाने की बात कही कि अब शादी की बात न करें। काफी बहस के बाद भी शर्माजी नहीं माने। हार कर गुड़िया की माताजी ने जो समझो वो कह कर चली गई। आगे पढ़ें गुड़िया को मगरजी पसंद नहीं थी। गुड़िया ने कहा कि अपने शहर में जो पहली बार आई वो भी लड़की ही हैं। इस पर शर्माजी ने कहा कि लड़की और उसके पिता के बीच अच्छा व्यवहार है कि आगे वे लड़की को अपने साथ ले जाएं। जिज्ञासावश गुड़िया का नाम पूछा तो उसने बताया कि पूरे राज्य में कोई चुन्नीदेवी प्रथम आई हैं। मेरी ख़ुशी के सलाहकार नहीं, इस वक्ता शर्मा जी को आप देख कर छुपे हुए ही समझाते हैं। घर बैठे बैठे ने अपनी चुन्नी को जब देखा तो आपको गर्व महसूस हुआ। चुन्नी की सहेलियाँ और हमारे रिस्तेदार सभी घर पर सलाह लें। तुरंत बाद शर्मा जी के घर से न्योता आया कि गुड़िया की सगाई तय हो गई है और हम सभी को फोन किया गया है। मैं पूरे परिवार के साथ गया। गुड़िया के मुस्लिम वाले काफी प्यारे और पढ़े लिखे लोग हैं उनके घर में बहु बेटियां भी लिखी हुई हैं। जब उन्होंने चुन्नी को देखा तो सभी आगे-आगे की यात्रा करने लगे। शर्माजी को लड़की इतनी खुली करना पसंद नहीं थी मगर अपने घर पर बात करना नहीं चाहती थी इसलिए वो चुप रह रही थी। समारोह के अंत तक चुन्नी की बातें, मो.गुड़िया के मुस्लिम वाले भी चुन्नी की शोभा नहीं बना पा रहे थे। ये देख कर गुड़िया को और बहुत गुस्सा आया। एक तो उसकी मर्ज़ी के ख़िलाफ़ लीज़ हो रही थी वो और आगे की पढ़ाई चाह रही थी। ऊपर से चुन्नी कीगुड़िया के मितव्ययी लोग पर स्तुति कर रहे थे। दूसरे दिन शर्मा जी चुन्नी को नेकदिलबुरा देखना मेरे साथ नहीं आ रहा। मैंने जब कहा कि मेरी बेटी का मुंह खुल रहा है। जब उसने किसी की बात का विरोध किया तो कमरे में रोने लगी और अपने पापा को किसी की बात अनबन हो गई तो वो पहले से चुन्नी के हो गई और जब गुड़िया ने विरोध किया तो गुड़िया भड़क गई। गुड़िया को अंदर भेज कर मुझे जाने को कहा। मैं छुट्टियाँ वहाँ से निकल गया। चुन्नी कॉलेज भी जाने लगी और वह भी शानदार नंबर लायी। एक दिन शर्माजी के घर से डॉक्टर आया। शादी का था. चार दिन बाद हैं शादी। मैंने अकेले जाने का फैसला किया। मेरी पत्नी जी ने शादी से पहले शर्मा जी के घर के व्यवसाय से कोई काम काज का पता लगाने के लिए कहा, दूसरे दिन सुबह जब मैं शर्मा जी के घर गया तो घर में दोस्त था। गुड़िया की माताजी ने बताया कि रात को गुड़िया ने जहर खा लिया और सभी भाग में चली गईं। घर में सिर्फ हम औरतें ही हैं। मैं सीधा अस्पताल पंहुचा.शर्माजी और घर वाले थे। अंदर किसी को जाने की सिर्फ औरत ही जा थी। शर्माजी को अभी भी आदमी और औरत का पता नहीं चल रहा था। मेने उन्हें सनातन देते हुए कहा घर से किसी महिला को उंगलियां को बोला। कुछ देर बाद गुड़िया के राक्षस वाले भी गुड़िया की सास और ननद भी थी। एसएसएस को अंदर भेजा गया। शर्माजी ने अपने भाई से कहा कि केवल तुम अपनी भाभी को ले आओ और धीरे-धीरे कपडे के लाइनकन को बोलो। थोड़ी देर बाद जब भाभी जी आई और वो भी अंदर गुड़िया के पास। गुड़िया की तबीयत खराब हो रही थी। कोई सुधार नहीं हो रहा। कुछ देर बाद डॉ ने हार मान ली और डॉ ने शर्माजी से माफ़ी मांग कर कहा कि अगर इसे कुछ समय पहले ले आओ तो शायद बच जाओ मगर अब तो कुछ नहीं बचा है। सबसे रोना लागे। मैं शर्माजी को दिलासा देते हुए घर ले गया। शर्माजी रास्ते भर यही कह रहे थे कि मेरा कसूर क्या है। जबकि मैं और मेरे जैसे लोग ये सोच रहे थे कि गुड़िया का क्या कसूर था जो अपनी पढ़ाई छुड़वाकर शादी की और घर की गृहस्थी की तरफ से खरीद रहे थे। शर्माजी जैसे लोगों को इतना बड़ा हादसा होने के बाद भी समझ नहीं आता। मैं तो यही हूं कि कसूर था उसका जो ये कदम उठाता था मजबूर गुड़िया। फिफ्थोडी बाद में जब भाभी जी आई और वो भी गुड़िया के पास। गुड़िया की तबीयत खराब हो रही थी। कोई सुधार नहीं हो रहा। कुछ देर बाद डॉ ने हार मान ली और डॉ ने शर्माजी से माफ़ी मांग कर कहा कि अगर इसे कुछ समय पहले ले आओ तो शायद बच जाओ मगर अब तो कुछ नहीं बचा है। सबसे रोना लागे। मैं शर्माजी को दिलासा देते हुए घर ले गया। शर्माजी रास्ते भर यही कह रहे थे कि मेरा कसूर क्या है। जबकि मैं और मेरे जैसे लोग ये सोच रहे थे कि गुड़िया का क्या कसूर था जो अपनी पढ़ाई छुड़वाकर शादी की और घर की गृहस्थी की तरफ से खरीद रहे थे। शर्माजी जैसे लोगों को इतना बड़ा हादसा होने के बाद भी समझ नहीं आता। मैं तो यही हूं कि कसूर था उसका जो ये कदम उठाता था मजबूर गुड़िया। फिफ्थोडी बाद में जब भाभी जी आई और वो भी गुड़िया के पास। गुड़िया की तबीयत खराब हो रही थी। कोई सुधार नहीं हो रहा। कुछ देर बाद डॉ. ने हार मान ली और डॉ.उन्होंने शर्माजी से माफ़ी माँग कर कहा कि अगर इसे कुछ समय पहले ले आओ तो शायद बच जाओ शर्माजी से माफ़ी माँग कर कहा कि अगर इसे कुछ समय पहले ले आओ तो शायद बच जाओ शर्माजी से माफ़ी माँग कर कहा कि अगर इसे कुछ समय पहले ले आओ तो शायद बच जाओ शर्माजी से माफ़ी माँग कर कहा। शर्माजी से माफ़ी मांग कर जाओ और कहा कि अगर इसे कुछ समय पहले ले आओ तो शायद शादी के एक दिन बाद बच जाओ। मैंने अकेले जाने का फैसला किया। मेरी पत्नी जी ने शादी से पहले शर्मा जी के घर के व्यवसाय से कोई काम काज का पता लगाने के लिए कहा, दूसरे दिन सुबह जब मैं शर्मा जी के घर गया तो घर में दोस्त था। गुड़िया की माताजी ने बताया कि रात को गुड़िया ने जहर खा लिया और सभी भाग में चली गईं। घर में सिर्फ हम औरतें ही हैं। मैं सीधा अस्पताल पंहुचा.शर्माजी और घर वाले थे। अंदर किसी को जाने की सिर्फ औरत ही जा थी। शर्माजी को अभी भी आदमी और औरत का पता नहीं चल रहा था। मेने उन्हें सनातन देते हुए कहा घर से किसी महिला को उंगलियां को बोला। कुछ देर बाद गुड़िया के राक्षस वाले भी गुड़िया की सास और ननद भी थी। एसएसएस को अंदर भेजा गया। शर्माजी ने अपने भाई से कहा कि केवल तुम अपनी भाभी को ले आओ और धीरे-धीरे कपडे के लाइनकन को बोलो। थोड़ी देर बाद जब भाभी जी आई और वो भी अंदर गुड़िया के पास। गुड़िया की तबीयत खराब हो रही थी। कोई सुधार नहीं हो रहा। कुछ देर बाद डॉ ने हार मान ली और डॉ ने शर्माजी से माफ़ी मांग कर कहा कि अगर इसे कुछ समय पहले ले आओ तो शायद बच जाओ मगर अब तो कुछ नहीं बचा है। सबसे रोना लागे। मैं शर्माजी को दिलासा देते हुए घर ले गया। शर्माजी रास्ते भर यही कह रहे थे कि मेरा कसूर क्या है। जबकि मैं और मेरे जैसे लोग ये सोच रहे थे कि गुड़िया का क्या कसूर था जो अपनी पढ़ाई छुड़वाकर शादी की और घर की गृहस्थी की तरफ से खरीद रहे थे। शर्माजी जैसे लोगों को इतना बड़ा हादसा होने के बाद भी समझ नहीं आता। मैं तो यही हूं कि कसूर था उसका जो ये कदम उठाता था मजबूर गुड़िया। फिफ्थोडी बाद में जब भाभी जी आई और वो भी गुड़िया के पास। गुड़िया की तबीयत खराब हो रही थी। कोई सुधार नहीं हो रहा। कुछ देर बाद डॉ ने हार मान ली और डॉ ने शर्माजी से माफ़ी मांग कर कहा कि अगर इसे कुछ समय पहले ले आओ तो शायद बच जाओ मगर अब तो कुछ नहीं बचा है। सबसे रोना लागे। मैं शर्माजी को दिलासा देते हुए घर ले गया। शर्माजी रास्ते भर यही कह रहे थे कि मेरा कसूर क्या है। जबकि मैं और मेरे जैसे लोग ये सोच रहे थे कि गुड़िया का क्या कसूर था जो अपनी पढ़ाई छुड़वाकर शादी की और घर की गृहस्थी की तरफ से खरीद रहे थे। शर्माजी जैसे लोगों को इतना बड़ा हादसा होने के बाद भी समझ नहीं आता। मैं तो यही हूं कि कसूर था उसका जो ये कदम उठाता था मजबूर गुड़िया। फिफ्थोडी बाद में जब भाभी जी आई और वो भी गुड़िया के पास। गुड़िया की तबीयत खराब हो रही थी। कोई सुधार नहीं हो रहा। कुछ देर बाद डॉ. वे मैन ली और डॉ. हार गया। यूएसजी शर्मा ने माफ़ी मांग कर कहा कि अगर इसे कुछ समय पहले ले आओ तो शायद एक दिन बाद शादी कर लूंगा। मैंने अकेले जाने का फैसला किया। मेरी पत्नी जी ने शादी से पहले शर्मा जी के घर के व्यवसाय से कोई काम काज का पता लगाने के लिए कहा, दूसरे दिन सुबह जब मैं शर्मा जी के घर गया तो घर में दोस्त था। गुड़िया की माताजी ने बताया कि रात को गुड़िया ने जहर खा लिया और सभी भाग में चली गईं। घर में सिर्फ हम औरतें ही हैं। मैं सीधा अस्पताल पंहुचा.