उसका कसूर क्या है
मेरा हर दूसरे तीसरे शर्मा दिन जी के घर आना हुआ था। शर्माजी के घर हरदम चालस्टेपी रहते हैं। शर्माजी का परिवार और उनके छोटे भाई का परिवार एक ही मकान में रहते हैं। दोनों का परिवार हंसता खेलता रहता है। वहाँ चार छोटे लड़के हैं। शर्माजी के एक लड़का और एक लड़की हैं बाकी तीन लड़के शर्माजी के छोटे भाई के बेटे हैं। सभी बॉय हाउस के विज्ञापन में दिए गए मैग गर्ल डॉल भी हमेशा के लिए अपने ऑफिस में रहते हैं। अगर वो भी ज़िद करता है तो उसे लड़की का सहारा लेना है,ये मेने काफी बार नोटिस किया गया लेकिन मैं बोल पर कुछ नहीं कर सका। आज सभी घर के लड़के अपने दोस्तों के साथ मूवी देखने जा रहे हैं और वो भी अपनी सहेलियों के साथ मूवी देखने का विचार कर रही हैं इसलिए उसे भी जाने दिया जाए। शर्मा जी ने अपनी माँ को भी गुड़ियाँ को आश्चर्य का झटका दिया। ऐसा ही कुछ समय हुआ जब मगरजी शर्माजी के भी अपने घर की चार वाली में थी कीमत। इस बात से उसकी मां को बहुत दुख हुआ क्योंकि इस घर में कोई भी महिला या लड़की बाहर नहीं घूमती थी। यहां किसी भी घर के बाहर या किसी सड़क तक किसी से भी बात नहीं की जा सकती। गुड़िया पढ़ने में सभी भाई-बहन की किस्मत थी मगर उसे घर में रख कर ही अपनी पढ़ाई करनी है। मेरी एक बिटिया हैं जिसे मैं अपना लड़का पोस्ट करता हूं और उसे हर बात की छूट देता हूं। और वो मेरे विश्वाश के साथ हमेशा अच्छे नंबर से पास हो रही हैं और गेम जंप में भी भाग ले रही हैं। मेने ये बात शर्माजी को नहीं बल्कि फालतू में एक दो उपदेश दिए और मैं अपनी बिटिया को स्वतंत्र रखना चाहता हूं। गुड़िया और मेरी चुन्नी दोनों एक ही कक्षा में मगर स्कूल में अलग-अलग हैं इसलिए उनका कभी मिलान नहीं हुआ। बारहवीं कक्षा का परिणाम आया। इस प्रकार यह दो में घोषित हुआ इसलिए मुझे इस पर ध्यान नहीं देना चाहिए। किसी काम से जब शर्मा जी के घर गये तो पता चला की परीक्षा परिणाम आये। मैं मन में अपनी बच्ची के लिए सोच ही रहा था कि गुड़िया के पास होने की खबर ले आई। आज वो प्रथम श्रेणी से सिद्धांत हो गए इसलिए अब अच्छे कॉलेज में आसानी से दाखिला मिल जाएगा। ये बात जब गुड़िया की माताजी और गुड़िया ने कही तो शर्माजी को गुस्सा आ गया। उन्होंने कॉलेज न जाने की बात कही कि अब शादी की बात न करें। काफी बहस के बाद भी शर्माजी नहीं माने। हार कर गुड़िया की माताजी ने जो समझो वो कह कर चली गई। आगे पढ़ें गुड़िया को मगरजी पसंद नहीं थी। गुड़िया ने कहा कि अपने शहर में जो पहली बार आई वो भी लड़की ही हैं। इस पर शर्माजी ने कहा कि लड़की और उसके पिता के बीच अच्छा व्यवहार है कि आगे वे लड़की को अपने साथ ले जाएं। जिज्ञासावश गुड़िया का नाम पूछा तो उसने बताया कि पूरे राज्य में कोई चुन्नीदेवी प्रथम आई हैं। मेरी ख़ुशी के सलाहकार नहीं, इस वक्ता शर्मा जी को आप देख कर छुपे हुए ही समझाते हैं। घर