वेलकम महात्माजी ३
उदय बाबा ने अपना साधु वाला भेष बना रखा हैं इसलिए उन्होंने सोचा की कल में चतुर्वेदी जी को मेरा यानि उदय शेट्टी का होटल का एड्रेस दे कर बताऊंगा की आपको यहाँ लड़का सही मिलेगा । मजनू भाई बोले ... भाई इसको कल काहे को बुलाया हैं। कोई खास बात।
उदय .. मजनू कल उनको मेरे खास भाई का नाम पता बता दूंगा और वो ही इसके लिए सही रहेगा। ... बस तू तैयार रह।
मजनू ... भाई आप तो बस हुकुम करना। बाकि का काम में कर दूंगा।
मजनू अपने बारे में और उदय अपने बारे में सोचने लगे।
दूसरे दिन चतुर्वेदी जी फिर अपनी बेटी को लेकर आये। उदय भाई ने पास में एक पांच सितारा होटल का पता दे दिया और कह दिया ये बालक मेरा चेला हैं और जो में कहूंगा वही ये करता हैं। इसलिए आज से आपकी सारी परेशनियां ख़त्म। चतुर्वेदीजी ख़ुशी से अच्छा खासा माल दे कर चल पड़े। उधर मजनू ने उदय भाई की बातों का ध्यान न देकर बस पारुल के ख्वाबों में खोया हुआ रहा।
अपनी बेटी को समझा बुझा कर होटल भेज दिया। उदय और मजनू भी होटल के लिए निकल पड़े। दोनों के रूम अलग अलग होने के कारन दोनों अलग अलग लिफ्ट में चले गए। पारुल ने उदय भाई से बात की कि आपके गुरूजी ने कहा की आप मुझे झेल लेंगे मतलब आप मुझे खुश रखेंगे। वैसे आप की उम्र क्या हैं।
उदय भाई .... वैसे तो गुरूजी ने अगर कहा हैं तो मुझे कोई प्रॉब्लम नहीं हैं क्योकि गुरूजी जो चाहते हैं वो मेरे लिए भगवान् का वरदान होता हैं और में वही करता हूँ। भगवान् का दिया सब कुछ हैं। धन दौलत .. इज्जत भी हैं। अगर हिंदुस्तान में कोई काम करू तो करोड़ों कमा सकता हूँ मगर मैं दुबई में हमारी होटल हैं । आप चाहे जैसा ही होगा शादी के बाद। दोनों ने अपने भविष्य की प्लानिंग करते हुए बातें करने लगे। पारुल ने जाने को कहा तो उदय भाई ने बहाना करके होटल में ही खुद को रोक लिया और कमरे से विदा कर दिया।
पारुल ने मजनू भाई को पहले देख लिया था इसलिए वो चुपके से उसके कमरे की तरफ चल पड़ी। मजनू
भी कमरे बहार टहल रहा था। नज़रें मिलते ही मजनू उछल पड़ा। जब मजनू ने भी दुबई में होटल का धंधा बताया तो पारुल का शक और बढ़ गया। कि कही न कही ये दोनों मिले हुए हैं और बाबाजी कोई नहीं उदय ही हैं। पारुल ने अपनी पहचान छुप रखी। उसने घुंघरू अंकल को बताया की दो नए आदमी आपके देश यानि की दुबई से आये हैं और इनका नाम उदय और मजनू हैं। घुंघरू को पहले से शक था की वो कोई बाबा वबा नहीं हैं इन दोनों की कारस्तानी हैं। चतुर्वेदी जी को जब पता चला तो वो भी काफी गुस्सा हुए। मगर पारुल ने दोनों को चुप करवा कर एक प्लान बनाया की इन दोनों को कैसे सबक भी सिखाए और जैल भी भेजे। घुंघरू पहले से परेशान था इनदोनो से इसलिए वो सबसे पहले तैयार हुआ।
पारुल ने दोनों को अलग अलग मिल कर अपने प्यार का नशा चढ़ा रही थी। उदय भाई और मजनू चुपके से
पारुल से मिल रहे थे गाना भी ग रहे थे मगर एकदूसरे को बताये बगैर। मगर दोनों गुरु चले से ज्यादा दोस्त थे और दोस्त से ज्यादा भाई भी थे। एक दिन उदय भाई ने पारुल के बारे में बताया मगर नाम नहीं वैसे ही मजनू ने भी पूरा किस्सा कह दिया। अब दोनों खुश हुए की भारत आकर उन्होंने गलती नहीं की और खास कर बाबाजी बन कर।