शर्माजी और घर वाले थे। अंदर किसी को जाने की सिर्फ औरत ही जा थी। शर्माजी को अभी भी आदमी और औरत का पता नहीं चल रहा था। मेने उन्हें सनातन देते हुए कहा घर से किसी महिला को उंगलियां को बोला। कुछ देर बाद गुड़िया के राक्षस वाले भी गुड़िया की सास और ननद भी थी। एसएसएस को अंदर भेजा गया। शर्माजी ने अपने भाई से कहा कि केवल तुम अपनी भाभी को ले आओ और धीरे-धीरे कपडे के लाइनकन को बोलो। थोड़ी देर बाद जब भाभी जी आई और वो भी अंदर गुड़िया के पास। गुड़िया की तबीयत खराब हो रही थी। कोई सुधार नहीं हो रहा। कुछ देर बाद डॉ ने हार मान ली और डॉ ने शर्माजी से माफ़ी मांग कर कहा कि अगर इसे कुछ समय पहले ले आओ तो शायद बच जाओ मगर अब तो कुछ नहीं बचा है। सबसे रोना लागे। मैं शर्माजी को दिलासा देते हुए घर ले गया। शर्माजी रास्ते भर यही कह रहे थे कि मेरा कसूर क्या है। जबकि मैं और मेरे जैसे लोग ये सोच रहे थे कि गुड़िया का क्या कसूर था जो अपनी पढ़ाई छुड़वाकर शादी की और घर की गृहस्थी की तरफ से खरीद रहे थे। शर्माजी जैसे लोगों को इतना बड़ा हादसा होने के बाद भी समझ नहीं आता। मैं तो यही हूं कि कसूर था उसका जो ये कदम उठाता था मजबूर गुड़िया। फिफ्थोडी बाद में जब भाभी जी आई और वो भी गुड़िया के पास। गुड़िया की तबीयत खराब हो रही थी। कोई सुधार नहीं हो रहा। कुछ देर बाद डॉ ने हार मान ली और डॉ ने शर्माजी से माफ़ी मांग कर कहा कि अगर इसे कुछ समय पहले ले आओ तो शायद बच जाओ मगर अब तो कुछ नहीं बचा है। सबसे रोना लागे। मैं शर्माजी को दिलासा देते हुए घर ले गया। शर्माजी रास्ते भर यही कह रहे थे कि मेरा कसूर क्या है। जबकि मैं और मेरे जैसे लोग ये सोच रहे थे कि गुड़िया का क्या कसूर था जो अपनी पढ़ाई छुड़वाकर शादी की और घर की गृहस्थी की तरफ से खरीद रहे थे। शर्माजी जैसे लोगों को इतना बड़ा हादसा होने के बाद भी समझ नहीं आता। मैं तो यही हूं कि कसूर था उसका जो ये कदम उठाता था मजबूर गुड़िया। फिफ्थोडी बाद में जब भाभी जी आई और वो भी गुड़िया के पास। गुड़िया की तबीयत खराब हो रही थी। कोई सुधार नहीं हो रहा। कुछ देर बाद डॉ. ने हार मान ली और डॉ.उन्होंने शर्माजी से माफ़ी मांग कर कहा कि अगर इसे कुछ समय पहले ले आओ तो शायद बच जाओशर्माजी और घर वाले थे। अंदर किसी को जाने की सिर्फ औरत ही जा थी। शर्माजी को अभी भी आदमी और औरत का पता नहीं चल रहा था। मेने उन्हें सनातन देते हुए कहा घर से किसी महिला को उंगलियां को बोला। कुछ देर बाद गुड़िया के राक्षस वाले भी गुड़िया की सास और ननद भी थी। एसएसएस को अंदर भेजा गया। शर्माजी ने अपने भाई से कहा कि केवल तुम अपनी भाभी को ले आओ और धीरे-धीरे कपडे के लाइनकन को बोलो। थोड़ी देर बाद जब भाभी जी आई और वो भी अंदर गुड़िया के पास। गुड़िया की तबीयत खराब हो रही थी। कोई सुधार नहीं हो रहा। कुछ देर बाद डॉ ने हार मान ली और डॉ ने शर्माजी से माफ़ी मांग कर कहा कि अगर इसे कुछ समय पहले ले आओ तो शायद बच जाओ मगर अब तो कुछ नहीं बचा है। सबसे रोना लागे। मैं शर्माजी को दिलासा देते हुए घर ले गया। शर्माजी रास्ते भर यही कह रहे थे कि मेरा कसूर क्या है। जबकि मैं और मेरे जैसे लोग ये सोच रहे थे कि गुड़िया का क्या कसूर था जो अपनी पढ़ाई छुड़वाकर शादी की और घर की गृहस्थी की तरफ से खरीद रहे थे। शर्माजी जैसे लोगों को इतना बड़ा हादसा होने के बाद भी समझ नहीं आता। मैं तो यही हूं कि कसूर था उसका जो ये कदम उठाता था मजबूर गुड़िया। फिफ्थोडी बाद में जब भाभी जी आई और वो भी गुड़िया के पास। गुड़िया की तबीयत खराब हो रही थी। कोई सुधार नहीं हो रहा। कुछ देर बाद डॉ ने हार मान ली और डॉ ने शर्माजी से माफ़ी मांग कर कहा कि अगर इसे कुछ समय पहले ले आओ तो शायद बच जाओ मगर अब तो कुछ नहीं बचा है। सबसे रोना लागे। मैं शर्माजी को दिलासा देते हुए घर ले गया। शर्माजी रास्ते भर यही कह रहे थे कि मेरा कसूर क्या है। जबकि मैं और मेरे जैसे लोग ये सोच रहे थे कि गुड़िया का क्या कसूर था जो अपनी पढ़ाई छुड़वाकर शादी की और घर की गृहस्थी की तरफ से खरीद रहे थे। शर्माजी जैसे लोगों को इतना बड़ा हादसा होने के बाद भी समझ नहीं आता। मैं तो यही हूं कि कसूर था उसका जो ये कदम उठाता था मजबूर गुड़िया। फिफ्थोडी बाद में जब भाभी जी आई और वो भी गुड़िया के पास। गुड़िया की तबीयत खराब हो रही थी। कोई सुधार नहीं हो रहा। कुछ देर बाद डॉ. ने हार मान ली और डॉ.उन्होंने शर्माजी से माफ़ी मांग कर कहा कि अगर इसे कुछ समय पहले ले आओ तो शायद बच जाओशर्माजी और घर वाले थे। अंदर किसी को जाने की सिर्फ औरत ही जा थी। शर्माजी को अभी भी आदमी और औरत का पता नहीं चल रहा था। मेने उन्हें सनातन देते हुए कहा घर से किसी महिला को उंगलियां को बोला। कुछ देर बाद गुड़िया के राक्षस वाले भी गुड़िया की सास और ननद भी थी। एसएसएस को अंदर भेजा गया। शर्माजी ने अपने भाई से कहा कि केवल तुम अपनी भाभी को ले आओ और धीरे-धीरे कपडे के लाइनकन को बोलो। थोड़ी देर बाद जब भाभी जी आई और वो भी अंदर गुड़िया के पास। गुड़िया की तबीयत खराब हो रही थी। कोई सुधार नहीं हो रहा। कुछ देर बाद डॉ ने हार मान ली और डॉ ने शर्माजी से माफ़ी मांग कर कहा कि अगर इसे कुछ समय पहले ले आओ तो शायद बच जाओ मगर अब तो कुछ नहीं बचा है। सबसे रोना लागे। मैं शर्माजी को दिलासा देते हुए घर ले गया। शर्माजी रास्ते भर यही कह रहे थे कि मेरा कसूर क्या है। जबकि मैं और मेरे जैसे लोग ये सोच रहे थे कि गुड़िया का क्या कसूर था जो अपनी पढ़ाई छुड़वाकर शादी की और घर की गृहस्थी की तरफ से खरीद रहे थे। शर्माजी जैसे लोगों को इतना बड़ा हादसा होने के बाद भी समझ नहीं आता। मैं तो यही हूं कि कसूर था उसका जो ये कदम उठाता था मजबूर गुड़िया। फिफ्थोडी बाद में जब भाभी जी आई और वो भी गुड़िया के पास। गुड़िया की तबीयत खराब हो रही थी। कोई सुधार नहीं हो रहा। कुछ देर बाद डॉ ने हार मान ली और डॉ ने शर्माजी से माफ़ी मांग कर कहा कि अगर इसे कुछ समय पहले ले आओ तो शायद बच जाओ मगर अब तो कुछ नहीं बचा है। सबसे रोना लागे। मैं शर्माजी को दिलासा देते हुए घर ले गया। शर्माजी रास्ते भर यही कह रहे थे कि मेरा कसूर क्या है। जबकि मैं और मेरे जैसे लोग ये सोच रहे थे कि गुड़िया का क्या कसूर था जो अपनी पढ़ाई छुड़वाकर शादी की और घर की गृहस्थी की तरफ से खरीद रहे थे। शर्माजी जैसे लोगों को इतना बड़ा हादसा होने के बाद भी समझ नहीं आता। मैं तो यही हूं कि कसूर था उसका जो ये कदम उठाता था मजबूर गुड़िया। फिफ्थोडी बाद में जब भाभी जी आई और वो भी गुड़िया के पास। गुड़िया की तबीयत खराब हो रही थी। कोई सुधार नहीं हो रहा। कुछ देर बाद डॉ. ने हार मान ली और डॉ.उन्होंने शर्माजी से माफ़ी माँग कर कहा कि अगर इसे कुछ समय पहले ले आओ तो शायद बच जाओ शर्माजी से माफ़ी माँग कर कहा कि अगर इसे कुछ समय पहले ले आओ तो शायद बच जाओ शर्माजी से माफ़ी माँग कर कहा कि अगर इसे कुछ समय पहले ले आओ तो शायद बच जाओ शर्माजी से माफ़ी माँग कर कहा। आओ तो शायद बच जाओ शर्माजी से माफ़ी मांग कर कहा कि अगर इसे कुछ समय पहले ले आओ तो शायद बच जाओ शर्माजी से माफ़ी मांग कर कहा कि अगर इसे कुछ समय पहले ले आओ तो शायद बच जाओ शर्माजी से माफ़ी मांग कर कहा। कुछ समय पहले ले आओ तो शायद बच जाओ शर्माजी से माफ़ी डिज़ायन कर कहा कि अगर कुछ समय पहले ले आओ तो शायद बच जाओ शर्माजी से माफ़ी डिज़ायन कर कहा। आओ तो शायद बच जाओ शर्माजी से माफ़ी मांग कर कहा कि अगर इसे कुछ समय पहले ले आओ तो शायद बच जाओ शर्माजी से माफ़ी मांग कर कहा कि अगर इसे कुछ समय पहले ले आओ तो शायद बच जाओ शर्माजी से माफ़ी मांग कर कहा। कुछ समय पहले ले आओ तो शायद बच जाओ शर्माजी से माफ़ी डिज़ायन कर कहा कि अगर कुछ समय पहले ले आओ तो शायद बच जाओ शर्माजी से माफ़ी डिज़ायन कर कहा। आओ तो शायद बच जाओ शर्माजी से माफ़ी मांग कर कहा कि अगर इसे कुछ समय पहले ले आओ तो शायद बच जाओ शर्माजी से माफ़ी मांग कर कहा कि अगर इसे कुछ समय पहले ले आओ तो शायद बच जाओ शर्माजी से माफ़ी मांग कर कहा। कुछ समय पहले ले आओ तो शायद बच जाओ शर्माजी से माफ़ी माँजी कर ने कहा कि अगर इसे कुछ समय पहले ले आओ तो शायद बच जाओ शर्मा जी से माफ़ी मांग कर कहा। आओ तो शायद बच जाओ शर्माजी से माफ़ी मांग कर कहा कि अगर इसे कुछ समय पहले ले आओ तो शायद बच जाओ शर्माजी से माफ़ी मांग कर कहा कि अगर इसे कुछ समय पहले ले आओ तो शायद बच जाओ शर्माजी से माफ़ी मांग कर कहा। कुछ समय पहले ले आओ तो शायद बच जाओ शर्माजी से माफ़ी डिज़ायन कर कहा कि अगर कुछ समय पहले ले आओ तो शायद बच जाओ शर्माजी से माफ़ी डिज़ायन कर कहा। आओ तो शायद बच जाओ शर्माजी से माफ़ी मांग कर कहा कि   अब बस भगवान से प्रार्थना करो कि कोई चमत्कार हो जाए
, सब उदास हो...लगा जिसे समय मिल जाए। भाभी ने अपने पति की और देख कर आँखों से बहुत कुछ कहा। शर्मा जी भी अपनी उदास आँखों को ढूंढते रहे सिर्फ एक दूसरे को देखते रहे। अब क्या करें।उनकी लड़की की जिंदगी और मौत बीच में है। उनके समय अस्पताल के निरीक्षण के लिए बुजुर्ग डॉक्टर भी थे, जिनमें ज्यादातर महिला डॉक्टर और कर्मचारी भी थे। जब गुड़िया की जांच हुई तो थोड़ी उम्मीद जगी और बाकी सभी वकीलों ने गुड़िया के बच्चे को ले लिया। जब शर्मा हॉस्पिटल के डॉक्टर को धन्यवाद कह रहे थे तो डॉक्टर बोला ये सब ऊपर वाले और हमारे सीनियर डॉक्टर का कमाल है। शर्माजी दौड़े और जब किसी महिला डॉक्टर को देखा और माफ़ी मांगी तो हमारे सीनियर डॉक्टर ने शर्मा को सबसे पहले यही कहा कि मैं भी महिला हूं और मेरा स्टाफ भी महिला है.. आगे कुछ बोलू उससे पहले आप शायद जेल चले जाएं। इसलिए आप अपनी लड़की को स्वस्थ करवाकर ही यहां से लेकर जाएंगे उसके बाद आप कार्रवाई करेंगे। राम लेकिन डूब गये थे. सभी चुप चाप सुन रहे थे. मैं मन में सोच रहा था कि कपूर किसका है लड़की का या शर्मा जी जैसी सोच  