बैठे बैठे ने अपनी चुन्नी को जब देखा तो आपको गर्व महसूस हुआ। चुन्नी की सहेलियाँ और हमारे रिस्तेदार सभी घर पर सलाह लें। तुरंत बाद शर्मा जी के घर से न्योता आया कि गुड़िया की सगाई तय हो गई है और हम सभी को फोन किया गया है। मैं पूरे परिवार के साथ गया। गुड़िया के मुस्लिम वाले काफी प्यारे और पढ़े लिखे लोग हैं उनके घर में बहु बेटियां भी लिखी हुई हैं। जब उन्होंने चुन्नी को देखा तो सभी आगे-आगे की यात्रा करने लगे। शर्माजी को लड़की इतनी खुली करना पसंद नहीं थी मगर अपने घर पर बात करना नहीं चाहती थी इसलिए वो चुप रह रही थी। समारोह के अंत तक चुन्नी की बातें, मो.गुड़िया के मुस्लिम वाले भी चुन्नी की शोभा नहीं बना पा रहे थे। ये देख कर गुड़िया को और बहुत गुस्सा आया। एक तो उसकी मर्ज़ी के ख़िलाफ़ लीज़ हो रही थी वो और आगे की पढ़ाई चाह रही थी। ऊपर से चुन्नी कीगुड़िया के मितव्ययी लोग पर स्तुति कर रहे थे। दूसरे दिन शर्मा जी चुन्नी को नेकदिलबुरा देखना मेरे साथ नहीं आ रहा। मैंने जब कहा कि मेरी बेटी का मुंह खुल रहा है। जब उसने किसी की बात का विरोध किया तो कमरे में रोने लगी और अपने पापा को किसी की बात अनबन हो गई तो वो पहले से चुन्नी के हो गई और जब गुड़िया ने विरोध किया तो गुड़िया भड़क गई। गुड़िया को अंदर भेज कर मुझे जाने को कहा। मैं छुट्टियाँ वहाँ से निकल गया। चुन्नी कॉलेज भी जाने लगी और वह भी शानदार नंबर लायी। एक दिन शर्माजी के घर से डॉक्टर आया। शादी का था. चार दिन बाद हैं शादी। मैंने अकेले जाने का फैसला किया। मेरी पत्नी जी ने शादी से पहले शर्मा जी के घर के व्यवसाय से कोई काम काज का पता लगाने के लिए कहा, दूसरे दिन सुबह जब मैं शर्मा जी के घर गया तो घर में दोस्त था। गुड़िया की माताजी ने बताया कि रात को गुड़िया ने जहर खा लिया और सभी भाग में चली गईं। घर में सिर्फ हम औरतें ही हैं। मैं सीधा अस्पताल पंहुचा.शर्माजी और घर वाले थे। अंदर किसी को जाने की सिर्फ औरत ही जा थी। शर्माजी को अभी भी आदमी और औरत का पता नहीं चल रहा था। मेने उन्हें सनातन देते हुए कहा घर से किसी महिला को उंगलियां को बोला। कुछ देर बाद गुड़िया के राक्षस वाले भी गुड़िया की सास और ननद भी थी। एसएसएस को अंदर भेजा गया। शर्माजी ने अपने भाई से कहा कि केवल तुम अपनी भाभी को ले आओ और धीरे-धीरे कपडे के लाइनकन को बोलो। थोड़ी देर बाद जब भाभी जी आई और वो भी अंदर गुड़िया के पास। गुड़िया की तबीयत खराब हो रही थी। कोई सुधार नहीं हो रहा। कुछ देर बाद डॉ ने हार मान ली और डॉ ने शर्माजी से माफ़ी मांग कर कहा कि अगर इसे कुछ समय पहले ले आओ तो शायद बच जाओ मगर अब तो कुछ नहीं बचा है। सबसे रोना लागे। मैं शर्माजी को दिलासा देते हुए घर ले गया। शर्माजी रास्ते भर यही कह रहे थे कि मेरा कसूर क्या है। जबकि मैं और मेरे जैसे लोग ये सोच रहे थे कि गुड़िया का क्या कसूर था जो अपनी पढ़ाई