अधभु 01
हिमाचल प्रदेश की पहाड़ियों के बिच एक छोटा सा गॉव हिंग्ला। थोड़े से परिवार ही रहते हैं। खेती वाड़ी करके अपनी ज़िन्दगी आराम से बिता रहे हैं। जिमरम और उसकी पत्नी नकनि दोनों दिन रात मेहनत करते रहते हैं। कोई औलाद नहीं हैं मगर इसका कोई दुःख नहीं हैं। अपने जानवरों को अपनी औलाद से ज्यादा प्यार देते हैं और उन्हें सब सुविधा देते हैं। गॉव में सात आठ मकान की हैं जो आराम से खेती करते हैं बाकी के लोग उन्हें यहाँ काम करके जीवन चलाते हैं। जिमरम अपने यहाँ गॉव के लोगो को मज़दूरी पर रखता हैं और उनके परिवार की भी सहायता करता हैं। एक दिन बरसात के मौसम में मूसलाधार बारिश हुयी। चारो तरफ से पनि गिरने लगा। आसमान के साथ साथ पहाड़ों का भी पानी खेतों में आने लगा। पहाड़ों से पत्थरों के साथ ना जाने क्या क्या आता था। सभी गॉव वाले इस कारण से परेशान रहते थे। जिमरम का मकान गॉव के किनारे था। सबसे ज्यादा उसी को नुकशान होता था। आज पुरे दिन बारिश के साथ बिजलियाँ भी गरज रही थी। दिन तो जैसे तैसे निकल गया मगर रात को अपने जानवरों के साथ जिमरम पत्नी को लेकर बहुत चिंतित था। पहाड़ों का पनि और उनके साथ बड़े बड़े पत्थर और पेड़ सभी बह कर गॉव में आते थे। जिमरम ने थोड़ी उचाई पर सभी जानवरों और बीबी को ले गया। अचानक जोर की आवाज़ के साथ बिजलियाँ कड़की। सारे जानवर चिल्लाने लगे। जिमरम को गॉव के लोगो की चिंता सताने लगी। काफी लोग पहाड़ों के ऊपर आ गए। मगर कुछ परिवार निचे ही फंस गए। बिजलियाँ इतनी तेज़ चमकी की कुछ समय के लिए सभी को दिखना बंद हो गया। जिमरम को अपने जानवरों को सम्भालना बहुत मुश्किल हो रहा था। मगर जानवर काफी समझदार थे इसलिए वो बार बार भड़के के बाद भी जिमरम की आवाज़ सुन कर चुप हो जाते थे। पूरी रात ऐसे ही निकली। बरसात बंद हो चुकी थी मगर पहाड़ों का गन्दा पानी और पत्थर अभी भी रुक रुक कर आ रहे थे। पूरा गॉव पानी से लबालब हो गया। सभी को पता हैं की थोड़ी देर बाद ये पानी निचे गॉवो और निदियों में चला जायेगा इसलिए पानी उतरने का इंतज़ार करने लगे। जब पनि पूरा उतर गया तब जिमरम अपने घर की तरफ बढ़ने लगा। सारे जानवरों को उनके बाड़े में भेजने लगा। बड़े बड़े पत्थरों को और कीचड़ को बड़ी मुश्किलों से हटाना पड़ा। जानवरों के बाड़े में एक बड़ा सा पत्थर ऐसे रुका पड़ा था मानो किसी ने उसे उठकर रखा हो क्योंकि अगर वो तेज़ गति से आया हैं तो मकान को तोड़ कर रुकता और धीरे धीरे भी आया तो पास पड़े जानवरों के चबूतरे पर नहीं चढ़ता। वो ये सब देख ही रहा था की किसी के रोने की आवाज़ आई। आवाज़ वही से आ रही थी। रो भी कोई बच्चा रहा था। जब उस पत्थर के पास गया थो देखा एक बहुत ही प्यारा सा बच्चा ज़मीन पर पड़ा हुआ था और उसका हाथ उस बड़े से पत्थर के नीच आया हुआ लग रहा था। जिमरम ने दौड़ कर उस बच्चे को निकलने का प्रयास किया मगर जैसे ही बच्चे ने हाथ हिलाया , पत्थर के निचे से हाथ बाहर आ गया। जिमरम ने ये ध्यान नहीं दिया मगर बच्चा सही सलामत आ गया यही बड़ी बात हैं। बच्चा गोदी में आते ही चुप हो गया। उसने अपनी पत्नी को आवाज़ लगायी। इतनी तेज़ आवाज़ आज से पहले कभी भी नहीं लगाई इसलिए उसकी नकनि दौड़ कर आ गयी। जब पास आकर देखा तो जिमरम हाथ में एक हस्ठ पुस्ठ बच्चा लिकर खड़ा था। नकनि ने जब