मगर दोनों की ख़ुशी ज्यादा दिन नहीं रही। क्युकी पारुल ने पुलिस गस्त लगायी तो लोगो को लगा की बहुत ही ज्ञानी महात्मा आये हैं इसलिए भीड़ ज्यादा रहने लगी। चतुर्वेदी जी और घुंघरू भी ज्यादा आश्रम में ही रहने लगे। दोनों को पारुल से मिलने का मौका नहीं मिलता था और पारुल भी यही चाहती थी। एक दिन दोनों चुपके से प्लान बना कर जब पारुल से मिलने गए तो एकदूसरे आमने सामने देख कर लड़ने लगे। पारुल ने कहा की उदय जी गुरु का आशीर्वाद हैं तो मजनू जी प्यार इसलिए में दोनों को नहीं छोड़ सकती हु। चलो गुरूजी से ही पूछ लेते हैं , दोनों की हवा गुल हो गयी। अब दोनों एकदूसरे के लिए अपना प्यार त्याग करने को बोलने लगे। और वह से भागने लगे। पारुल को ये सब पहले से पता था। इसलिए उसने ये सब किया। इधर घुंघरू भी बाबाजी को तरह तरह के आशीर्वाद की मांग करने लगे। बाबाजी यानि की उदय भाई घुंघरू और पारुल की बिच फस गए। मजनू ने कहा की अब बोलो इंडिया चलते हे। हो गयी मुराद पूरी। सला एक तो वो लड़की दूसरी तरफ ये डॉ घुंघरू भी आ टपका। में तो कहता हु भाई रातों रात भाग चलते हैं।
उदय ..... देख मजनू। .. ये सब इतना फेल चूका हैं की एकदम से भाग नहीं सकते। पूरा शहर पहचान गया हैं की बाबा जी कितने महान पुरुष हैं। इसलिए बच्चा अभी शांत रह।
मजनू .. भाई ये बाबाजी को बाहर ही छोड़ कर आया करो और ये अपने सारे लड़के निकम्मे हो गए। दिनभर प्रसाद खिलाकर मजे करवा दो बास. में कहता हु भाई एक दो को टपका कर भाग चलते हैं।
उदय ... मजनू। . भगवान् का दिया सब कुछ हैं। .. मगर लड़की नहीं हैं नसीब में। एक काम कर तू उससे शादी कर ले और भाग जा। मैं बाद में आ जाऊंगा।
मजनू .. नहीं भाई आपको छोड़ कर में नहीं जा सकता हूँ। ऐसा करते हे पारुल को उठा कर ले चलते हैं दुबई और वह उससे ही पूछ लेंगे की किससे शादी करेगी। भाई जिससे भी करेगी कमसे कम उसका घर तो बस जायेगा।
अबे वो प्रसाद के भिखारियों ... जा कर पता करो की पारुल का घर कहाँ हैं और घर में कौन कौन हैं।
उदय बाबा ने अपना साधु वाला भेष बना रखा हैं इसलिए उन्होंने सोचा की कल में चतुर्वेदी जी को मेरा यानि उदय शेट्टी का होटल का एड्रेस दे कर बताऊंगा की आपको यहाँ लड़का सही मिलेगा । मजनू भाई बोले ... भाई इसको कल काहे को बुलाया हैं। कोई खास बात।
उदय .. मजनू कल उनको मेरे खास भाई का नाम पता बता दूंगा और वो ही इसके लिए सही रहेगा। ... बस तू तैयार रह।
मजनू ... भाई आप तो बस हुकुम करना। बाकि का काम में कर दूंगा।
मजनू अपने बारे में और उदय अपने बारे में सोचने लगे।
दूसरे दिन चतुर्वेदी जी फिर अपनी बेटी को लेकर आये। उदय भाई ने पास में एक पांच सितारा होटल का पता दे दिया और कह दिया ये बालक मेरा चेला हैं और जो में कहूंगा वही ये करता हैं। इसलिए आज से आपकी सारी परेशनियां ख़त्म। चतुर्वेदीजी ख़ुशी से अच्छा खासा माल दे कर चल पड़े। उधर मजनू ने उदय भाई की बातों का ध्यान न देकर बस पारुल के ख्वाबों में खोया हुआ रहा।
अपनी बेटी को समझा बुझा कर होटल भेज दिया। उदय और मजनू भी होटल के लिए निकल पड़े। दोनों के रूम अलग अलग होने के कारन दोनों अलग अलग लिफ्ट में चले गए। पारुल ने उदय भाई से बात की कि आपके गुरूजी ने कहा की आप मुझे झेल लेंगे मतलब आप मुझे खुश रखेंगे। वैसे आप की उम्र क्या हैं।
उदय भाई .... वैसे तो गुरूजी ने अगर कहा हैं तो मुझे कोई प्रॉब्लम नहीं हैं क्योकि गुरूजी जो चाहते हैं वो मेरे लिए भगवान् का वरदान होता हैं और में वही करता हूँ। भगवान् का दिया सब कुछ हैं। धन दौलत .. इज्जत भी हैं। अगर हिंदुस्तान में कोई काम करू तो करोड़ों कमा सकता हूँ मगर मैं दुबई में हमारी होटल हैं । आप चाहे जैसा ही होगा शादी के बाद। दोनों ने अपने भविष्य की प्लानिंग करते हुए बातें करने लगे। पारुल ने जाने को कहा तो उदय भाई ने बहाना करके होटल में ही खुद को रोक लिया और कमरे से विदा कर दिया।