Friday, 23 September 2016

फूल सी मनु प्यारी सी मनु
सबकी दुलारी मनु ,
हर एक की चहेती मनु
सब को हसाती मनु
घर का ख्याल रखती मनु
चाह  कभी आज़ाद उड़जाये  मनु
चाह कभी जग जीत जाये मनु
फूल सी मनु प्यारी सी मनु
सबकी दुलारी मनु ,
दोस्तों की चहेती मनु
दुश्मनों के दिल की रानी मनु
सब छोड़छाड़ कर बैठी मनु
सब प्यार के खातिर करती मनु
एक अवसर को प्यासी मनु
कर गुज़ारने  की चाहत मनु
आज के बंधन में बंधी मनु
फूल सी मनु प्यारी सी मनु

सबकी दुलारी मनु ,
मेरे करीब मनु
तेरे करीब मनु
सबके दिलों की रानी मनु
सबको हसांती मनु
रोते  को खिलाती मनु
रोते को हसांती मनु
फूल सी मनु प्यारी सी मनु

सबकी दुलारी मनु ,
आसमान की पारी मनु
आँखों का तारा मनु
अलग हे मनु
जुड़ा हे मनु
जाने कहा से आयी हे मनु
लगता नही इस युग की हैं मनु
फूल सी मनु प्यारी सी मनु

सबकी दुलारी मनु ,
कभी उछलती कूदती मनु
कभी घर के आँगन की मनु
कभी गौवों खेतों में कूदती मनु
कभी शहर की सडको पर दौड़ती मनु
फूल सी मनु प्यारी सी मनु

सबकी दुलारी मनु ,
आज बंद कमरे की मनु
आज बंद पिझरे  की मनु
आज मुरझाई मनु
आज उदासी की मनु
आज की हर घर में एक मनु
रो रही हैं मनु
जन्म से पहले मार दी जाती मनु
जन्म के बाद धिक्कार कहती मनु
घर की बंद मनु
ससुराल की नौकरानी मनु
सासु की लॉटरी मनु
पति की गुलाम मनु
ससुर की बोझ मनु
ननद को खटकती मनु
पीहर में रोटी मनु
भाभी की परेशानी मनु
नारी जाती हैं मनु
अत्याचारों की मारी मनु
अपने जन्म की लाचार मनु
उदास हैं मनु
हम जगाना हैं मनु
समाज में लानी हे मनु
अपने हक़ के लिए हैं मनु
प्यार के लिए हैं मनु
बेटी हैं हमारी मनु
वंश को बढ़ाने वाली हैं मनु
संसार होगा जब होगी मनु
वरना न होगी मनु
न होगी धरती