पूछा की कौन हैं तो वो बोला यहाँ इस पत्थर के निचे दबा हुआ था और जैसे ही उठाया पत्थर के निचे से आराम से हाथ बाहर आ गया। किसका हैं ये तो पता नहीं मगर आया अभी अभी ही हैं क्योंकि कही से भी गन्दा या चोट का निशान नहीं हैं लगता हैं कोई अभी अभी छोड़ गया हैं। दोनों उस बच्चे को लेकर गॉव में पूछने निकल पड़े मगर कोई भी इतना छोटा बच्चा गॉव में नहीं था इसलिए सभी इक्कठे हो कर उसके माता पिता को ढूंढने लगे। सभी सोच रहे थे की अगर ये पानी के साथ बह कर आया तो इसके शरीर पर खरोंचे या चोटे होती मगर ये तो एकदम से तंदुरस्त हैं साथ ही गोरा चिटा भी हैं। गॉव वालों ने जब तब इसके माता पिता मिल नहीं जाते जिमरम को अपने पास रखने को कहा। जिम्राम भी उसे अपने पास रखने को राज़ी हो गया मगर जब नकनि को गुस्से में देखा तो मन में सोचने लगाकी अब क्या करे। तभी बच्चा जोर जोर से रोने लगा। दोनों पति पत्नी अपने घर आ गए। बच्चा अभी भी जिमरम के पास ही था और रो रहा था। नकनि को अच्छा नहीं लग रहा था क्योंकि ये पराया हैं अगर मन लग गया और फिर कोई लेने आ गया तो जिमरम सहन नहीं कर पाएगा इसलिए वो इसे रखना नहीं चाहती थी। जब बच्चा ज्यादा रोने लगा तो नकनि उसे जिमरम से छीन कर अंदर चली गयी। बच्चा चुप हो गया। जिमरम ने गायों का ताज़ा दूध निकाल कर उस बच्चे के लिए लाया। नकनि ने थोड़ा दूध गयम करके बच्चे को पिलाया तो वो सारा दूध एक साँस में पि गया। दोनों पति पत्नी सोचने लगे की शायद रात से भूखा हैं इसलिए वो सारा दूध पी गया। उस छोटे से बच्चे को घुटने के बल चलना आता था क्योंकि नकनि ने आँगन में लेटाया तो वो घुटने बल चल कर उसके पास आ गया और गोदी में सो गया। नकनि को उसपर बहुत प्यार आ रहा था। गॉव वाले पहाड़ से आया और शरीर भी मज़बूत लगा तो उसका नाम अधभु यानि की अद्धभूत ही रख दिया।अधभु जब चार पांच साल को हुआ तब तो शरीर से दस का लगता था। जिमरम के खेत में हो ज्यादा से काम करता था। सभी उसकी लगन और मेहनत देख अच्च्मभे में पद जाते थे। विशाल भीमकाय शरीर के साथ फुर्ती और तेज़ दिमाग। स्कूल न गया मगर सभी तरह का ज्ञान उसे था। एक दिन फिर तेज़ बरसात आई पहाड़ों से पनि के साथ बड़े बड़े पत्थर भी आये। हमेशा की तरह उचे स्थान पर जिमरम और उसका परिवार जानवरों के साथ आ गया। घोड़े के एक बच्चे ने अपनी जगह नहीं छोड़ी। सभी उसके लिए परेशान थे। अधभु ने एक झटके में उस घोड़े के बच्चे को धक्का दिया की वो १० फ़ीट जाकर सम्भाला। फिर उसने उस घोड़े के पकड़ कर ताकत से उस उच्च्ई पर ले आया जिससे पानी और पहाड़ों से आने वाले पत्थर उसका कोई नुक्सान ना पहुंचा सके। जिमरम ने ये सब देखा तो आँखे फटी की फटी रह गयी। वो कुछ नहीं बोल सका। उसने अधभु के इस शक्ति को पहली बार देखा। तब उसे पुराणी बातें याद आई की बहुत बार ये छोटी मोटी चीजे यु ही उठा कर आसानी से इधर उधर रखता हैं। इसमें जरूर कोई सकती हैं जो ये करवाती हैं। ऐसा कोई काम नहीं था जो अधभु नहीं कर सकता था। जिमरम बेहोश हो कर गिर पड़ा। अधभु ने उसे उठकर एकतरफ सुला दिया और एक पोधे के पत्तो को तोड़ कर जिमरम को सुंघाया तो जिमरम एकदम खड्डा हो गया। जिमरम और नकनि एक शक्ति से डरने लगे। उन्होंने ये गॉव छोड़ने का फैसला किया।
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