छुड़वाकर शादी की और घर की गृहस्थी की तरफ से खरीद रहे थे। शर्माजी जैसे लोगों को इतना बड़ा हादसा होने के बाद भी समझ नहीं आता। मैं तो यही हूं कि कसूर था उसका जो ये कदम उठाता था मजबूर गुड़िया। फिफ्थोडी बाद में जब भाभी जी आई और वो भी गुड़िया के पास। गुड़िया की तबीयत खराब हो रही थी। कोई सुधार नहीं हो रहा। कुछ देर बाद डॉ ने हार मान ली और डॉ ने शर्माजी से माफ़ी मांग कर कहा कि अगर इसे कुछ समय पहले ले आओ तो शायद बच जाओ मगर अब तो कुछ नहीं बचा है। सबसे रोना लागे। मैं शर्माजी को दिलासा देते हुए घर ले गया। शर्माजी रास्ते भर यही कह रहे थे कि मेरा कसूर क्या है। जबकि मैं और मेरे जैसे लोग ये सोच रहे थे कि गुड़िया का क्या कसूर था जो अपनी पढ़ाई छुड़वाकर शादी की और घर की गृहस्थी की तरफ से खरीद रहे थे। शर्माजी जैसे लोगों को इतना बड़ा हादसा होने के बाद भी समझ नहीं आता। मैं तो यही हूं कि कसूर था उसका जो ये कदम उठाता था मजबूर गुड़िया। फिफ्थोडी बाद में जब भाभी जी आई और वो भी गुड़िया के पास। गुड़िया की तबीयत खराब हो रही थी। कोई सुधार नहीं हो रहा। कुछ देर बाद डॉ. ने हार मान ली और डॉ.उन्होंने शर्माजी से माफ़ी माँग कर कहा कि अगर इसे कुछ समय पहले ले आओ तो शायद बच जाओ शर्माजी से माफ़ी माँग कर कहा कि अगर इसे कुछ समय पहले ले आओ तो शायद बच जाओ शर्माजी से माफ़ी माँग कर कहा कि अगर इसे कुछ समय पहले ले आओ तो शायद बच जाओ शर्माजी से माफ़ी माँग कर कहा। शर्माजी से माफ़ी मांग कर जाओ और कहा कि अगर इसे कुछ समय पहले ले आओ तो शायद शादी के एक दिन बाद बच जाओ। मैंने अकेले जाने का फैसला किया। मेरी पत्नी जी ने शादी से पहले शर्मा जी के घर के व्यवसाय से कोई काम काज का पता लगाने के लिए कहा, दूसरे दिन सुबह जब मैं शर्मा जी के घर गया तो घर में दोस्त था। गुड़िया की माताजी ने बताया कि रात को गुड़िया ने जहर खा लिया और सभी भाग में चली गईं। घर में सिर्फ हम औरतें ही हैं। मैं सीधा अस्पताल पंहुचा.शर्माजी और घर वाले थे। अंदर किसी को जाने की सिर्फ औरत ही जा थी। शर्माजी को अभी भी आदमी और औरत का पता नहीं चल रहा था। मेने उन्हें सनातन देते हुए कहा घर से किसी महिला को उंगलियां को बोला। कुछ देर बाद गुड़िया के राक्षस वाले भी गुड़िया की सास और ननद भी थी। एसएसएस को अंदर भेजा गया। शर्माजी ने अपने भाई से कहा कि केवल तुम अपनी भाभी को ले आओ और धीरे-धीरे कपडे के लाइनकन को बोलो। थोड़ी देर बाद जब भाभी जी आई और वो भी अंदर गुड़िया के पास। गुड़िया की तबीयत खराब हो रही थी। कोई सुधार नहीं हो रहा। कुछ देर बाद डॉ ने हार मान ली और डॉ ने शर्माजी से माफ़ी मांग कर कहा कि अगर इसे कुछ समय पहले ले आओ तो शायद बच जाओ मगर अब तो कुछ नहीं बचा है। सबसे रोना लागे। मैं शर्माजी को दिलासा देते हुए घर ले गया। शर्माजी रास्ते भर यही कह रहे थे कि मेरा कसूर क्या है। जबकि मैं और