वेलकम महात्माजी ७
जब पंडित हवन कुंड को तैयार करने लगा तो चतुर्वेदीजी गृह शांति का हवन का सोच रहे थे और सोच रहे थे की इन सभी को आज मज़ा चखाना हैं इन विदेशियों से काफी सारा माल लेना हैं।
उदय और मजनू सोच रहे थे की आज पंडित जब शादी करवाएगा उसके बाद हम हवन में ऐसी आहुति देंगे जिससे पुरे मैदान में धुँआ ही धुँआ हो जायेगा और हम पारुल को उठा कर भाग जायेंगे।
पंडित सोच रहा था की पार्टी बहुत मोटी हैं इसलिए आत्मा की शांति का हवन होने के बाद काफी अच्छा पैसा मिलेगा। सभी अपने अपने हिसाब से सोचते हुए एक दूसरे से हँसते हुए बात कर रहे थे। उदय भाई बाबाजी बन कर एक तरफ आसन लगाए बेठे थे। उन्होंने एक बड़ा सा शॉल अपने पास रख रखा था जिससे जब हवन में धुएं का पॉवडर डालेगा तो मुंह ढँक कर भागेंगे। मजनू ने मास्क की तैयारी कर राखी थी। चतुर्वेदीजी ने पुरे मैदान को सजाकर रखा था जिससे ये पता नहीं चल रहा था की कौन कौन पहरेदार हे और कौन कौन गेस्ट। सभी कुछ सही चल रहा था। भाई लोग के कुछ भूखे भाई सिर्फ खाने के सामान की तरफ की ध्यान दे रहे थे। मंद मंद संगीत के साथ सभी सूट बूट में मस्त लग रहे थे कोई गड़बड़ नहीं लग रही थी सबको।
गड़बड़ जब हुयी जब पंडित ने हवन कुंड के पास मृतक की फोटो लगाने को बोलै। चतुर्वेदीजी बोले .. अबे पंडित यहा किसी का श्राद्ध नहीं हैं और न ही कोई मरे हुए की आत्मा की शांति का हवन हैं यहाँ तो सिर्फ गृह प्रवेश और गृह शांति का हवन हैं। तू कौनसा हवन करने को आया हैं।कुछ भी अपशुकन बोलै तो तुझे तो . अबे तेरा ही हवन कर दूंगा यहाँ।
पंडित डरता हुआ बोला ... नहीं नहीं यजमान जी आपने गलत सूना मेने गृह शांति का ही बोला और वही कर रहा हूँ ।चतुर्वेदीजी धमकी देकर चले गए। पंडित सोचने लगा की क्या फर्क पड़ता हैं गृह और आत्मा में हैं तो शांतिो ही मगर यहाँ शांति कही भी नज़र नहीं आती चलो .. हवन ही तो करवाना हैं .. वरना मेरा हवन हो जायेगा। पंडित अपनी तैयारी में लगा रहा।
मजनू .. पंडित सारी तैयारी हो गयी।
पंडित .. जी यजवान। .सब तैयारी हो गयी हैं।
मजनू .. अब बता दुल्हन और दूल्हा किधर बैठेंगे।?
पंडित सोचने लगा कि अब ये कोनसी नयी मुशीबत आई हैं .. अच्छा अच्छा गृह शांति के जुगल जोड़े की बात कर रहे हैं।
पंडित . इधर सामने ही दोनों बैठेंगे।
मजनू .. पंडित ये फेरे लेने के लिए जो पंडाल बनते हैं वो तो नहीं बनाए फिर फेरे कैसे लेंगे और पंडित कुछ भी गड़बड़ की तो तुझे तो इसी हवन में डालने के बाद गंगा में बहा दूंगा।
पंडित सर पकड़ कर सोचने लगा की यहाँ तो आज कोई बड़ी लड़ाई होगी क्योंकि जगह एक हैं और पार्टियां दो ..
