Saturday, 23 April 2016

वेलकम महात्माजी ५

वेलकम महात्माजी ५ 
सुबह जल्दी उठकर डॉ घुंघरू चतुर्वेदीजी के घर पहुंच जाते हैं और कहते हैं की बाबाजी को गंगा जी पूजा करवाने को बोलो। और जब गंगा में पूजा होगी तब उनका सारा भेद खुल जायेगा। क्योंकि बाबाजी को सर्दी ज्यादा लगती भी हैंगंगा का पानी  बहुत ही टण्डा हैं और उन्हें  किसी भी तरह की पूजा वगेरा छोडो कोई मंत्र भी नहीं आता हैं. वहां दोनों एकदूसरे की पोल खोलेंगे और में गायब हो जाऊंगा। चतुर्वेदीजी को कुछ प्लान सही लगा मगर उसमे थोड़ा चेंज करने को लग रहा था इसलिए वो उस समय चुप रहे। अपनी पुत्री को इशारा कर दिया की चुप रहना ही सही हैं।  तैयार हो कर तीनो आश्रम पहुंच गए।  मगर वहां देखा तो पूरा आश्रम ही भरा हुआ था।  सभी बाबाजी की जय जय कार कर रहे थे क्योंकि उदय बाबाजी ने जो जो आशीर्वाद दिए वो सब मजनू ने अपने आदमियों से कैसे भी करके पुरे करवाए जिससे लोगो में बाबाजी की आस्था बढ़ गयीऔर पूरा शहर उमड़ पड़ा ।  यहाँ डॉ घुंघरू और सेठ की चलने वाली नहीं थी इसलिए वो चुपचाप देख रहे थे।  थोड़ी देर बाद जब चतुर्वेदीजी ने बाबाजी को हवन पूजा का कहा तो बाबाजी बोले   .. पुत्र यहाँ हम केवल आशीर्वाद देने आये हैं हवन और पूजा तो हमारे शिष्य करवा देंगे।
चतुर्वेदीजी हठ करने लगे।  क्योंकि उन्होंने भी इन दोनों गुरु चेले को फ़साने का प्लान कर रखा था और डॉ साब ने भी गंगा की पूजा का कह रखा हैं।  चतुर्वेदीजी अपने नए बंगले की पूजा के लिए ले जाकर इनदोनो को फ़साने चाहते थे और डॉ घुंघरू गंगा के तट पर पूजा करवाते जहां दोनों व्यस्त रहते और डॉ घुंघरू वहां से नो दो ग्यारह होने का प्लान कर रहे थे मगर चतुर्वेदीजी गंगा किनारे नहीं करके अपने नए बबंगले जो की था तो पुराना मगर साफ़ सफाई करवाकर नए जैसा करवा दिया।  वहां वो इनदोनो की पोल खोल कर ब्लैकमेल करके सारा पैसा लूटना चाहता था जबकि डॉ घुंघरू इन गुंडे लोगो से बच कर भागने की प्लानिंग में थे।  मजनू भाई को कुछ शक हुआ।  उन्होंने उदय भाई को इशारा करके कुछ नहीं बोलने को बोला।  बाबाजी भी मौन रह कर थोड़ा सब्र करने को कहा।  आँखे बंद करके बोले। ..  पुत्र अभी कुछ दिन मुहूर्त सही नहीं हैं  .. तुम थोड़े दिन और इंतज़ार करो।
डॉ घुंघरू वही गिरते गिरते बचे।  उन्हें चक्कर आने लगे।  सोचने लगे ये साले एक दूसरे के कारण मुझे जरूर मर डालेंगे।  क्या करू। ... लगता हैं आज रात ही भागना पडेगा। मजनू भाई की नज़र जब डॉ घुंघरू पर पड़ी तो डॉ ने नज़र छुपा ली , मजनू भाई समझ  गए की डॉ कोई चाल चल रहा हैं।  