अमरलाल जी का पोता उदय अब करीब आठ साल का हो गया हैं ! नवंबर का महीना हे इसलिए अमरलाल जी उदय को कमरे में खिला रहे थे कि उदय बोला ...दादाजी ये पवन की दादी का देहांत हुआ तब तेज़ बारिश आई थी ना।
अमरलाल जी काफी अचम्भे में पड़ गए कि पवन की दादी तो ज़िन्दा है जो कि अमरलाल जी की रिस्ते में भाभी लगाती है । उन्होंने उदय का काफी डांट लगायी।
वो सोच में पड़ गए कि बच्चे ने ऐसा क्यों बोला । फिर मन ही मन में आपने आप को समझाते हुए सोचने लगे की यह तो बच्चा है ऐसे ही बोल गया।
रात को सभी खांना खाने बैठे तो उदय फिर वही बोला की पवन की दादी की मर गयी थी तब तेज़ बारिश हुयी थी क्या ?
अब अमरलाल जी को गुस्सा आ गया कि ये सुबह से क्या अनाप सनाप बक रहा है। उन्होंने उदय को लताड़ लगायी ? और उसकी माँ को भी बोला की इसको थोड़ा समझाए क्युकी ये आज तो अपने घर में एससी बात बोल रहा हे ये ही अगर बहार बोलै तो घरों में झगड़े होने शुरू हो जायेंगे। पवन , उदय का दूर के रिस्ते में भाई लगता हे। दूसरे दिन अमरलाल जी नास्ता करके अखबार पढ़ रहे थे कि फोन की घंटी बजी। फोन उठाकर हेलो बोला।
दूसरी तरफ से उन्ही का भतीजा श्याम लाल बोल रहा था। उसने बताया की श्यामलाल की माताजी को अस्पताल में भर्ती करवाया है ,हालात ठीक नहीं है। अमरलाल जी बोले कि घबरा नहीं हम लोग अस्पताल पहुंच
रहे है। अपने बेटे जय लेकर अस्पताल की और चल पड़े। सर्दी का मौसम होने के कारण उन्होंने शाल टोपी पहन कर ही निकले। पुरे दिन अस्पताल में रहने के बाद रात को घर आये तब तक उनकी भाभी की तबियत ठीक नहीं हुयी। उनका मन घर आने का नहीं था मगर उनके बेटे जय ने ज़िद करके उनके रिक्शे से घर भेज दिया।
घर आते ही उदय की माँ ने पूछा की बड़ी माँ की तबियत कैसी है। अमरलाल जी बोले की अभी कंट्रोल में है।
उदय सो चुका था , अमरलाल जी उसके पास जाकर रजाई ओड कर सोने की कोशिश कर रहे थे।
सुबह के करीब चार बजे फोन आया। जय ने बताया की बड़ी माँ का देहांत को गया हे। थोड़ी देर बाद हम सभी
बड़ी माँ को लेकर पुराने घर पहुंच रहे हे आप लोग करीब आठ बजे तक आ जाना।
अमरलाल जी साथ बजे तक तैयार हो गए और घर के सभी सदस्य भी तैयार हो रहे थे। सर्दी का मौसम था मगर धुप धीरे धीरे निकल रही थी। आठ बजे तक अच्छी दुप हो गयी। सभी रिस्तेदार पुराने मकान में पहुंचनेलगे
दस बजे करीब सभी आने के बाद शवयात्रा सुरु हुयी तब तक मौसम साफ और अच्छी धुप थी। थोड़ी ही देर में
तेज हवा के साथ काले काले बादल छागए। सभी तेज चलने लगे मगर तब तक तेज बारिश शुरू हो चुकी थी।
शव को प्लास्टिक का कवर लगाया गया। तभी अमरलाल जी को उदय की बात याद आई। मगर अभी उन्हें किसी तरह समशान घाट पहुंचना था। दाहसंस्कार करके सभी तेज बारिश में आपने आपने घर पहुंचे।
अमरलाल जी भी तक गए सो घर आकर सो गए मगर दिमाग में उदय की बात वापस आने के कारण नींद नहीं आ रही थी। दूसरे दिन अमरलाल जी ने जय से इसके बारे में कहा। जय ने कहा की हो सकता हे बच्चे के मुंह से
इससे ही निकल गया हो। .......2
अमरलाल जी काफी अचम्भे में पड़ गए कि पवन की दादी तो ज़िन्दा है जो कि अमरलाल जी की रिस्ते में भाभी लगाती है । उन्होंने उदय का काफी डांट लगायी।
वो सोच में पड़ गए कि बच्चे ने ऐसा क्यों बोला । फिर मन ही मन में आपने आप को समझाते हुए सोचने लगे की यह तो बच्चा है ऐसे ही बोल गया।
रात को सभी खांना खाने बैठे तो उदय फिर वही बोला की पवन की दादी की मर गयी थी तब तेज़ बारिश हुयी थी क्या ?