डॉ घुंघरू ..... दो नहीं तीन .. मैं भी हूँ अभी बाकी। अबे पंडित इतने जोर से सोचेगा तो मुझे सुनाई देगा ही वैसे मैं डॉ हु और सिर्फ मैं ही तुझे यहाँ से निकाल सकता हूँ अगर तू मेरा कहना माने तो यहाँ से ज़िंदा निकल पाएगा वर्ना ये दोनों गुंडे तुझे और मुझे कच्चा चबा जायेंगे।
पंडित बोलै .. आपको यहाँ कौनसा हवन करवाना हैं . अब किस तरह की तैयारी करू।
डॉ घुंघरू .. कुछ नहीं तुझे जो करना हैं वो कर मगर आखिर में इस पुड़िया को हवन कुंड में डाल देना।
पंडित सोचने लगा की तीनो ने अलग अलग पुड़िया दी हैं। तीनों की पूड़ियों को डाल दूंगा। मरने दो इन सबको। में तो अपना गमछा मुंह पर ढँक कर भांगने की तैयारी करता हूँ , ज़िंदा रहूँगा तो माल तो बाद में भी कमा लूंगा। .जैसे जैसे हवन शुरू होने को हुआ सभी हवन कुंड के पास आ गए। पारुल पूरी दुल्हन की तरह सजधज कर खड़ी थी। मजनू सिर्फ उसी को देख रहा था। पंडित ने हवन शुरू करने से पहले यजमान को आसन ग्रहण करने को कहा और सोचने लगा की कोनसे यजवान यहाँ पर बैठेंगे। किसको बोलू और किसकी बात पर ध्यान दू। मजनू कूद कर बेठ गया . चतुर्वेदीजी हैरान की ये क्या पागलपन हैं। इससे पहले कुछ बोलते मजनू ने पारुल का हाथ पकड़ कर बैठा दिया। पारुल भी बेठ गयी। उसने सोचा शायद पापा की कोई चाल होगी। जब चतुर्वेदीजी की और देखा तो उन्होंने वहां से उठने का इशारा किया। पंडित भी घबरा गया की ये क्या हो रहा हैं . दूल्हे को जल्दी हैं या दुल्हन को या फिर कही लड़की को उठा कर तो नहीं लाये हैं. घबराए पंडित ने आनन फानन में वो सारी पुड़िया एकसाथ हवन में डाल दी। तीनों पुड़िया जब एकसाथ हवन में धु धु कर जलने लगी और केमिकल होने के कारण पुरे मैदान में घना धुँआ हो गया। सभी बचने की तैयारी तो कर रखे थे मगर इसका असर तीन गुना ज्यादा था इसलिए सभी की आँखों झलने लगी। खासते हुए सभी इधर उधर टकराते हुए गिरने लगे। अपनी जान ज्यादा प्यारी होने के कारण सभी बदले की भावना को छोड़ कर बस वहां से भागने लगे। किसी को कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा था। एक दूसरे को धक्का देते हुए किसी तरह बाहर की तरफ भागने में लगे थे। चतुर्वेदीजी की उम्र ज्यादा और नज़र का चश्मा भी बड़ा होने के कारण बड़ी मुश्किल से गिरते सँभालते वहां से निकलने की कुाशिश कर रहे थे लकिन सभी उन्हें धक्का देकर उन्हीके ऊपर से भाग रहे थे और चतुर्वेदीजी हेल्प के लिए चिल्ला रहे थे। , उनकी बेटी भी उन्हें नहीं संभाल रही थी क्योकि उसने इतना भारी लहंगा पहन रखा था जिससे वो अपने आपको सँभालने में भी परेशान हो रही थी । चतुर्वेदीजी के आदमी सबसे पहले भाग छूटे। मजनू ने जब चतुर्वेदीजी को भागते लोगो के निचे आते देखा तो उसने किसी तरह अपने को सँभालते हुए चतुर्वेदीजी के पास पहुंचकर उन्हें खड़ा करने में सहायता करने लगा। चतुर्वेदीजी को कुछ दिखाई नहीं दे रहा था मगर पारुल ने ये सब देख लिया की मजनू पापा की सहायता कर रहा हैं। चतुर्वेदीजी उदय मजनू को गालियां देते हुए बाहर की तरफ निकलने लगे। मजनू के साथ उदय भाई और डॉ घुंघरू भी किसी तरह बच कर बाहर आ गए। वहां भी थोड़ा बहुत धुँआ हो रहा था।सभी अपनी अपनी कार के पास खड़े होकर अपने आप को सम्भाल रहे थे। चातुर्वेदीजी ने पारुल को दिलासा देते हुए उन तीनों को नहीं छोड़ने को कहने लगे तब पारुल ने बताया की किस तरह मजनू ने आपकी जान बचायी। चतुर्वेदीजी बोले .. पारुल बेटी ये सब बातें कही तुम उसके प्यार में तो नहीं बोल रही हो।
पारुल .. नहीं पिताजी उनसे प्यार तो मेरी जूती भी न करे। में तो इसलिए बोल रही हु की आपको बचा कर बाहर लेन वाला कोई और नहीं मजनू ही हैं।
चतुर्वेदीजी मजनू को ढूंढने लगे मगर डॉ घुंघरू के साथ मजनू और उदय भाई वहां से भाग निकले।
पारुल ने वायरलेस से अपने पुलिस लाइन में बताया की इन लोगो को भागने नहीं दिया जाये और इन्हे पकड़ कर हमारे घर लाये। उधर मजनू उदय भाई और डॉ घुंघरू के साथ एक पुरानी बस से शहर छोड़ कर भागने के लिए बैठ गए मगर नाकाबंदी के कारण वो चैकपोस्ट पर पकडे गए। डॉ घुंघरू फिर से उनदोनो से लड़ने लगे और पुलिसवालों को बोल की उनदोनो को ही पकड़ ले जाओ न की मुझे। मैं तो डॉ हु और कोई एक्सीडेंट हुआ हैं इसलिए मुझे गॉव जाना पड़ रहा हैं।
पुलिस .. डॉ साब क्या आपको मालूम हैं की आपको कोनसा गॉव जाना हैं। गॉव का नाम का नाम बताओ। .
