Thursday, 31 March 2016

समय का उदय । 2

समय का उदय  । 2
अमरलाल जी ने भी अपने बेटे जय की बात को मान लिया और अपने काम में व्यस्त हो गए।
काफी दिनों के बाद एक दिन स्कूल में उदय ने अपनी अध्यापिका को कहा कि मेडम जी
 भुकम्भ आया  और वो  सामने वाली दीवार गिरी  और उसके पास जो कुत्ता बैठा है वह मर गया
और हम सभी ने उसको बहार दफना दिया।  अध्यापिका ने उदय को डांट लगायी और अनाप सनाप
बोलने पर क्लास से बहार निकालने का कह कर बैठा दिया।  उदय घर आकर अपने दादाजी को ये बात बताई।
उन्होंने भी उसको ऐसा गन्दा न बोलने का कह कर आपने काम करने लगे।  दूसरे दिन सभी विध्यार्थी जब प्रार्थना करके मैदान में खड़े थे की अचानक स्कूल के सामने की दीवार गिर पड़ी।  प्रध्यापकजी ने सभी बच्चों को मैदान में खड़े रखा और बोले जब तक में न बोलू सभी खड़े रहेंगे यही पर चाहे तो यही बैठ भी सकते हे। पता करने पर पता चला की हल्का सा भुकम्भ  आया था जिसके कारन सामने की दीवार गिर पड़ी।  परिजनो को जब पता चला तो वो अपने बच्चों को लेने को स्कूल पहुंच गए।  उदय को उसके पापा लेने आये।  उन्होंने देखा की एक कुत्ता उस दिवार के निचे दब कर मर गया हे तो उन्होंने प्रदयपक महोदय से निवेदन कर उसको पास में एक गढ़े में दफना ने को कहा।  थोड़ी देर बाद कुत्ते को दफना दिया गया।  तभी अध्यापिका जी ने उदय को और उसके पापा को ऑफिस में बुलाया की आप मिल कर जाये।  अध्यापिका जी ने उदय को कल की बात बताई।  उदय  के पापा सकते में आ गए।  उन्हें पुरानी  बात भी याद आ गयी।  वो उदय को लेकर घर पहुंचे।  उन्होंने उदय द्वारा कही बातें याद करने लगे।  अपने पिता जी को भी बताया।  अमरलाल जी ने इसको भगवान्  का आशीर्वाद कह कर उदय का पूरा ध्यान रखने को कहा।  जय को थोड़ा लालच आ गया।  उन्होंने अपने पिता को बातों  में उलझा कर उदय की बातों को अनसुना कह कर ध्यान न देने को कहा।  अब जय हरदम उदय को खुश रखने का सोच कर और ज्यादा से ज्यादा अपने साथ रखने का सोचने लगे।  उदय भी सोच में पड गया कि पापा एकदम कैसे बदल गए।  क्योंकि वो अपने पापा से साथ तो रहना चाहता था मगर जय  काम में व्यस्त रहने को कह कर दादा जी के पास भेज देते थे।  दूसरे दिन उदय स्कूल जाने लगा तो जय ने कहा की में छोड़ दूंगा।  रास्ते में जय उसको बोले की कुछ भी बात कहनी  हो तो वो केवल उसको यानि अपने पापा को ही बताये।
उदय बोला  की कौनसी  बात।  क्योंकि उसको खुदको पता नहीं की कब क्या बोला।  जय ने कहा की कुछ भी।
अब जय उसके क्लास के दोस्तों और अध्यापिका को कहा की यदि कोई उटपटांग  बात बोले तो उन्हें जरूर बताये। स्कूल से लौटते वक्त उदय को जय ही लेकर आया। अपने साथ खिलाया पिलाया और कहा की उसके पास ही सो जाये मगर वो दादाजी के पास ही सोया।  दूसरे दिन जब सभी नास्ता कर रहे थे तो उदय बोला की पापा आपने आपके दोस्त से जब पैसे  लिए तब वो आपको हाथ जोड़ कर आपको धन्यवाद क्यों दे रहे थे।
जय एकदम चौके और बोले कि   कुछ नहीं ऐसे ही।  नास्ते के बाद जय ने उदय को कमरे में ले जाकर कहा की कौनसा  दोस्त हे और क्या बात थी।  उदय ने कहा की मुझे क्या पता।  चलो कोई बात नहीं स्कूल चलते हे कहकर जय ने उसको स्कूल के लिए तैयार होने को कहा. उदय को स्कूल न ले जाकर जय पार्क में खेलने को ले गए।  पुरे दिन व्यतीत करने के बाद जब दोनों घर आये तो उदय थक चुका था सो जल्दी खाना खा कर सो गया
आधी रात को उदय दादाजी को जगा कर बोलै की उसको बाथरूम में जाना हे।  जय का ध्यान उदय की तरफ होने के कारण उंगते हुए कमरे से बाहर आया और उदय को जागते देख कर बोलै क्या हुआ नींद नहीं आ रही। अपने  दादाजी को तांग नहीं करते हे। कहकर अपने साथ अपने कमरे में ले गए।  उदय सोते हुए कुछ नाम बोल रहा था।  जय को यही सुनना था।
पार्ट३


 


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