Saturday, 10 September 2016

प्यार का रिश्ता

प्यार का रिश्ता
छोटे शहर में रिश्तों का एक अलग ही मज़ा होता हैं।  ख़ास कर वो जो मौहल्लों में पासपास रहते हुए बन जाते हैं।  ऐसे ही कुकू और लाली एक ही मौहल्ले में रहते थे।  उम्र भी करीब ६-७ बरस थी। सभी साथ साथ खेलते थे।  छोटा शहर होने के कारण यहाँ त्यौहार साथ साथ मिल कर मानते हे।  पूरा मौहल्ला हर एक त्यौहार में हिस्सा लेता हैं। वही जब दूल्हा दुल्हन बनना हो तो कुकू और लाली कद काठी से और उम्र से सही लगते थे इसलिए सभी मौहल्ले वाले उन्हें ही दूल्हा दुल्हन बनाते थे। आज भी कृष्णा लीला में कृष्णा और राधा दोनों ही बने हैं।  मज़ाक मज़ाक में लाली की माँ ने कह दिया की लगता हैं कि इनका  पिछले जन्म से ही  दोनों पति पत्नी के  सम्बंध हे और अब यहाँ जब से  नाटक शुरू हुआ हैं तब से ये दोनों ही पति पत्नी बनते हैं।  इस बात पर सभी जोर जोर से हँसने लगे।  लाली शरमा गयी। लड़कियां बड़ी जल्दी होती हैं और रिश्ते भी जल्दी समझने लगती हैं। इस तरह उस दिन से सभी इन दोनों को प्यार से एक दुझे के नाम से चिढाते थे।  कुकू को इस बारे में कम समझ थी क्योकि उसे अब लड़कियों के साथ नहीं लड़को के साथ मैदानों में खेलना अच्छा लगता था मगर लाली कुकू को मन ही मन लड़कपन में अपना पति मानने  लगी।छुप छुप कर देखती थी। कुकू का आने जाने और पढ़ाई का ध्यान रखती थी। अब सभी इस बात को भूल गए की बचपन में इन दोनों को दूल्हा दुल्हन बनाते थे। लाली का कुकू का ख्याल रखना और मन ही मन प्यार करना किसी को पता नही चला। समय जैसे जैसे बिताता गया लाली का प्यार भी बढ़ता गया।  जब दोनों कॉलेज में आ गए तब कुकू को भी थोड़ा बहुत आभास हुआ। क्योकि हर वक्त लाली उसके आने जाने तक का ख्याल रखती थी कॉलेज दोनों के पास पास थे मगर आना जाना लगभग साथ साथ ही होता था।  कुकू ने देखा की लाली रोज़ छुप छुप कर उसका इंतज़ार करती हैं।  उसकी सहेलियों के आने के बाद भी वो धीरे धीरे तैयार होती और जैसे ही कुकू घर से निकलता हैं वो भी दौड़ के बहार आ जाती हैं।कुकू ने भी लाली की और ध्यान देना शुरू कर दिया। दोनों कुछ बोले नहीं मगर एक दूजे को समझ गए।  चुपके चुपके दोनों एक दुझे को देखते और ऐसा दिखाते की कुछ नहीं हैं उनके मन में। लाली की एक सहेली रीनू ये बात जब लाली से पूछा तो उसके चेहरे पर सच में लाली आ गयी मगर ऐसी वेसी बात का मना कर दिया। एक दिन जब मोहल्ले के लड़के लड़कियां कॉलेज को निकले तो रीनू ने कहा की लाली जल्दी चल तो वो बहाने करते हुए इधर उधर देखने लगी। रीनू ने धीरे से कहा की वो गया आज जल्दी। तो लाली फटाफट बहार निकल आयी।  रीनू जोरजोर से हँसने लगी। दोनों जल्दी से बस स्टॉप पर पहुचे। मगर लाली को कुकू कही दिखाई नहीं दिया। लाली कुछ नहीं बोल पायी मगर रीनू ने कहा की उसने झूट बोला क्योकि वो देखना चाहती थी की क्या माज़रा हैं।  लाली उस पर बरस पड़ी। साथ में शरमा भी गयी।  उसकी चोरी पकड़ी गयी। लाली ने रीनू को कसम दिल कर किसी से भी नहीं कहने को बोला।  आज लाली का कॉलेज में मन नहीं लग रहा था।  लाली और रीनू जल्दी घर आ गए और कुकू के घर के बाहर से आये तब देखा वहा दरवाज़े पर ताला लगा हैं।  पड़ोस की मौसीजी ने बताया की सभी गॉव गए हैं। कुक के रिश्ते में किसी की शादी हैं इसलिए सप्ताह भर बाद आएंगे।  लाली के मुह से निकल गया की सप्ताह भर तो बहुत ज्यादा होता हैं। .... किसी की शादी में रहना। आजकल तो शादियां दो चार दिन में हो जाती हैं फिर ये लोग इतने दिन क्यों रुकेंगे।  और गुस्सा होने लगी। मौसी बोली की  घर का ख्याल रखने को बोला हैं उन्होंने तेरी माँ को इसलिए तू इतनी गुस्सा हो रही हैं। लाली का सारा गुस्सा पल भर में गायब हो गया। लाली और रीनू उच्छल पड़ी।  इसका मतलब कुकू की माताजी को में पसंद हूँ।  मौसीजी भी हैरान की ये क्या हुआ, मगर वो तो दोनों को ताने सुना कर अंदर चली गयी।  लाली धीरे धीरे अपने घर में घुसकर माँ के साथ बैठ गयी। उसकी माँ भी हैरान की आज ये क्या हुआ। लाली  आते ही सो जाती थी मगर आज ये अचानक क्या हुआ।  लाली  पूछने लगी की कोई काम तो नहीं।  माँ ने मना कर दिया।  फिर लाली बोली। .कोई काम नहीं हैं।  माँ ने कहा   नहीं हैं तू पहले खाना  खा ले फिर सो जा थोड़ी देर।  लाली को न भूख हैं न नींद हैं।  वो माँ के आगे पीछे गुमने लगी। फिर माँ से   माँ आज ताकि हुयी लग रही हैं क्या बात हैं।  माँ बोली  कुछ भी नहीं। हैं  तू खाना  खा और सो जा।  दूसरे दिन फिर कॉलेज से जल्दी आ गयी और माँ को कुछ काम हो तो बताओ।  मन में कुकू ले घर जाना था किसी भी तरह।  माँ  ने आज फिर मना कर दिया।  माँ कहने लगी। . लाली को आजकल हुआ क्या हैं जो घर के काम में ध्यान दे रही हैं। कल तो ख़ुशी के मारे नींद आ गयी मगर आज वो जगी हुयी थी माँ बाहर जाने लगी।  लाली ने पूछा कहा जा रही हो तो माँ ने कुकू के घर को देख आती हु तू सो जा ताकि हुयी हैं।  लाली को जैसे कोई शक्ति मिल गयी जैसे दौड़ कर माँ के साथ जाने लगी।  माँ के मना करने पर भी वो नहीं रुकी और कुकू के घर आ कर सभी दरवाजे नल पानी लाइट पूरा घर जांच कर वो कुकू के कमरे में घुस गयी। वह पूरा कमरा बिखरा पड़ा था। बिना सोचे समझे वो कमरे को साफ करने लगी।  माँ ने आवाज़ दी तो दौड़ कर वापस आ गयी। आधा अधूरा कमर साफ तो कर दिया बाकि का कल आ करने की सोची।  अगले दिन जब माँ को बोली  की कुकू के घर नहीं जाना क्या तो  बोली   रोज़ रोज़ नहीं जाना कल फिर जा आउंगी।  लाली को कल का दिन बहुत दूर लगने लगा। अब न पढ़ाई  लग रहा  ना किसी और में। रीनू ने आकर  बोली की कुकू की फोटो निकली थी मगर माँ ने आवाज़ दी तो डर  के भाग आयी।  कल माँ जल्दी चली गयी तो।  दोनों ने कॉलेज से भाग कर आने का मन बना लिया।  तीसरे दिन जब वो कॉलेज से आयी तो कुकू के घर का दरवाज़ा खुला था।
इसका मतलब माँ यहाँ हैं।  उसने माँ को बाहर से आवाज़ लागई तो माँ ने भीतर आने को बोला।  दौड़ के अंदर गयी।  इधर उधर देखने के बाद वो चुपके से कुकू के कमरे में जा कर फ़टाफ़ट पूरा कमर साफ कर दिया और चुपके से कुकू की फोटो और एक पेन ले आयी।  अब उसे किसी से कोई मतलब नही हैं।  जल्दी जल्दी में वो अपना हाथ का कड़ा वही भूल गयी।  जब घर आयी तब पता चला की वो कुकू की  अलमारी में रह गया।  डर के मारे उसके पसीने आने लगे। जब उसने अपनी दोस्त रीनू को बोली की उसके हाथ का कड़ा कुकू के कमरे में रह गया तो रीनू बोली अगर कुकू को ही मिला तो कोई बात नहीं मगर उसकी मां को मिला तो बहुत बुरा होगा क्योकि उसकी माँ बहुत गुस्से वाली हैं। दोनों ने उसके बाद कुकू के घर की तरफ जाना बंद कर दिया। थोड़े दिन बाद जब कुकू और उसके घरवाले वापस आये तो दोनों सहेलियां छुपी छुपी रहती थी। कुकू की माँ ने जब लाली को देखा तो आवाज़ दी और बोली की इधर आओ। लाली की जैसे जान ही निकल गयी। डरती हुयी कुकू की माताजी के पास गयी। कुकू की माँ बोली। .. मैं कुछ सामान दे रही हु तुमारी मां को दे देना।  इतना कहते ही लाली की हवा निकल गयी कही वो कड़ा देकर मां को कुछ सुनाना तो नहीं चाहती हैं। कुकू की माँ ने शादी की मिठाई और कुछ सामान दिया की माँ को दे देना और थोड़ी देर बाद मैं भी आउंगी। लाली ने गर्दन हिलाकर है की और मिठाई आदि ले कर घर आ गयी। थोड़ी देर बाद कुकू की माँ भी आ गयी। दोनों सहेलियों बातें करने लगी। लाली को उनकी बातें सुननी थी मगर जब भी वो उनके पास जाती वो चुप हो जाती।  