वेलकम महात्माजी ६
मजनू ... क्यों घुंघरू सेठ कही जाने की तैयारी। याद रख भले ही ये दुबई नहीं हैं मगर दुबई की मेरी पूरी गैंग यही हैं। हर तरफ तुम पर नज़र रखी हुए हैं। हम क्या उस सेठ ने भी अपने दो चार आदमी यही लगा रखे हैं। यकीं नहीं हो तो निचे जाकर देख होटल में तेरा इंतज़ार कर रहे हैं। उनसे बच गए तो मेरे आदमी बाहर एक्सीडेंट करने को तैयार हैं इसलिए बाहर जाने की सोचना भी मत और जहां हवन हो रहा हैं वहां तुम हमारे साथ ही चलोगे।
डॉ .. हो हो हो वो मैं अपना सामन देख रहा था क्योकि मेरा कच्चा कही नहीं मिल रहा हैं।
उदय .. हसंते हुए .. समधी जी आप जब तक हमारी शादी नहीं करवा देते सोचना मत की कही जा सकोगे।
हा अगर हमारी शादी हो गयी तो हम तुमे अपने साथ दुबई ले जायेंगे .. क्योकि आखिरकार तुम हमारे समधी जो ठहरे।
डॉ घुंघरू ,, अगर ये बात हैं तो में आपकी शादी हर हाल में करवा दूंगा। और नहीं भी करवा पाया तो भी मरना तो हैं ही आपके हाथो या फिर उस इंस्पेक्टर के आदमियों से। मतलब मरना मुझे ही हैं।
उदय .. जब आपको मरना ही हैं तो क्यों न एक नेक काम करवा दो . मेरा नहीं तो कमसे कम मजनू की शादी करवा दो क्योकि वो लड़की मजनू को को अति पसंद हैं। क्यों मेरे छोटे भाई चलेगा।
मजनू .. भाई शादी किसी की भी हो आपकी या मेरी मगर इस बार कोई गलती नहीं होनी चाहिए , आप अगर हा करो तो पहले आप शादी कर लेना मैं बाद में कर लूंगा ।
उदय भाई .. मजनू क्या बोल रहा हे। उसी लड़की से। . यहाँ रामायण नहीं चल रही हैं जो एक ही लड़की से हम दोनों शादी करेंगे।
पकिया। .. भाई रामायण नहीं ... विष्णु पुराण ।
डॉ घुंघरू .. अबे। . भाई के खास आदमियों वो रामायण या कोई और नहीं वो महाभारत हैं जिसमे एक लड़की की पांच जनो से शादी की थी। .
पकिया। . अब .. दुबई होता तो किसी को भी पकड़ ले आते अब तिन और कहा से भाई ढूंढे ।
मजनू .. अबे भेन के टको। हैं न महाभारत न कोई और कथा । मैं भाई से ये बोल रहा हु की अगर करनी हैं तो आप कर लो मैं कोई और ढूंढ लूंगा।
उदय भाई .. हां ऐसे बोल वरना में भी बाबाजी बाबाजी खेलते खेलते पता नहीं क्या हूँ । ..
मजनू का एक आदमी एक पंडित को पकड़ लाया।
मजनू .. अबे ओ पंडित .. हवन वगेरा करवा सकता हैं या तू भी ऐसे ही।
पंडित .. नहीं यजमान मुझे सारे हवन आते हैं। आप बस ये बताओ की कहाँ और कब , किस प्रकार का हवन करवाना हैं।
उदय ... मजनू इसको अपने कमरे में ले जा और सही तरीके से बता।
मजनू .. भाई ये बूढ़ा हैं मर जायेगा
उदय मजनू मजनू .. समझाना इससे समझ की क्या क्या सामान लाना हैं प्यार से।
मजनू ने पंडित को केवल हवन का बताया मगर जिस तरीके से बताया पंडित को लगा की किसी कीमृत्यु हो उसकी आत्मा की शांति के लिए हवन करवाना हैं। इसलिए उसने सारा सामान उसी प्रकार का ही मंगवाया।
समान की लिस्ट जब मजनू ने अपने आदमियो को दी और कहा सारा सामान लेकर आओ। इसने उदय भाई ने जो सामान मंगवाया वो भी लिस्ट दे दी।
चतुर्वेदी जी के फार्म हाउस में हवन की तैयारी चल रही थी। चारो तरफ पुलिस की ड्रेस में चतुर्वेदी जी के आदमी थे। मजनू ने दो चार को पहचान लिया। उसने देख लिया की सेठ ने पूरा इंतज़ाम कर रखा हैं। मगर हम भी कम नहीं हैं।
मैदान में पूरी तैयारी चल रही थी। चतुर्वेदीजी सिर्फ अपनी बेटी को ही लाये बाकि का परिवार नहीं को नहीं लए।
नकली गहनों से सजी थालिया और कुछ रोकड़ पैसे भी सज़ा रखे थे।
पारुल दुल्हन की तरह सजी हुयी थी। तरह तरह के पकवान की खूसबू और चारो तरफ खुशाली के कारण पूरा मैदान किसी साही शादी जैसा लग रहा था। पंडित कर घबरा गया क्योकि वो सोच रहा था की मुझे तो किसी की आत्मा की शांति के लिए बुलाया मगर यहाँ तो नज़ारा कुछ और ही हैं। हे प्रभु इन्हे सद्बुद्धि देना। यही सोच कर वो हवन की तैयारी करने लगा।