मेरे जैसे लोग ये सोच रहे थे कि गुड़िया का क्या कसूर था जो अपनी पढ़ाई छुड़वाकर शादी की और घर की गृहस्थी की तरफ से खरीद रहे थे। शर्माजी जैसे लोगों को इतना बड़ा हादसा होने के बाद भी समझ नहीं आता। मैं तो यही हूं कि कसूर था उसका जो ये कदम उठाता था मजबूर गुड़िया। फिफ्थोडी बाद में जब भाभी जी आई और वो भी गुड़िया के पास। गुड़िया की तबीयत खराब हो रही थी। कोई सुधार नहीं हो रहा। कुछ देर बाद डॉ ने हार मान ली और डॉ ने शर्माजी से माफ़ी मांग कर कहा कि अगर इसे कुछ समय पहले ले आओ तो शायद बच जाओ मगर अब तो कुछ नहीं बचा है। सबसे रोना लागे। मैं शर्माजी को दिलासा देते हुए घर ले गया। शर्माजी रास्ते भर यही कह रहे थे कि मेरा कसूर क्या है। जबकि मैं और मेरे जैसे लोग ये सोच रहे थे कि गुड़िया का क्या कसूर था जो अपनी पढ़ाई छुड़वाकर शादी की और घर की गृहस्थी की तरफ से खरीद रहे थे। शर्माजी जैसे लोगों को इतना बड़ा हादसा होने के बाद भी समझ नहीं आता। मैं तो यही हूं कि कसूर था उसका जो ये कदम उठाता था मजबूर गुड़िया। फिफ्थोडी बाद में जब भाभी जी आई और वो भी गुड़िया के पास। गुड़िया की तबीयत खराब हो रही थी। कोई सुधार नहीं हो रहा। कुछ देर बाद डॉ. वे मैन ली और डॉ. हार गया। यूएसजी शर्मा ने माफ़ी मांग कर कहा कि अगर इसे कुछ समय पहले ले आओ तो शायद एक दिन बाद शादी कर लूंगा। मैंने अकेले जाने का फैसला किया। मेरी पत्नी जी ने शादी से पहले शर्मा जी के घर के व्यवसाय से कोई काम काज का पता लगाने के लिए कहा, दूसरे दिन सुबह जब मैं शर्मा जी के घर गया तो घर में दोस्त था। गुड़िया की माताजी ने बताया कि रात को गुड़िया ने जहर खा लिया और सभी भाग में चली गईं। घर में सिर्फ हम औरतें ही हैं। मैं सीधा अस्पताल पंहुचा.शर्माजी और घर वाले थे। अंदर किसी को जाने की सिर्फ औरत ही जा थी। शर्माजी को अभी भी आदमी और औरत का पता नहीं चल रहा था। मेने उन्हें सनातन देते हुए कहा घर से किसी महिला को उंगलियां को बोला। कुछ देर बाद गुड़िया के राक्षस वाले भी गुड़िया की सास और ननद भी थी। एसएसएस को अंदर भेजा गया। शर्माजी ने अपने भाई से कहा कि केवल तुम अपनी भाभी को ले आओ और धीरे-धीरे कपडे के लाइनकन को बोलो। थोड़ी देर बाद जब भाभी जी आई और वो भी अंदर गुड़िया के पास। गुड़िया की तबीयत खराब हो रही थी। कोई सुधार नहीं हो रहा। कुछ देर बाद डॉ ने हार मान ली और डॉ ने शर्माजी से माफ़ी मांग कर कहा कि अगर इसे कुछ समय पहले ले आओ तो शायद बच जाओ मगर अब तो कुछ नहीं बचा है। सबसे रोना लागे। मैं शर्माजी को दिलासा देते हुए घर ले गया। शर्माजी रास्ते भर यही कह रहे थे कि मेरा कसूर क्या है। जबकि मैं और मेरे जैसे लोग ये सोच रहे थे कि गुड़िया का क्या कसूर था जो अपनी पढ़ाई छुड़वाकर शादी की और घर की गृहस्थी की तरफ से खरीद रहे थे। शर्माजी जैसे लोगों को इतना बड़ा हादसा होने के बाद भी समझ नहीं आता। मैं