एक दिन कुकू की मां ने देखा की कुकू और लाली बात नहीं कर रहे हैं मगर एकदूजे को छुपछुउपकर देख रहे हैं तो उसने लाली की मां से बात की। दोनों की मा ने रीनू को पकड़ कर पूछा की क्या मज़ार हैं तो रीनू दर के मरे बताया की लाली कुकू को पसंद तो करती हैं मगर दोनों के बिच कुछ नहीं हैं।   ने जोर देकर पूछा की सच बता  कुछ नहीं हैं ना वरना तुझे तो में एक मिनिट में ठीक कर दूंगी। रीनू ने कहा की नहीं अभी तक कुछ नहीं हैं।  इधर कुकू की माँ ने बातों बातों में कुकू से पूछा तो उसने इस कुछ नहीं कहा क्योकि वो भी डर गया अपनी माँ से।  दोनों की माँ ने जब वापस बात की तो ये तो तय हैं की दोनों के बिच कुछ नहीं हुआ अभी तक मगर एकदुझे को अच्छे लगते हैं बस। कुकू पढ़ाई के लिए दूसरे शहर चला गया।  उसके पास अपने अनकहे प्यार की निशानी के तौर पर वो कड़ा ही हैं जो लाली भूल आयी थी।  समय बिताता चला गया। लाली के रिश्ते आने लगे मगर उसकी माँ को कोई लड़का पसंद नहीं आ रहा था।  लाली की दादी और सभी घर वाले लाली की शादी को चिंतित थे मगर लाली नहीं। उसने कैसे ही करके कुछ साल और निकालने थे। जब तब कुकू भी आ जाये पढ़ाई पूरी करके।  कुकू की माँ के पास एक बहुत बड़े व्यापारी ने अपनी लड़की के लिए रिश्ता ले आया।  कुकू के पिताजी ने तो हां करने की कोशिश की मगर उन्होंने कुकू को जो पसंद होगी उसी लड़की से शादी होगी।  न तो कुकू का कही रिश्ता हो रहा था न ही लाली का।  कुकू ने अपनी माँ को बताया की पढ़ाई ख़त्म होने के बाद वो लन्दन में नौकरी करेगा। कुकू और लाली की माँ के बिच अब ज्यादा बात नहीं होती हैं मगर दोनों एक दुझे के घर न जाकर बाहर बातें करती हैं.लाली ने बहुत बार कुकू के बारे में पूछने की कोशिश की मगर कुकू की माँ ने सुना अनसुना कर दिया। रीनू की शादी में लाली ने धमाल किया मगर उसका चेहरा हर वक्त कुकू के इंतज़ार में उदास ही रहता था।  कुकू के पिता ने कुकू की माँ को कुकू के लिए लड़की पसंद करने की बात कहती तो कुकू की माँ अपने बेटे के लिए कोई खाश बहु की बात करती।  एक दिन कुकू और लाली की माँ में बहस हो गयी की किसकी बहु ख़ास होगी या किसका जवाई ख़ास होगा। ऐसी बात को लेकर जब दोनों ने बात बंद कर दी तो लाली की तो सारी  उम्मीद ही खत्म हो गयी।  एक दिन लाली को पता चला की कुकू आ रहा हैं और उसकी सगाई के साथ साथ शादी भी हो जाएगी और वो वापस जल्दी ही चला जायेगा। उसका मन उदास सा रहने लगा। लाली की माँ ने भी लाली को बिना बताये उसकी सगाई तय कर दी।  लाली ने अपनी माँ को कुकू पसंद हैं ये डर के मारे बता ना सकी।  सगाई भी कुकू की सगाई के समय ही तय होनी थी। इधर कुकू भी अपनी माँ के आगे कुछ नहीं बोला। लाली भी मौन रह कर सब स्वीकार कर लिया। दोनों घरों में अपने अपने बच्चो की सगाई को लेकर जोर जोर से तैयारी चल रही थी। सभी खुश थे। मगर लाली और कुकू खुश नहीं थे। दोनों घर के डर से कुछ बोल नहीं पा रहे थे।  कुकू जब घर आया तो किसी तरह लाली को देखना चाहता था। लाली भी किसी तरह कुकू से नज़र मिलाना चाहती थी। कुकू की माँ ने कुकू को डराते हुए कहा की अगर वो लाली से मिला या बात की तो वो अपनी जान दे देगी। उधर लाली की माँ ने भी लाली को बोला की अगर उसने किसी भी तरह से कुकू की बात की या कुकू से मिली तो तो वो अपनी जान दे देगी। लाली ने रीनू के साथ कुकू से अपना कड़ा मंगवाए की कोशिश की। रीनू ने डर के मारे मना कर दिया। लाली का और कुकू के दिन निकलने मुश्किल हो गए।  दोनों एक दुझे को बेहद प्यार तो करते हैं मगर कुछ भी नहीं कर पा रहे हैं।  कुकू ने किसी तरह लाली को सन्देश देने की ठान ली। वो कड़े को अपनी खिड़की पर बाँध दिया जिससे लाली को पता चल जाये की वो उसको प्यार करता हैं।  लाली ने जब कड़े को देखा तो उसने भी पेन को अपने खिड़की के बहार टांग दिया। अब दोनों समझ गए की किसी तरह मिलना हैं परन्तु कैसे। दो दिन बाद सगाई हैं लाली की। कुकू की भी हैं। रीनू के साथ कुछ बाजार से सामान लेने के लिए निकली तो उसने कुकू को भी बाहर जाते देख लिया।  बाजार में दोनों पहली बार मिले। कुछ बोल नहीं पाए मगर दोनों की आँखों में आशु थे।  कुकू ने हिम्मत कर कहा की अगर मुझे चाहती हो तो कल सुबह स्टेशन आ जाना।  वरना जो हो रहा हैं वो स्वीकार कर लेना। लाली कुछ न बोल सकीय परन्तु इशारों से बोला की आ जाउंगी।  दूसरे दिन सुबह लाली जब तैयार हुयी की घर से भाग जाऊ तो माँ ने कुछ काम के लिए रोक लिया।  अपने पास बिठा कर सगाई की तैयारी बताने लगी की तेरे ससुर को ये। . सास को ये सभी घर वालों को जो जो देना हैं बताने लगी फिर जब वो ज्यादा ज़िद करने लगी तो रीनू आ गयी। माँ ने रीनू को पारलर वाली को बुलाने को बोला था इसलिए वो उसे ले आयी।  लाली ने गुस्से से रीनू को देखा तो रीनू बोली माँ ने मुझे बोला तो क्या करती।  तीन चार घंटे बिताने के बाद जब लाली जब खिड़की से बहार देखा तो कुकू गुस्से से लाल पिला हो कर घर में गुस रहा था।  लाली ने देखा वो कड़ा भी नहीं हैं और कुकू का पेन भी गायब।  वो समझ गयी की अब कुछ नहीं हो सकता हैं। कुकू भी परेशां हो कर माँ के पास बेठ  गया।  सगाई के दिन सभी व्यस्त थे अपने कामों में। लाली अपने कमरे में तैयार हो रही थी की रीनू ने आकर बताया की लड़के वाले आ गए हैं। मगर लड़का नहीं आया हैं।  उधर कुकू भी तैयार हो गया की लड़की के घर जाना हैं।  सभी लोग निचे व्यथ थे वो अकेला कमरे में।  पता चला की माँ खास खास लोगो को लेकर लड़की के घर गयी हैं।  बाकि लोग भी जाने की तैयारी करने लगे।  अब कुकू अकेला घर में।  खिड़की में बैठ कर लाली के घर को देखने लगा की लाली नज़र आ जाये एक बार।  लाली भी अकेली कमरे में थी तो वो भी उठ कर जैसे ही बहार देखने को हुयी उसकी नज़र कुकू पर गयी।  छुप कर देखने लगी मगर कुकू ने देख लिया।  कुकू से रहा न गया।  उसने खिड़की से निकल कर पाइप के सहारे उतरने लगा।  लाली को डर लगा की कही कुकू को चोट न लग जाये।  फटाफट कुकू उत्तर कर लाली के घर की तरफ दौड़ने लगा। बाहर कोई नही था इसलिए जल्दी से लाली के घर की ऊपरी मंज़िल में चढ़ने लगा।  लाली ने साड़ी फेक कर उसकी सहायता की।  अब कुकू लाली के कमरे में आ गया। लाली दौड़ कर कुकू से लिपट गयी कुकू भी कास कर पकड़ लिया लाली को।  दोनों रोने लगे और वह से भागने की सोचने लगे की दरवाजा झोर से बजा।  सामने लाली की माँ कड़ी थी।  उसके पीछे कुकू की माँ भी। दोनों पहले गुस्से में देखने लगी की पूरी भीड़ कमरे में आ गयी।  कुकू और लाली कुछ भी समझ नहीं पाए की क्या हो रहा हैं।  दोनों के घर के मेहमान यहाँ एक ही जगह।  कुकू की माँ ने अपनी हँसी रोक नहीं पायी और बोली हमने तो उसी दिन तुम दोनों की सगाई पक्की कर दी जब रीनू ने सब कुछ हमे बता दिया।  क्या प्यार हैं दोनों में। मेने ही प्लान बनाया की दोनों की सगाई तो करते हैं मगर प्यार कितना करते हैं देखना पड़ेगा इसलिए ये सब ड्रामा किया जिसमे तुम्हारी सहेली रीनू भी हमारे साथ थी. कुकू की माँ ने कहा की जब तुम दोनों इतना शर्माने लगे तो हमे ये ड्रामा करने में मज़ा आया। हम दोनों बहुत ही अच्छी सहेलियां हैं इसलिए एकदुझे को जल्दी समझ गयी और हमने तुमरे प्यार। .सच्चे प्यार की परीक्षा भी लेना फिर तुमरे दिल में एकदुझे के लिए और प्यार बढ़ाना था।  हम दोनों माँ ने अपने बच्चो के लिए ये सब किया था।  ।  दोनों सरम के मरे पसीना पसीना हो गहोई थे।  कुकू और लाली की सगाई इस तरह होगी ये कोई नहीं जनता था सिवाए तीन जानो के। .कुकू और लाली की माँ और तीसरा। ..मैं। .. 