अब अमरलाल जी को गुस्सा आ गया कि ये सुबह से क्या अनाप सनाप बक रहा है। उन्होंने उदय को लताड़ लगायी ? और उसकी माँ को भी बोला की इसको थोड़ा समझाए क्युकी ये आज तो अपने घर में एससी बात बोल रहा हे ये ही अगर बहार बोलै तो घरों में झगड़े होने शुरू हो जायेंगे। पवन , उदय का दूर के रिस्ते में भाई लगता हे। दूसरे दिन अमरलाल जी नास्ता करके अखबार पढ़ रहे थे कि फोन की घंटी बजी। फोन उठाकर हेलो बोला।
दूसरी तरफ से उन्ही का भतीजा श्याम लाल बोल रहा था। उसने बताया की श्यामलाल की माताजी को अस्पताल में भर्ती करवाया है ,हालात ठीक नहीं है। अमरलाल जी बोले कि घबरा नहीं हम लोग अस्पताल पहुंच
रहे है। अपने बेटे जय लेकर अस्पताल की और चल पड़े। सर्दी का मौसम होने के कारण उन्होंने शाल टोपी पहन कर ही निकले। पुरे दिन अस्पताल में रहने के बाद रात को घर आये तब तक उनकी भाभी की तबियत ठीक नहीं हुयी। उनका मन घर आने का नहीं था मगर उनके बेटे जय ने ज़िद करके उनके रिक्शे से घर भेज दिया।
घर आते ही उदय की माँ ने पूछा की बड़ी माँ की तबियत कैसी है। अमरलाल जी बोले की अभी कंट्रोल में है।
उदय सो चुका था , अमरलाल जी उसके पास जाकर रजाई ओड कर सोने की कोशिश कर रहे थे।
सुबह के करीब चार बजे फोन आया। जय ने बताया की बड़ी माँ का देहांत को गया हे। थोड़ी देर बाद हम सभी
बड़ी माँ को लेकर पुराने घर पहुंच रहे हे आप लोग करीब आठ बजे तक आ जाना।
अमरलाल जी साथ बजे तक तैयार हो गए और घर के सभी सदस्य भी तैयार हो रहे थे। सर्दी का मौसम था मगर धुप धीरे धीरे निकल रही थी। आठ बजे तक अच्छी दुप हो गयी। सभी रिस्तेदार पुराने मकान में पहुंचनेलगे
दस बजे करीब सभी आने के बाद शवयात्रा सुरु हुयी तब तक मौसम साफ और अच्छी धुप थी। थोड़ी ही देर में
तेज हवा के साथ काले काले बादल छागए। सभी तेज चलने लगे मगर तब तक तेज बारिश शुरू हो चुकी थी।
शव को प्लास्टिक का कवर लगाया गया। तभी अमरलाल जी को उदय की बात याद आई। मगर अभी उन्हें किसी तरह समशान घाट पहुंचना था। दाहसंस्कार करके सभी तेज बारिश में आपने आपने घर पहुंचे।
अमरलाल जी भी तक गए सो घर आकर सो गए मगर दिमाग में उदय की बात वापस आने के कारण नींद नहीं आ रही थी। दूसरे दिन अमरलाल जी ने जय से इसके बारे में कहा। जय ने कहा की हो सकता हे बच्चे के मुंह से
इससे ही निकल गया हो। .......2
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