Thursday, 21 April 2016

वेलकम महात्माजी 2

वेलकम महात्माजी २ 
सुबह से भीड़ हो रही हैं।  उदय भाई यानि उदय बाबा आज मौन तोड़ेंगे। पुरुषों और महिलाओं की अलग अलग
बैठने की व्यवस्था हैं , इसलिए औरतों की बहुत अधिक भीड़ हो रही थी और सभी अपनी अपनी समस्या को पहले पूछने को आतुर हो रहे थे।  उदय भाई का ख़ास आदमी पप्पू छोटा गेट पर लोगो को पास दे रहा था साथ में चार्ज भी कर रहा था।  मजनू ने  आश्रम में कैमरे लगा रखे थे।  डॉ घुंघरू भी किसी पेसेंट के कारण वहां आये हुए थे।  अपनी पेसेंट के कारण वो भी बाबाजी के आश्रम पहुंच गए मगर जब पप्पू छोटाको  घुंघरू ने देखो तो वो  छिपने लगा।  डॉक्टर उसको पहचान गए।  मगर चुप रहे।  घुंघरू अपने मरीज़ के साथ आये थे।  मरीज़ भी एक बड़ा बिजनेसमैन था इसलिए उसने सबसे आगे की सीट बुक करवाई थी।  उनका नाम चतुर्वेदी जी  था।  चतुर्वेदीजी  अपने पुरे परिवार के साथ आये थे उनकी अपनी पुत्री जो की करीब ३५ साल की हो गयी मगर शादी नहीं हुयी थी ।  उससे करता  भी कौन क्योकि वो वहां की इंस्पेक्टर थी और साथ में  गुस्सा से भरपूर और दुनिया भर के नखरे। मगर थी सुन्दर।  कैमरे में मजनू ने जैसे ही देखा वो पागल सा स्टेज पर खड़ा हो गया।  मगर साथ में घुंघरू और उसकी पत्नी को देख कर थोड़ा पीछे हो गया।  अब उसकी नज़र सिर्फ उस इंस्पेक्टर पारुल पर थी।  अपने कैमरा मैन  को बता दिया की इसी की फोटो लेनी हे बार बार।  वो भी मजनू भाई का आदमी था।
उदय भाई ने जब आसान ग्रहण किया तो एक बार उछल पड़े क्योकि सबसे आगे घुंघरू बैठे थे।उदय भाई ने मजनू की तरफ देखा और इशारा किया।  मजनू भाई ने भी बताया की उसको पता हैं।
धीरे धीरे सभी पूछते गए और उदय बाबा उल्टा सीधा बताते गए।  जय जयकार के बीच  में कोई कुछ नहीं बोल पा रहा था।  जब चतुर्वेदीजी  की बारी आई तो मजनू भाई ने उदय भाई को इशारा करके बोल की इसको अकेले में मिलने को कहो।  तभी घुंघरू से दूर रहेंगे।  उदय बाबा ने चतुर्वेदीजी  को अपनी कुटिया में मिलने को बोल और सभी समस्या को वही दूर  करने को बोला।  मजनू भाई ने घुंघरू की वजह से नहीं बल्कि पारुल से मिलने के लिए ऐसा बोला।  सभी को आशीर्वाद देते हुए बाबाजी अपनी कुटिया में चल पड़े।  तब तक उदय भाई की  नज़र पारुल पर नहीं पड़ी।  थोड़ी देर बाद जब चतुर्वेदी जी अपने पुरे परिवार और घुंघरू के साथ कुटिया की तरफ जाने लगे तो मजनू ने उन्हें अपने आदमी से सभी को रुकवा दिया।  केवल चतुर्वेदीजी  और उनकी बेटी पारुल ही जा सकते हे एसा  मजनू ने कहलवाया।  दोनों बाप बेटी जब अंदर गए तो बाबाजी के साथ मजनू भाई भी वही बैठे थे। उनके आने की आहट से उदय भाई आँखे बंद कर बैठ गए।  चतुर्वेदी जी ने कहा की   ... बाबाजी आप बहुत ही पहुंचे हुए महात्मा हैं।  सभी आपकी तारीफ भी करते हैं।  कृपया करके मेरी एक समस्या का निवारण कीजिये।
आपको जो चाहे और जितना चाहे पैसा मिल जायेगा।  बाबाजी बोले  ... समस्या क्या हे ये मुझे मत बताओ मगर जिस समस्या के कारण तुम परेशान हो वो अभी तुम्हारे साथ हैं।  ये समस्या बहुत बड़ी हो गयी हैं।
बाबा ने तो केवल युही बोल दिया क्योकि हर व्यक्ति की समस्या कुछ न कुछ होती हैं और ज्यादा पुरानी या बड़ी हो जाये तभी वो साधु बाबाओं के चक्कर लगाते हैं।  ये बात उदय बाबाजी को पहले से पता थी इसलिए वो आँखे बंद करके बोल रहे थे।  चतुर्वेदीजी सीधे बाबाजी के पैरों में गिर पड़े।  उधर मजनू भाई पारुल को दाना डाल रहे थे। और पारुल क्योकि पुलिस में थी इसलिए वो मजे लेते हुए सोच रही थी की लगता हैं ये सभी  ठोंगी हे इसलिए ये जैसा बोलेंगे वही करते हुए इनको पकड़ना पड़ेगा।  वो भी मजनू से शरमाते हुए तिरछी नज़रो से देखने लगी।
जब चतुर्वेदीजी पेरो में गिरे तो बाबाजी की आँखें खुल गयी और सीधी पारुल पर गयी।  उदय भाई के मन में आया की साला बाबा क्यों बना।  ये समस्या हे या इसकी समस्या हे।  उदय भाई ने उसको पूछा की तुम समस्या हो।  पारुल ने गर्दन हिला  दी।  चतुर्वेदीजी बोले। ..... महाराज आप ज्ञानी हैं। .....ये  मेरी एकलौती बेटी हैं।  और इसकी शादी नहीं हुयी हैंऔर कोई इससे शादी करने को राज़ी नहीं हैं।  कैसा ही  लड़का चलेगा मगर कोई तो तैयार हो क्योकि सभी इसके गुस्से से डर भाग जाते हे ।  उदय भाई की हालत ख़राब हो गयी।  साला आज जब
 मिठाई सामने पड़ी हैं और में यहाँ बाबा बना बैठा हु।  क्योकि हमारे गुस्से के आगे अच्छे अच्छे ठीक हो गए जबकि ये तो बहुत ही खूबसूरत गुस्से वाली हैं।  थोड़ा सा सहन कर लेंगे। मन ही मन में सोचते हुए चतुर्वेदीजी को कल आकर प्रसाद और समस्या का हल ले जाने को बोल दिया।  चतुर्वेदी जी आशीर्वाद लेते हुए चल पड़े।  

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