Wednesday, 24 August 2016

सेविका

सेविका
गॉव में अकाल पड़ा। सभी अपने जानकारों या दूर रिस्तेदारों के यहाँ पलायन करने लगे। जानवरों को रखना और खिलाना बहुत मुश्किल सा  हो गया। पूरा गॉव अपने जानवरों को ओने पौने दामों में बेच कर जा रहे थे।
पन्ना और उसकी पत्नी अपनी एकलौती बिटियाँ लाडो के साथ वही थे। कारण कि उनके पास न तो पैसे थे , न ही जानवर और न ही कोई बाहर रिस्तेदार जिसके यहाँ जा सके। पन्ना जहा काम करता हैं वो हैं बाबूजी। .नाम किशनराम। सभी प्यार से बाबूजी ही कहते हैं।  बाबूजी भी अपने परिवार के साथ पत्नी और दो लड़के और एक लड़की के साथ शहर जाने की तैयारी कर रहे हैं।  पन्ना को वो साथ ले जाना चाहते हैं मगर पन्ना की पत्नी थोड़ी बीमार होने के कारण अभी साथ नहीं चल सकती हैं। इसलिए पन्ना ने अपनी बिटियाँ को बाबूजी के साथ भेजने का मन बना लिया। दिल पर पत्थर रखकर वो अपनी बिटियाँ को उनके घर छोड़ने की तैयारी करने लगा। पन्ना की पत्नी कुछ भी नही कह पा रही थी उसे सिर्फ रोना आ रहा था। बाबूजी उसी का इंतज़ार कर रहे थे।बाबूजी को अपनी बिटिया लक्ष्मी के लिए एक साथी कह दो या एक ध्यान रखने वाली कह दो की चाहत के कारन उसे साथ ले लिया। सभी शहर आ गए। यहाँ किशनारामजी का एक बड़ा सा मकान हैं जहा तीन चार कमरे और इस ज़माने की सुख सुविधा। नौकरों का भी एक कमरा हैं जहा वो लाडो रहेगी। एक दो दिन लाडो के नाम से जब  पुकारा तो
रिस्तेदारों ने आपत्ति की यहाँ लाडो का मतलब अपनी बिटियाँ हैं इसलिए इसका कोई और नाम दो। बाबूजी ने अपनी लक्ष्मी बिटिया से पूछा तो उसने मज़ाक में उसे नौकरानी कहा मगर बाबूजी ने मना किया तो बड़े भाई राजू ने बाई बोला वो भी नहीं जमा। लाडो ने कहा की बाबूजी हम तो आपके सेवक हैं इसलिए इस ही कोई नाम कहा मुझे।  बाबूजी ने सेवीका नाम दिया। सभी सेविका सेविका कहने लगे। लक्ष्मी के पुराने कपडे पहन कर सेविका इतराते हुए सभी का काम करने लगी। थोड़े समय बाद जब वो बड़ी हुयी तब तक उसने पुरे परिवार को संभाल लिया। उसकी दुनिया केवल बाबूजी का घर ही था। सभी बहार घूमने जाते मगर वो पुरे घर का ध्यान रखती। कभी कोई शिकायत नहीं। क्योकि उसे लक्ष्मी दीदी के कपडे चप्पल और सभी सामान मिल जाता। खाने को भी मिल जाता था।  ऐसे ही समय निकलता रहा। बाबूजी के सभी बच्चे स्कूल जाते तो लाडो मतलब अब सेविका को पढ़ने की इच्छा होती। मगर चुप रहती ,अब सभी उसे सेवी कहते। नया ज़माना जो आ गया। सेवी सेवी कह कर सभी दिन भर उसे काम करवाते। आज सुबह किसी को चाय नहीं मिली तो सभी एक सभी सेवी सेवी करते आवाज़ लगते रहे। किसी ने उसके कमरे जा कर संभाले की जरुरत नहीं समझी। बाबूजी और माताजी जब थकहार कर उसे देखने गए तो हैरान रह गए। तेज़ बुखार में वो बेहोश सी पड़ी थी। डॉ को बुलाकर दवा आदि देकर थोड़ा आराम करवाया। पूरा दिन सबके लिए भारी पद गया। सभी का काम रुक जाने के कारण एकदूसरे को सेवी का ध्यान रखने की सलाह दे रहे थे। सबको पता था की अगर ये ज्यादा दिन बीमार रही तो सभी को काम करना पड़ेगा। माताजी एक मात्र थी जो उसे सच्चे मन से सेवा करके ठीक करना चाहती थी वरना बाकी सभी अपने मतलब से। माताजी के कारण  दो तीन दिन में सेवी सही हो गयी। जैसे ही ठीक हुयी सभी ने फिर से हुकुम चलाना शुरू कर दिया। उसे किसकी जरुरत हैं ये किसी ने नहीं पूछा बस उनका कोई काम नहीं रुकना चाहिए।

Tuesday, 7 June 2016

अधभु ०४

अधभु ०४
अब्दुल चाचा को सभी चाचा कहते थे। क्या हिन्दू क्या मुसलमान सभी के चाचा थे। रिक्शा चलते थे। एक दिन उनकी बेटी सबनम जो अधभु के स्कूल में अध्यापिका हैं घर आते ही अपने अब्बा से बोली की कल से स्कूल नहीं जाएगी वहां नए स्पोर्ट्स टीचर ने आते ही उनपर गलत इल्ज़ाम लगाया और सबके सामने ज़लील किया। चाचा बोले की शायद इसमें तेरी कोई गलती रही होगी मगर सबनम ने कहा की उसका कोई लेना देना नहीं था मगर नए स्पोर्ट्स टीचर खन्ना साब ने जानबूझ कर उसे बच्चों के सामने ज़लील किया क्योकि वो मुझे पर गलत नज़र रखते हैं। दूसरे दिन जब अधभु ने सबनम दीदी को स्कूल चलने के लिए बोला तो सबनम ने अधभु को अकेले  कहा  तबियत सही नहीं हैं। अधभु अकेले जब स्कूल गया तो खन्ना साब ने सबनम के बारे में पूछा तो अधभु ने कहा की दीदी की तबियत ठीक नहीं हैं। स्कूल छूटने के बाद खन्ना सबनम को देखने उसके घर पहुंच गए। सबनम अकेली थी। उसने खन्ना साब को बिठा कर सरबत बनाया। खन्ना साब ऊपरी मन से माफ़ी मांग रहे थे। इतने में अधभु भी वहां आ गया। खन्ना साब ने उसे बाहर खेलने को कहा मगर सबनम ने आँखों से नहीं जाने का इशारा किया किन्तु खन्ना साब के डर से अधभु वहां से निकल गया। खन्ना साब किसी भी तरह से सबनम को अपने वश में करना चाहते थे। सबनम की गरीबी और उसके अब्बा का रिक्शा चलाना इन दोनों को कमज़ोरी समझ कर खन्ना साब सबनम की पीछे लगे हुए थे। अधभु ने जाते वक्त दरवाजा बंद कर दिया। खन्ना साब खुश हो गए। वो कुछ सोच रहे थे की धड़ाम की आवाज़ आई। जब खन्ना साब ने दौड़ कर बाहर जाकर देखा तो उनकी मोटर साइकिल गिरी हुयी थी और एक बड़ा सा पत्थर उस पर गिरा हुआ था। किसी को भी समझ नहीं आया की ये इतना बड़ा पत्थर कोई लेकर आया। वहां सिर्फ अधभु ही खड़ा था मगर वो बहुत छोटा सा हैं और ये पत्थर चार पांच आदमी भी मुश्किल से उठा सकते थे। सभी हैरान थे। पत्थर को बड़ी मुश्किल से हटा कर खन्ना साब ने अपनी बाइक को देखा तो वो लगभग पूरी टूट चुकी थी।  घसीट कर ले जाने की कोशिश की मगर वो चल नहीं प रही थी। सामान ले जाने वाली गाडी में रख कर खन्ना साब अपनी बाइक ले गए। सबनम ने अपने आप को खुश नसीब समझा और अल्लाह को शुक्रिया अदा करके ये सोचने लगी की ये इतना बड़ा पत्थर आया कहा से। रात को जब जिमरम अपने काम से वापस आया तो समनम ने खन्ना साब की बाइक पर पत्थर गिरा पूरी कहानी बताई। सभी जब सोने लगे तो जिमरम ने अधभु को डांटा की पत्थर किसी इन्सान के ऊपर गिरता तो वो मर सकता था। अधभु ने कहा की उसने सोच समझ कर वो पत्थर गिराया वर्ण दीदी को मुशीबत हो सकती थी। माना की जोश में पत्थर थोड़ा बड़ा फेंका मगर आगे ये ध्यान रखूँगा। जिमरम बोला। थोड़ा बड़ा था ये पत्थर। .पगले ये काफी बड़ा हैं। अब ऐसे हटाएगा कौन। अधभु। .किसको। वो पत्थर तो कब का हट चूका हैं। बाहर कोई पत्थर नहीं हैं। कोई गाडी आई और पत्थर ले गयी। जिमरम ने आगे ये एससी हरकत नहीं करने को बोला। कुछ दिनों बाद सबनम वापस स्कूल जाने लगी। अधभु ने जिद करके वापस स्कूल ले गया। वहा जाते ही खन्ना साब ने फिर वही हरकत की। इस बार अधभु वो वही पता चल गया। घर जाते वक्त वो खन्ना साब की बाइक को लोहे की छड़ से तोड़ डाली। एक ही वार में बाइक टूट गयी। जब खन्ना साब उसे ठीक करवाने ले जा रहे थे इस बीच एक आदमी से झगड़ा हो गया। वो आदमी गुस्से में आ कर खन्ना साब की खूब पिटाई कर डाली। और खन्ना साब हस्पताल पहुंच गए। वो आदमी कौन था कोई नहीं पहचान पाया क्योकि वो अधभु ही था। अधभु वापस छोटा बच्चा बन गया। सबनम को इसकी जानकारी नहीं हो पायी। समय बीतता गया। सबनम की शादी हो गयी। चाचा बूढ़े हो गए। उनकी देखभाल जिमरम और उसका परिवार करता था। अधभु अब कॉलेज जाने लगा। कॉलेज में उसने देखा की कुछ लोगो के अलग अलग ग्रुप बने हुए हैं। लड़के दादागिरी करते हुए लड़कियों और नए लड़को को परेशान करते हैं। कैंटीन में वहां का आदमी ड्रग बेचता हैं। लेक्चरर पढ़ाई काम और अपने घर आने को ज्यादा बताते हैं। सभी अपनी अपनी मनमानी कर रहे थे। उसे देखा नहीं जा रहा था मगर नकनि माँ के कहने पर चुप रहता था। एक दिन कॉलेज कैंटीन में जब वो अपने दोस्तों के साथ चाय पि रहा था तब वहा दो लड़को के बिच लड़ाई हो गयी। एक लड़के ने जोश में आकर दूसरे लड़के को चाक़ू से वार कर डाला।और भाग गया। अधभु उसे उठाकर हस्पताल की तरफ दौड़ा। कॉलेज के कुछ लड़के भी उसके साथ आ गए। लड़के के घर वाले भी वही पहुंच गए। ज्यादा खून बहने के कारण लड़के की हालत ख़राब हो गयी। पुलिस ने आकर सभी के बयान लिए कोई दूसरे लड़के को पहचान नहीं पा रहा था। अधभु ने उस लड़के का हुलिया और नाम पता सभी बता दिए। डॉ ने खून की जरुरत बताई तो सभी अधभु को खून देने की बात की। अधभु फंस गया। उसकी रबों में खून हैं भी नहीं और यहाँ खून देने की बात आ गयी। जब नर्स ने अंदर ले जाकर खून लेने के लिए सुई को हाथ में लगने की कोशिश कर रही थी की अधभु ने पलक झपकते पाव से टेबल खिसका दी नर्स का ध्यानं उस तरफ चला गया और उसने पास राखी बोतल से खून सिरिंग में डाल  दिया। टेस्ट के बाद अधभु का खून उस लड़के से मैच नहीं होने के कारण ब्लड बैंक से खून लेना पड़ा। पुलिस जब उस चाकू मारने वाले लड़के के घर पहुंची तब तब उसके पिताजी जो की एक बड़े व्यापारी थे ने उसे शहर से बाहर भेज दिया। पुलिस खाली  हाथ वापस आई। कुछ दिन ऐसे ही चलता रहा इस बिच वो चाकू मरने वाला लड़का अक्षय देश से बाहर जा चूका था.पुलिस रोज़ कॉलेज आती और अधभु और उनके दोस्तों को परेशान करती। पुलिस ने इल्ज़ाम लगाया की उस अक्षय को तुम लोगो ने भगाया। 