उसने अपने आदमियों को डॉ पर नज़र रखने को बोलै। उदय बाबा ने दो दिन बाद का मुहूर्त निकला और बोले  ....... पुत्र जब वहां हवन होगा तो कोई भी बाहर का  व्यक्ति नहीं हो क्योंकि ये हवन अति गोपनीय हैं।  इससे तुन्हे सभी कार्य में सफलता मिलेगी।  चतुर्वेदीजी भी यही चाहते थे। डॉ घुंघरू बोले  .. फिर तो मेरा वहां कोई काम नहीं होगा इसलिए में थोड़े दिन के लिए अपनी पत्नी से मिल कर आ जता हु। बाबाजी बोले। ...... नहीं पुत्र तुम इन्ही के घर के सदस्य होइसलिए  तुम्हारा रहना जरुरी हैं। डॉ घुंघरू बोले  ... बाबाजी में तो केवल इनका इलाज करने आया और ये यहाँ हस्पताल खोल रहे हैं इसके लिए में इनकी सहायता कर रहा हूँ।  अब आप ही बताये की में कैसे इनके घर का सदस्य हुआ  ,.. पारुल बोली। ...... अंकल आप मेरे पापा के डॉ होने के साथ आप मेरे अंकल भी हैं इसलिए आप तो हमारे घर के सदस्य ही हुए। . क्यों पापा।
चतुर्वेदीजी बोले   ... डॉ साब आप तो हॉस्पिटल के मालिक भी तो होंगे।  आप घर के मैंबर ही हैं।  हमने आपको हमेशा अपना भाई ही माना हैं।  इसलिए आप कही नहीं जायेंगे चाहे ऐसे आप हमारा आदेश माने या फिर निवेदन   . आप न तो कही जायेंगे और न ही सोचेंगे।
मजनू भाई  .   सेठ घुंघरू देखो आप अब कही भी जाने को बोलेंगे तो सिर्फ एक ही जगह।
बाबाजी  ... कंट्रोल मजनू कंट्रोल  ...   भक्त आप कही नहीं जायेंगे।  जब आपके सारे रिस्तेदार मना कर रहे हैं तो अब आपका जाना उचित नहीं हैं।  इसलिए आप सिर्फ हवन देखिये और चतुर्वेदीजी की सफलता का श्रीगणेश भी  . आशीर्वाद लेकर जब सभी चले गए तो मजनू ने कहा की उदय भाई ये आपने दो दिन बाद का क्या मुहूर्त निकाला  . आज सभी को लेजाकर वही सुला डालते।
उदय  .... मजनू कंट्रोल। ... अब देख। . हम क्या बने हुए हैं साधु महात्मा।  और साधु महात्मा हत्यार नहीं अक्ल काम में लेते हैं।  मेरे पास एक आईडिया हैं अगर तू सुने तो।
मजनू  .. भाई आज तक आप ने जो कहा जैसा कहा मेने किया।   आप बस बोलो तो सालो को आज ही कही टपका कर भाग चलते हैं और मेने दुबई जाने का भी सारा इंतज़ाम कर रखा हैं।
उदय  .. दुबई के जाने का इंतज़ाम सही किया मगर इनको टपकाना नहीं हैं।  एक काम कर एक पंडित को पकड़ और हवन का सामान क्या होता हैं वो लिखवा दाल और हां उसको सभी तरह के हवन का सामान लिखवा लेना।  कल कोई प्रॉब्लम नहीं हो।  ऐसा कर उसको उठा लिया।  वही हवन भी करवाएगा और हम आसन पर बैठे ध्यान करेंगे और   ऐ ऐ तुम सभी जैसा में कहु वैसे ही करते रहना नहीं तो यहाँ भारत में सजा बाद में मिलते हैं केस ज्यादा लम्बा चलने के कारन आदमी योही मर जाता हैं कोर्ट के चक्कर लगते हुए।  होटल में डॉ घुंघरू जब सामान पैक कर रहे तो मजनू और उदय भाई भी पहुंच गए  ....

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