मजनू ... क्यों घुंघरू सेठ कही जाने की तैयारी। याद रख भले ही ये दुबई नहीं हैं मगर दुबई की मेरी पूरी गैंग यही हैं। हर तरफ तुम पर नज़र रखी हुए हैं। हम क्या उस सेठ ने भी अपने दो चार आदमी यही लगा रखे हैं। यकीं नहीं हो तो निचे जाकर देख होटल में तेरा इंतज़ार कर रहे हैं। उनसे बच गए तो मेरे आदमी बाहर एक्सीडेंट करने को तैयार हैं इसलिए बाहर जाने की सोचना भी मत और जहां हवन हो रहा हैं वहां तुम हमारे साथ ही चलोगे।
डॉ .. हो हो हो वो मैं अपना सामन देख रहा था क्योकि मेरा कच्चा कही नहीं मिल रहा हैं।
उदय .. हसंते हुए .. समधी जी आप जब तक हमारी शादी नहीं करवा देते सोचना मत की कही जा सकोगे।
हा अगर हमारी शादी हो गयी तो हम तुमे अपने साथ दुबई ले जायेंगे .. क्योकि आखिरकार तुम हमारे समधी जो ठहरे।
डॉ घुंघरू ,, अगर ये बात हैं तो में आपकी शादी हर हाल में करवा दूंगा। और नहीं भी करवा पाया तो भी मरना तो हैं ही आपके हाथो या फिर उस इंस्पेक्टर के आदमियों से। मतलब मरना मुझे ही हैं।
उदय .. जब आपको मरना ही हैं तो क्यों न एक नेक काम करवा दो . मेरा नहीं तो कमसे कम मजनू की शादी करवा दो क्योकि वो लड़की मजनू को को अति पसंद हैं। क्यों मेरे छोटे भाई चलेगा।
मजनू .. भाई शादी किसी की भी हो आपकी या मेरी मगर इस बार कोई गलती नहीं होनी चाहिए , आप अगर हा करो तो पहले आप शादी कर लेना मैं बाद में कर लूंगा ।
उदय भाई .. मजनू क्या बोल रहा हे। उसी लड़की से। . यहाँ रामायण नहीं चल रही हैं जो एक ही लड़की से हम दोनों शादी करेंगे।
पकिया। .. भाई रामायण नहीं ... विष्णु पुराण ।
डॉ घुंघरू .. अबे। . भाई के खास आदमियों वो रामायण या कोई और नहीं वो महाभारत हैं जिसमे एक लड़की की पांच जनो से शादी की थी। .
पकिया। . अब .. दुबई होता तो किसी को भी पकड़ ले आते अब तिन और कहा से भाई ढूंढे ।
मजनू .. अबे भेन के टको। हैं न महाभारत न कोई और कथा । मैं भाई से ये बोल रहा हु की अगर करनी हैं तो आप कर लो मैं कोई और ढूंढ लूंगा।
उदय भाई .. हां ऐसे बोल वरना में भी बाबाजी बाबाजी खेलते खेलते पता नहीं क्या हूँ । ..
मजनू का एक आदमी एक पंडित को पकड़ लाया।
मजनू .. अबे ओ पंडित .. हवन वगेरा करवा सकता हैं या तू भी ऐसे ही।
पंडित .. नहीं यजमान मुझे सारे हवन आते हैं। आप बस ये बताओ की कहाँ और कब , किस प्रकार का हवन करवाना हैं।
उदय ... मजनू इसको अपने कमरे में ले जा और सही तरीके से बता।
मजनू .. भाई ये बूढ़ा हैं मर जायेगा
उदय मजनू मजनू .. समझाना इससे समझ की क्या क्या सामान लाना हैं प्यार से।
मजनू ने पंडित को केवल हवन का बताया मगर जिस तरीके से बताया पंडित को लगा की किसी कीमृत्यु हो उसकी आत्मा की शांति के लिए हवन करवाना हैं। इसलिए उसने सारा सामान उसी प्रकार का ही मंगवाया।
समान की लिस्ट जब मजनू ने अपने आदमियो को दी और कहा सारा सामान लेकर आओ। इसने उदय भाई ने जो सामान मंगवाया वो भी लिस्ट दे दी।
चतुर्वेदी जी के फार्म हाउस में हवन की तैयारी चल रही थी। चारो तरफ पुलिस की ड्रेस में चतुर्वेदी जी के आदमी थे। मजनू ने दो चार को पहचान लिया। उसने देख लिया की सेठ ने पूरा इंतज़ाम कर रखा हैं। मगर हम भी कम नहीं हैं।
मैदान में पूरी तैयारी चल रही थी। चतुर्वेदीजी सिर्फ अपनी बेटी को ही लाये बाकि का परिवार नहीं को नहीं लए।
नकली गहनों से सजी थालिया और कुछ रोकड़ पैसे भी सज़ा रखे थे।
पारुल दुल्हन की तरह सजी हुयी थी। तरह तरह के पकवान की खूसबू और चारो तरफ खुशाली के कारण पूरा मैदान किसी साही शादी जैसा लग रहा था। पंडित कर घबरा गया क्योकि वो सोच रहा था की मुझे तो किसी की आत्मा की शांति के लिए बुलाया मगर यहाँ तो नज़ारा कुछ और ही हैं। हे प्रभु इन्हे सद्बुद्धि देना। यही सोच कर वो हवन की तैयारी करने लगा।
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