Thursday, 2 June 2016

अधभु ०३

अधभु ०३
जिमरम इतनी बड़ी बड़ी इमारते देख पागल सा हो गया ,सडकों पर तेज़ दौड़ती गाड़ियां और पौ पौ करते सरपट भाग रही थी। वो और उसकी पत्नी नकनि कभी ऊपर तो कभी सडकों पर देख कर पागल से हो गए उन्होंने अधभु के दोनों हाथ एक एक  पकड़ रखे थे की एक से छूट जाये तो दूसरा पकड़ा रहे।  इतने सारे लोगो की भीड़ देख  हक्के बक्के रह गए। कहा जाये और इस नयी दुनिया में कैसे रहेंगे। कोई रास्ता नज़र नहीं आ रहा था। ये नयी देल्ही हैं। उन्होंने कभी सपने में भी ऐसा नहीं सोचा था की शहर ऐसा होता हैं। गॉव के एक बुजुर्ग ने कोई पता दिया था मगर किसी को जगह पता नहीं थी या समय नहीं था। अधभु ने वो लिखा पता देखा और एक बस की तरफ चलने का इशारा करने लगा। जिमरम कुछ समझ नहीं आ रहा था मगर अधभु की ज़िद के कारण वो उस बस स्टैंड की तरफ चलने को हुआ। सड़क के दूसरी तरफ जाना था मगर गाड़ियों की रेलमपेल से वो परेशान हो गया। सड़क को कैसे पार करे इस नकनि और अधभु के साथ। .थोड़ा थोड़ा सरकता अधभु उन्हें क्रासिंग के पास ले गया और  जब सभी गाड़ियां क्रासिंग पर रुकी तो अपने हाथो के जोर से दोनों पत्नी पति को दौड़ा कर सड़क के उस पार ले गया। जिमरम और नकनि को अहसास भी नहीं हुआ की दूसरी तरफ आ गए। जिमरम तो डरा हुआ था की कही कोई गाड़ी टक्कर न मार दे। दोनों को कुछ समझ नहीं आया की क्या हुआ। उनकी आँखे फटी सी रह गयी। एक बस आकर रुकी और जिमरम अपने परिवार के साथ उसमे चढ़ गया। कंडक्टर ने जब पता देखा तो टिकट काट कर बैठने को बोला। जिमरम ने कंडक्टर को बोला की जगह आने पर बता दे जिससे वो उतर जाये। थोड़ी देर बाद कुछ लड़के उस बस में चढ़े। वो सभी कॉलेज के छात्र थे। मस्ती कर रहे थे। पास एक लड़की को घूरने लगे और कुछ अप शब्ध बोलने लगे। भीड़ ज्यादा होने के कारण लड़के जानबूझ कर धक्के लगा रहे थे। थोड़ी से शीट पर जिमरम अपनी पत्नी के साथ बैठा हुआ था और अधभु उनके पास खडा था। लड़के भी वही खड़े थे। अधभु को उनकी हरकते पसंद नहीं आ रही थी.वो बार बार धक्का मुक्की कर रहे थे। अधभु से रहा नहीं गया और उसने धीरे से पीछे खड़े लड़के को धक्का ऐसा दिया की किसी को पता नहीं चला की धक्का कहा से आया मगर पीछे खड़े सभी लड़के गिर पड़े। उठ कर इधर उधर देखने लगे मगर ये धक्का कहा से आया पता नहीं चला। ऐसा दो तीन बार हुआ तब जाकर लड़के चुप रहकर बस को पकड़ कर खड़े रहे क्योकि बार बार गिरने से उनका मज़ाक बन रहा था। कंडक्टर ने जिमरम को उतरने का इशारा किया की अगला बस स्टैंड पर उतर जाना। तीनो बस से उतारकर बताये पते पर पहुंचे। जब घर का दरवाज़ा खुल तो एक औरत ने वही रुकने और इंतज़ार करने को बोल। जिमरम बोला की ऐसा तो अपने गॉव में नहीं होता हैं की अतिथि को बाहर खड़ा कर दो। थोड़ी देर बाद वापस दरवाज़ा खुल तो औरत ने कहा की वो अब यहाँ नहीं रहते हैं और हमे पता नहीं वो कहा रहते हैं। जिमरम के पैरों की ज़मीन खिसक गयी। इतने बड़े शहर  जाये। रात होने को हैं इसलिए सोचा किसी होटल में आज रुक जाते हैं और कल सुबह सोचेंगे की आगे क्या करना हैं। कोई सस्ता होटल के कमरे में तीनो सो गए। जिमरम और नकनि को  बाद नींद आई क्योकि बाहर किसी का झगड़ा को रहा था जिससे शोर गुल बहुत हो रहा था। अधभु  कमरे में आते ही सो गया। सुबह जब वो उठे तो अधभु नाकर तैयार था। नकनि भी तैयार हो रही थी जिमरम की आँखे देरी से खुली। नास्ता करने जब पास के होटल में गए तो वहा रात की लड़ाई की चर्चा चल रही थी। एक वयक्ति सारी बातें ऐसे बता रहा था जैसे पूरी घटना उसके सामने हुयी हो।  जिमरम और अधभु दोनों मजे से पूरी बात सुनने को खड़े हो गए। वो आदमी बताने लगा की रोज़ रात में जग्गू दादा यहाँ शराब पीकर लड़ाई करता हैं मगर कल रात जब वो सामने रहने वाले चाचा और उसकी बेटी से मारपीट कर रहे थे तो एक नौजवान आया और जग्गू दादा को पहले समझने लगा मगर जग्गू दादा ने उसे धक्का से कर यहाँ से जाने को बोला। मगर वो लड़का पलटकर जग्गू दादा की वो धुनाई की कि जग्गू दादा भाग खड़ा हुया मगर थोड़ी देर बाद वापस अपने १०-१२ साथियों को हथियार के साथ आया मगर वो लड़का सब पर भारी पड़ा। जो पटक पटक कर मारा सारे गुंडे भाग खड़े हुए। जिमरम ने उसका नाम पूछा तो वो आदमी बोला की करीब २५ साल का लड़का था गौर और लम्बा चौड़ा। फुर्ती इतनी की पलक झपकते ही इस किनारे से उस किनारे पर। तलवार और चाकू को अपने हाथों से पकड़ कर तोड़कर फेक दिए। वो तो किसी और दुनिया का आदमी लगता था। जिमरम ने जल्दी से खाने को बोला। तीनो जब नास्ता करके अपने होटल के कमरे में आये तो जिमरम ने अधभु से पूछा की कही रात को तुम बाहर गए। अधभु ने कहा की वो तो अपनी मां के पास ही सोया इसलिए कही जाने का सवाल ही नहीं होता हैं पिताजी। दोनों बहस करने लगे नकनि बीचमे बोलने की कोशिश भी करती तो जिमरम रोक देता। जिमरम को अधभु की ये अजीबों गरीब शक्ति का धीरे धीरे शक होने लगा। रात को जो हुआ वो अधभु का ही किया हुआ हैं। ये बात नकनि जानती थी मगर वो जिमरम को नहीं बताना चाहती थी की अधभु की ये सब कर रहा हैं चाहे वो जंगल से लड़के पकडे हो या बस में लड़को को और जग्गू दादा को भगाना। जिमरम इस लड़ाई से दूर रखना चाहता था इसलिए शहर लाया मगर अधभु अपने शरीर को कैसे बड़ा कर लेता हैं और कैसे इसमें शक्ति आ जाती हैं ये अधभु के आलावा कोई नहीं जानता हैं। वो इस पृथ्वी का नहीं हैं। गॉव में जब जोरो की बारिश हुयी तब अधभु एक यान जो की इसके शरीर से ही बना था में सवार होकर पृथ्वी के पास से गुजर रहा था की बिजली की चमक को देखने की उतसुकता उसे पृथ्वी पर ले आयी और वो जिमरम के जानवरों के बाड़े में छुप कर पुरे पृथ्वी का रहस्य क्षण में जान गया और जिमरम के पास छोटा बच्चा बनकर आ गया। शरीर छोटा बड़ा करना ,कितनी भी तेज़ बन्दुक की गोली को हाथ से पकड़ना ,हवा से तेज़ दौड़ना सभी शक्तियां उसमें हैं। मगर वो जब तक हो सके सामान्य रहना चाहता हैं क्योकि उसको माँ बाप का प्यार मिलने के कारण वो प्यार की भाषा समझ गया। नकनि ने चाचा के ऊपर खाली पड़े कमरे में रहने के लिए किराए पर ले लिया। इस तरह वो अब दिल्ही में रहने को राज़ी हो गए। जिमरम ने पास एक फैक्ट्री में नौकरी करनी शुरू कर दी और अधभु को वहां एक सरकारी स्कूल ले पढ़ने को भेज दिया। नकनि ने अधभु को समझाया की स्कूल में अपनी शक्ति का उपयोग नहीं करेगा। सामान्य बालक की तरह जायेगा और आएगा। बाद में  हैं कर मगर स्कूल समय सामान्य रहना होगा। इस तरह अधभु एक छोटा बच्चा बन कर स्कूल जाता और वापस आकर पढ़ाई भी करता और अपनी माँ के साथ घर के काम में हाथ भी बाटता। चाचा की लड़की रानी स्कूल में पढ़ाती हैं वही अधभु भी जाता हैं इसलिए दोनों साथ साथ आते जाते हैं। 