तो यही हूं कि कसूर था उसका जो ये कदम उठाता था मजबूर गुड़िया। फिफ्थोडी बाद में जब भाभी जी आई और वो भी गुड़िया के पास। गुड़िया की तबीयत खराब हो रही थी। कोई सुधार नहीं हो रहा। कुछ देर बाद डॉ ने हार मान ली और डॉ ने शर्माजी से माफ़ी मांग कर कहा कि अगर इसे कुछ समय पहले ले आओ तो शायद बच जाओ मगर अब तो कुछ नहीं बचा है। सबसे रोना लागे। मैं शर्माजी को दिलासा देते हुए घर ले गया। शर्माजी रास्ते भर यही कह रहे थे कि मेरा कसूर क्या है। जबकि मैं और मेरे जैसे लोग ये सोच रहे थे कि गुड़िया का क्या कसूर था जो अपनी पढ़ाई छुड़वाकर शादी की और घर की गृहस्थी की तरफ से खरीद रहे थे। शर्माजी जैसे लोगों को इतना बड़ा हादसा होने के बाद भी समझ नहीं आता। मैं तो यही हूं कि कसूर था उसका जो ये कदम उठाता था मजबूर गुड़िया। फिफ्थोडी बाद में जब भाभी जी आई और वो भी गुड़िया के पास। गुड़िया की तबीयत खराब हो रही थी। कोई सुधार नहीं हो रहा। कुछ देर बाद डॉ. ने हार मान ली और डॉ.उन्होंने शर्माजी से माफ़ी मांग कर कहा कि अगर इसे कुछ समय पहले ले आओ तो शायद बच जाओशर्माजी और घर वाले थे। अंदर किसी को जाने की सिर्फ औरत ही जा थी। शर्माजी को अभी भी आदमी और औरत का पता नहीं चल रहा था। मेने उन्हें सनातन देते हुए कहा घर से किसी महिला को उंगलियां को बोला। कुछ देर बाद गुड़िया के राक्षस वाले भी गुड़िया की सास और ननद भी थी। एसएसएस को अंदर भेजा गया। शर्माजी ने अपने भाई से कहा कि केवल तुम अपनी भाभी को ले आओ और धीरे-धीरे कपडे के लाइनकन को बोलो। थोड़ी देर बाद जब भाभी जी आई और वो भी अंदर गुड़िया के पास। गुड़िया की तबीयत खराब हो रही थी। कोई सुधार नहीं हो रहा। कुछ देर बाद डॉ ने हार मान ली और डॉ ने शर्माजी से माफ़ी मांग कर कहा कि अगर इसे कुछ समय पहले ले आओ तो शायद बच जाओ मगर अब तो कुछ नहीं बचा है। सबसे रोना लागे। मैं शर्माजी को दिलासा देते हुए घर ले गया। शर्माजी रास्ते भर यही कह रहे थे कि मेरा कसूर क्या है। जबकि मैं और मेरे जैसे लोग ये सोच रहे थे कि गुड़िया का क्या कसूर था जो अपनी पढ़ाई छुड़वाकर शादी की और घर की गृहस्थी की तरफ से खरीद रहे थे। शर्माजी जैसे लोगों को इतना बड़ा हादसा होने के बाद भी समझ नहीं आता। मैं तो यही हूं कि कसूर था उसका जो ये कदम उठाता था मजबूर गुड़िया। फिफ्थोडी बाद में जब भाभी जी आई और वो भी गुड़िया के पास। गुड़िया की तबीयत खराब हो रही थी। कोई सुधार नहीं हो रहा। कुछ देर बाद डॉ ने हार मान ली और डॉ ने शर्माजी से माफ़ी मांग कर कहा कि अगर इसे कुछ समय पहले ले आओ तो शायद बच जाओ मगर अब तो कुछ नहीं बचा है। सबसे रोना लागे। मैं शर्माजी को दिलासा देते हुए घर ले गया। शर्माजी रास्ते भर यही कह रहे थे कि मेरा कसूर क्या है। जबकि मैं और मेरे जैसे लोग ये सोच रहे थे कि गुड़िया का क्या कसूर था जो अपनी पढ़ाई छुड़वाकर शादी की और घर की गृहस्थी की तरफ से खरीद रहे थे। शर्माजी जैसे लोगों को इतना बड़ा हादसा होने के बाद भी समझ नहीं आता। मैं तो यही हूं कि कसूर था उसका जो ये कदम उठाता था मजबूर गुड़िया। फिफ्थोडी बाद में जब भाभी जी आई और वो भी गुड़िया के पास। गुड़िया की तबीयत खराब हो रही थी। कोई सुधार नहीं हो रहा। कुछ देर बाद डॉ. ने हार मान ली और डॉ.