पारुल ने मजनू भाई को पहले देख लिया था इसलिए वो चुपके से उसके कमरे की तरफ चल पड़ी। मजनू
भी कमरे बहार टहल रहा था। नज़रें मिलते ही मजनू उछल पड़ा। जब मजनू ने भी दुबई में होटल का धंधा बताया तो पारुल का शक और बढ़ गया। कि कही न कही ये दोनों मिले हुए हैं और बाबाजी कोई नहीं उदय ही हैं। पारुल ने अपनी पहचान छुप रखी। उसने घुंघरू अंकल को बताया की दो नए आदमी आपके देश यानि की दुबई से आये हैं और इनका नाम उदय और मजनू हैं। घुंघरू को पहले से शक था की वो कोई बाबा वबा नहीं हैं इन दोनों की कारस्तानी हैं। चतुर्वेदी जी को जब पता चला तो वो भी काफी गुस्सा हुए। मगर पारुल ने दोनों को चुप करवा कर एक प्लान बनाया की इन दोनों को कैसे सबक भी सिखाए और जैल भी भेजे। घुंघरू पहले से परेशान था इनदोनो से इसलिए वो सबसे पहले तैयार हुआ।
पारुल ने दोनों को अलग अलग मिल कर अपने प्यार का नशा चढ़ा रही थी। उदय भाई और मजनू चुपके से
पारुल से मिल रहे थे गाना भी ग रहे थे मगर एकदूसरे को बताये बगैर। मगर दोनों गुरु चले से ज्यादा दोस्त थे और दोस्त से ज्यादा भाई भी थे। एक दिन उदय भाई ने पारुल के बारे में बताया मगर नाम नहीं वैसे ही मजनू ने भी पूरा किस्सा कह दिया। अब दोनों खुश हुए की भारत आकर उन्होंने गलती नहीं की और खास कर बाबाजी बन कर।
मगर दोनों की ख़ुशी ज्यादा दिन नहीं रही। क्युकी पारुल ने पुलिस गस्त लगायी तो लोगो को लगा की बहुत ही ज्ञानी महात्मा आये हैं इसलिए भीड़ ज्यादा रहने लगी। चतुर्वेदी जी और घुंघरू भी ज्यादा आश्रम में ही रहने लगे। दोनों को पारुल से मिलने का मौका नहीं मिलता था और पारुल भी यही चाहती थी। एक दिन दोनों चुपके से प्लान बना कर जब पारुल से मिलने गए तो एकदूसरे आमने सामने देख कर लड़ने लगे। पारुल ने कहा की उदय जी गुरु का आशीर्वाद हैं तो मजनू जी प्यार इसलिए में दोनों को नहीं छोड़ सकती हु। चलो गुरूजी से ही पूछ लेते हैं , दोनों की हवा गुल हो गयी। अब दोनों एकदूसरे के लिए अपना प्यार त्याग करने को बोलने लगे। और वह से भागने लगे। पारुल को ये सब पहले से पता था। इसलिए उसने ये सब किया। इधर घुंघरू भी बाबाजी को तरह तरह के आशीर्वाद की मांग करने लगे। बाबाजी यानि की उदय भाई घुंघरू और पारुल की बिच फस गए। मजनू ने कहा की अब बोलो इंडिया चलते हे। हो गयी मुराद पूरी। सला एक तो वो लड़की दूसरी तरफ ये डॉ घुंघरू भी आ टपका। में तो कहता हु भाई रातों रात भाग चलते हैं।
उदय ..... देख मजनू। .. ये सब इतना फेल चूका हैं की एकदम से भाग नहीं सकते। पूरा शहर पहचान गया हैं की बाबा जी कितने महान पुरुष हैं। इसलिए बच्चा अभी शांत रह।
मजनू .. भाई ये बाबाजी को बाहर ही छोड़ कर आया करो और ये अपने सारे लड़के निकम्मे हो गए। दिनभर प्रसाद खिलाकर मजे करवा दो बास. में कहता हु भाई एक दो को टपका कर भाग चलते हैं।
उदय ... मजनू। . भगवान् का दिया सब कुछ हैं। .. मगर लड़की नहीं हैं नसीब में। एक काम कर तू उससे शादी कर ले और भाग जा। मैं बाद में आ जाऊंगा।
मजनू .. नहीं भाई आपको छोड़ कर में नहीं जा सकता हूँ। ऐसा करते हे पारुल को उठा कर ले चलते हैं दुबई और वह उससे ही पूछ लेंगे की किससे शादी करेगी। भाई जिससे भी करेगी कमसे कम उसका घर तो बस जायेगा।
अबे वो प्रसाद के भिखारियों ... जा कर पता करो की पारुल का घर कहाँ हैं और घर में कौन कौन हैं।
No comments:
Post a Comment