Tuesday, 31 May 2016

अधभु ०२

अधभु ०२
जिमरम ने अपने सारे जानवरों को अपने पडोसी को सौंप कर कहा की कुछ समय शहर रह कर वापस आ रहे हैं तब तक  इन जानवरों का ख्याल रखे। बस में सवार होकर जब जिमरम अपने गॉव से शहर की तरफ जाने लगा तो एक बार उसे गॉव छोड़ने का दुःख हो रहा था वही अधभु की इस शक्ति से परेशान हो रहा था।  महाभारत में भीम की ताकत सौ हाथियों के बराबर थी वो सुना था मगर अधभु में ये शक्ति कैसे  आयी और ये  किसका बच्चा हैं ये भी नहीं पता। मगर मन में अब उसके लिए सगे बेटे से ज्यादा प्यार था इसलिए डर रहा था की कही कोई अनहोनी न हो जाये अधभु के साथ। बारिश की वजह से सड़के टूटी हुयी थी। बस हिचकोले खाती चल रही थी की  गढ़े में जा फसी।  सभी सवारियां निचे उतर कर देखने लगी। जिमरम ने अधभु को नीच उतरने और किसी भी प्रकार का धक्का या सहायता के लिए मना किया। अधभु चुप बैठ गया। सभी जवान मर्द उस बस को निकलने का प्रयास करने लगे मगर बस हिल तक नहीं रही थी इसलिए कंडक्टर ने सभी आदमियों को धक्का लगने और बाकि की सवारियों को निचे उतरने को बोला।  सभी  गए और आदमी लोग धक्का देने लगे। बस हिली मगर गद्दे से बाहर नहीं आई। काफी देर परेशान होने के बाद सभी वही जंगल  सुस्ताने लगे। क्योकि थोड़ी देर बाद वापस धक्के लगने हैं। जब वापस धक्के लगने को हुए तो जिमरम ने अधभु को अपने साथ धक्का देने के लिए ले साथ खड़ा कर दिया। जिमरम ने अधभु बहुत ही धीरे  धक्का लगने को बोला। सभी जब एक साथ धक्का लगने लगे तो वही से गुजर रहे दो लड़के भी साथ हो गए धक्का लगने में। अधभु ने बहुत ही धीरे से धक्का लगाया और बस खड्डे से बाहर आ गयी। वो दोनों लड़के अपनी ताकत का नुमाईश करने लगे क्योकि आदमी तो पहले भी वही थे जो पहले धक्का लगा रहे थे बस वो दो लड़के और अधभु। जिमरम को ये बात पता थी मगर  चुप रहा। दोनों लड़के उसी बस में सवार यात्रा करने लगे। अपनी बहादुरी और ताकत से  डरा रहे थे। जब शहर आने को हुआ तो वो दोनों लड़के उतरने के लिए चिल्लाने लगे। ड्राइवर ने बस रोकी तो दोनों के हाथ जो आया सभी सामान लेकर निचे उतरे और जंगल की तरफ भागने लगे। सभी हक्के बक्के देखते रहे किसी को कुछ नहीं समझ आया क्योकि वो दोनों लुटेरे चोर निकले। किसी की हिम्मत नहीं थी की रोक सके या पकड़े। जैसे ही वो पेड़ों के पीछे भागे बस चलने लगी। अधभु जोर से चिल्लाया। ड्राइवर ने बस रोकी और जिमरम ने पूछा क्या हुआ तो बोला  मुझे पेशाब करनी हैं। बस ड्राइवर डर रहा था इसलिए वो शहर  तक रुकने को बोला। मगर अधभु जोर जोर से रोने लगा। कंडक्टर ने जिमरम को उसकी पत्नी और  अधभु के साथ निचे उतारा  और बस को भगा ले गया।
जिमरम बस के पीछे भागा मगर बस रुकी नहीं। अधभु ने दोनों को दूसरी तरफ मुंह करने को बोला की उसको शर्म आ रही हैं इसलिए दोनों मुंह दूसरी तरफ करे। अधभु पेशाब करने का नाटक करने  लगा। काफी देर हो गयी जिमरम ने मुड़ कर देखा तो अधभु नहीं था। दोनों इधर उधर ढूंढने मगर वो मिला। धीरे धीरे शाम भी होने लगी थी। नकनि को अपने बच्चे के खोने से बार  बेहोश हो रही थी। जिमरम नकनि  सम्भाल रहा था की कुछ दुरी पर किसी के कहराने की आवाज़ आयी। उसने सोचा शायद अधभु होगा। पास जाने पर देखा तो दोनों लड़के गिरे पड़े और साथ सामान भी रखा हैं। डरते हुए जिमरम ने पूछा की ये क्या हुआ तो बोले की एक बड़ा आदमी जो निकार पहने हुए था तेज़ी से आया और हमारी मार मार कर धुलाई  कर डाली और यफिर हम दोनों को सामान के  यहाँ पटक गया ,हमारी कमर तोड़ डाली। जिमरम ने पूछा की ये इतना बड़ा था बच्चा। जैसे ही हाथ पीछे किया दिखने के लिए अधभु का कपडा पकड़ कर आगे कर दिया। दोनों लड़के बोले नहीं ये तो छोटा बच्चा हैं वो तो साथ फ़ीट उचा और करीब २५ ३० साल का आदमी था। जिमरम ने अधभु से पूछा की तू कहा से आया। क्योकि काफी देर से उसे ढूंढ रहे हैं और वो गायब था। अधभु बोल की पेशाब करते वक्त वो फिसल गया और निचे गिर पड़ा। जिमरम ने  निकर का रंग पूछा तो जो रंग की अधभु  ने निकर पहनी थी वही रंग की निकर वो पहने आया था। जिमरम ने अधभु से डांट कर पूछने वाला ही था की नकनि को होश आ गया।  बच्चे को देख कर उसे गले लगाती चूमने लगी। जिमरम को कुछ अजीब लगा की ये इतना छोटा हे तो फिर वहा कौन था। अँधेरे के डर से वो दोनों लड़को को लेकर शहर की तरफ चल पड़ा मगर दिमाग में वो आदमी और अधभु में फर्क की सोचता हुआ चलने लगा। शहर में पहले पुलिस स्टेशन में जब जिमरम पंहुचा तो वहा  बस के सभी सवारियां अपने सामान के लिए  शिकायत कर रहे थे। मगर जब जिमरम को उन दोनों  सामान के साथ देखा तो दौड़ते हुए अपने सामान छींटे हुए उन दोनों लड़को को मरने लगे। पुलिस ने दोनों लड़को की हालात देखते हुए पहले हस्पताल ले जाना उचित समझा और सवारियों को अपने अपने सामान के साथ अपने घर जाने को बोला।