उन्होंने शर्माजी से माफ़ी मांग कर कहा कि अगर इसे कुछ समय पहले ले आओ तो शायद बच जाओशर्माजी और घर वाले थे। अंदर किसी को जाने की सिर्फ औरत ही जा थी। शर्माजी को अभी भी आदमी और औरत का पता नहीं चल रहा था। मेने उन्हें सनातन देते हुए कहा घर से किसी महिला को उंगलियां को बोला। कुछ देर बाद गुड़िया के राक्षस वाले भी गुड़िया की सास और ननद भी थी। एसएसएस को अंदर भेजा गया। शर्माजी ने अपने भाई से कहा कि केवल तुम अपनी भाभी को ले आओ और धीरे-धीरे कपडे के लाइनकन को बोलो। थोड़ी देर बाद जब भाभी जी आई और वो भी अंदर गुड़िया के पास। गुड़िया की तबीयत खराब हो रही थी। कोई सुधार नहीं हो रहा। कुछ देर बाद डॉ ने हार मान ली और डॉ ने शर्माजी से माफ़ी मांग कर कहा कि अगर इसे कुछ समय पहले ले आओ तो शायद बच जाओ मगर अब तो कुछ नहीं बचा है। सबसे रोना लागे। मैं शर्माजी को दिलासा देते हुए घर ले गया। शर्माजी रास्ते भर यही कह रहे थे कि मेरा कसूर क्या है। जबकि मैं और मेरे जैसे लोग ये सोच रहे थे कि गुड़िया का क्या कसूर था जो अपनी पढ़ाई छुड़वाकर शादी की और घर की गृहस्थी की तरफ से खरीद रहे थे। शर्माजी जैसे लोगों को इतना बड़ा हादसा होने के बाद भी समझ नहीं आता। मैं तो यही हूं कि कसूर था उसका जो ये कदम उठाता था मजबूर गुड़िया। फिफ्थोडी बाद में जब भाभी जी आई और वो भी गुड़िया के पास। गुड़िया की तबीयत खराब हो रही थी। कोई सुधार नहीं हो रहा। कुछ देर बाद डॉ ने हार मान ली और डॉ ने शर्माजी से माफ़ी मांग कर कहा कि अगर इसे कुछ समय पहले ले आओ तो शायद बच जाओ मगर अब तो कुछ नहीं बचा है। सबसे रोना लागे। मैं शर्माजी को दिलासा देते हुए घर ले गया। शर्माजी रास्ते भर यही कह रहे थे कि मेरा कसूर क्या है। जबकि मैं और मेरे जैसे लोग ये सोच रहे थे कि गुड़िया का क्या कसूर था जो अपनी पढ़ाई छुड़वाकर शादी की और घर की गृहस्थी की तरफ से खरीद रहे थे। शर्माजी जैसे लोगों को इतना बड़ा हादसा होने के बाद भी समझ नहीं आता। मैं तो यही हूं कि कसूर था उसका जो ये कदम उठाता था मजबूर गुड़िया। फिफ्थोडी बाद में जब भाभी जी आई और वो भी गुड़िया के पास। गुड़िया की तबीयत खराब हो रही थी। कोई सुधार नहीं हो रहा। कुछ देर बाद डॉ. ने हार मान ली और डॉ.