Thursday, 26 May 2016

महकती हवाएं

महकती हवाएं 
कुछ दिन पहले की बात हैं
यही कुछ खास बात हैं
वो गुजरे हमारे दर के पास से
महकने लगी हवाएं उनके आने से
तपती धुप में एक ठंडी हवा से
खुशनुमा हो गया उनके आँचल से
देर तक हमारी निगाहें देख रही
दूर किनारे तक खुशबु  छोड़ रही
जब तक वो ओझल नहीं हो रही
सोच रहे हम एक हवा को
खींच रही हवा हम को
उड़ रहे हम देख उसके आँचल को
पता नहीं वो कौन थी
एक हसीन याद थी
या एक महकती हवा थी
आज भी उस खुशबु को
खोज रहे उस आँचल को
मन में उमंग किसी के आने को
कब आएगी वो महक हवाएं में
कब उड़ेगा आँचल हवाओं में
कब होगी मुलाकात  निगाहो में



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