उन्होंने शर्माजी से माफ़ी माँग कर कहा कि अगर इसे कुछ समय पहले ले आओ तो शायद बच जाओ शर्माजी से माफ़ी माँग कर कहा कि अगर इसे कुछ समय पहले ले आओ तो शायद बच जाओ शर्माजी से माफ़ी माँग कर कहा कि अगर इसे कुछ समय पहले ले आओ तो शायद बच जाओ शर्माजी से माफ़ी माँग कर कहा। आओ तो शायद बच जाओ शर्माजी से माफ़ी मांग कर कहा कि अगर इसे कुछ समय पहले ले आओ तो शायद बच जाओ शर्माजी से माफ़ी मांग कर कहा कि अगर इसे कुछ समय पहले ले आओ तो शायद बच जाओ शर्माजी से माफ़ी मांग कर कहा। कुछ समय पहले ले आओ तो शायद बच जाओ शर्माजी से माफ़ी डिज़ायन कर कहा कि अगर कुछ समय पहले ले आओ तो शायद बच जाओ शर्माजी से माफ़ी डिज़ायन कर कहा। आओ तो शायद बच जाओ शर्माजी से माफ़ी मांग कर कहा कि अगर इसे कुछ समय पहले ले आओ तो शायद बच जाओ शर्माजी से माफ़ी मांग कर कहा कि अगर इसे कुछ समय पहले ले आओ तो शायद बच जाओ शर्माजी से माफ़ी मांग कर कहा। कुछ समय पहले ले आओ तो शायद बच जाओ शर्माजी से माफ़ी डिज़ायन कर कहा कि अगर कुछ समय पहले ले आओ तो शायद बच जाओ शर्माजी से माफ़ी डिज़ायन कर कहा। आओ तो शायद बच जाओ शर्माजी से माफ़ी मांग कर कहा कि अगर इसे कुछ समय पहले ले आओ तो शायद बच जाओ शर्माजी से माफ़ी मांग कर कहा कि अगर इसे कुछ समय पहले ले आओ तो शायद बच जाओ शर्माजी से माफ़ी मांग कर कहा। कुछ समय पहले ले आओ तो शायद बच जाओ शर्माजी से माफ़ी माँजी कर ने कहा कि अगर इसे कुछ समय पहले ले आओ तो शायद बच जाओ शर्मा जी से माफ़ी मांग कर कहा। आओ तो शायद बच जाओ शर्माजी से माफ़ी मांग कर कहा कि अगर इसे कुछ समय पहले ले आओ तो शायद बच जाओ शर्माजी से माफ़ी मांग कर कहा कि अगर इसे कुछ समय पहले ले आओ तो शायद बच जाओ शर्माजी से माफ़ी मांग कर कहा। कुछ समय पहले ले आओ तो शायद बच जाओ शर्माजी से माफ़ी डिज़ायन कर कहा कि अगर कुछ समय पहले ले आओ तो शायद बच जाओ शर्माजी से माफ़ी डिज़ायन कर कहा। आओ तो शायद बच जाओ शर्माजी से माफ़ी मांग कर कहा कि अब बस भगवान से प्रार्थना करो कि कोई चमत्कार हो जाए
, सब उदास हो...लगा जिसे समय मिल जाए। भाभी ने अपने पति की और देख कर आँखों से बहुत कुछ कहा। शर्मा जी भी अपनी उदास आँखों को ढूंढते रहे सिर्फ एक दूसरे को देखते रहे। अब क्या करें।उनकी लड़की की जिंदगी और मौत बीच में है। उनके समय अस्पताल के निरीक्षण के लिए बुजुर्ग डॉक्टर भी थे, जिनमें ज्यादातर महिला डॉक्टर और कर्मचारी भी थे। जब गुड़िया की जांच हुई तो थोड़ी उम्मीद जगी और बाकी सभी वकीलों ने गुड़िया के बच्चे को ले लिया। जब शर्मा हॉस्पिटल के डॉक्टर को धन्यवाद कह रहे थे तो डॉक्टर बोला ये सब ऊपर वाले और हमारे सीनियर डॉक्टर का कमाल है। शर्माजी दौड़े और जब किसी महिला डॉक्टर को देखा और माफ़ी मांगी तो हमारे सीनियर डॉक्टर ने शर्मा को सबसे पहले यही कहा कि मैं भी महिला हूं और मेरा स्टाफ भी महिला है.. आगे कुछ बोलू उससे पहले आप शायद जेल चले जाएं। इसलिए आप अपनी लड़की को स्वस्थ करवाकर ही यहां से लेकर जाएंगे उसके बाद आप कार्रवाई करेंगे। राम लेकिन डूब गये थे. सभी चुप चाप सुन रहे थे. मैं मन में सोच रहा था कि कपूर किसका है लड़की का या शर्मा जी जैसी सोच