डॉ घुंघरू .. वो वो वो ठाणे गॉव जाना हैं।
पुलिस। डॉ साब यहाँ ठाणे गॉव नहीं हैं वो महाराष्ट्र में हे इसलिए ज्यादा होशियारी नहीं सीधे सीधे पुलिस स्टेशन चलो
डॉ। . ये ठीक हैं मैं भी पुलिस स्टेशन ही चलने को तैयार हूँ। और सोचने लगे की उस बाप बेटी से तो अच्छा पुलिस स्टेशन जाऊ और वहां से अपना आप को किसी तरह छुड़वा कर वापस दुबई भाग जाता हूँ।
उदय भाई और मजनू दोनों चुपचाप जीप में बैठ गए। उन्हें पता हैं की यहाँ से भागना बहुत ही मुश्किल काम हैं।
जीप सीधे चतुर्वेदीजी के बंगले में आ गयी। जब तीनो बाहर निकले तो भौचंगे रह गए।
उदय ... ये लो ये तो सेठ का मकान हैं और हम लोग फिर वही आ गए।
मजनू ... कहा था मेने इस डॉ मजनू मनहूश हे .. जब भी मिलता हैं साली मुशीबत ख़त्म नहीं बढ़ती ही जाती हैं
उदय .. कंट्रोल मजनू कंट्रोल .. अब हमारे समधीजी हैं। जाने दे दुबई में कर देंगे इनको इसबार पूरा
.. डॉ मजनू .. अबे गधो मुशीबत मैं नहीं तुम लोग हो .. पता नहीं कोनसी घडी में में तुम लोगो से रिस्ता जोड़ा। मेरी तो मुसीबतें कभी ख़त्म नहीं हो रही हैं वरना मैं सीधे सीधे अपना हस्पताल चला रहा था। हे भगवान् इन दोनों से मेरा कब छुटकारा मिलेगा। कमीनों मैं अगर अब तुम्हारे किसी भी तरह साथ हुआ तो पहले तुम्हे मारूंगा फिर अपने आप को।
जब पंडित हवन कुंड को तैयार करने लगा तो चतुर्वेदीजी गृह शांति का हवन का सोच रहे थे और सोच रहे थे की इन सभी को आज मज़ा चखाना हैं इन विदेशियों से काफी सारा माल लेना हैं।
उदय और मजनू सोच रहे थे की आज पंडित जब शादी करवाएगा उसके बाद हम हवन में ऐसी आहुति देंगे जिससे पुरे मैदान में धुँआ ही धुँआ हो जायेगा और हम पारुल को उठा कर भाग जायेंगे।
पंडित सोच रहा था की पार्टी बहुत मोटी हैं इसलिए आत्मा की शांति का हवन होने के बाद काफी अच्छा पैसा मिलेगा। सभी अपने अपने हिसाब से सोचते हुए एक दूसरे से हँसते हुए बात कर रहे थे। उदय भाई बाबाजी बन कर एक तरफ आसन लगाए बेठे थे। उन्होंने एक बड़ा सा शॉल अपने पास रख रखा था जिससे जब हवन में धुएं का पॉवडर डालेगा तो मुंह ढँक कर भागेंगे। मजनू ने मास्क की तैयारी कर राखी थी। चतुर्वेदीजी ने पुरे मैदान को सजाकर रखा था जिससे ये पता नहीं चल रहा था की कौन कौन पहरेदार हे और कौन कौन गेस्ट। सभी कुछ सही चल रहा था। भाई लोग के कुछ भूखे भाई सिर्फ खाने के सामान की तरफ की ध्यान दे रहे थे। मंद मंद संगीत के साथ सभी सूट बूट में मस्त लग रहे थे कोई गड़बड़ नहीं लग रही थी सबको।
गड़बड़ जब हुयी जब पंडित ने हवन कुंड के पास मृतक की फोटो लगाने को बोलै। चतुर्वेदीजी बोले .. अबे पंडित यहा किसी का श्राद्ध नहीं हैं और न ही कोई मरे हुए की आत्मा की शांति का हवन हैं यहाँ तो सिर्फ गृह प्रवेश और गृह शांति का हवन हैं। तू कौनसा हवन करने को आया हैं।कुछ भी अपशुकन बोलै तो तुझे तो . अबे तेरा ही हवन कर दूंगा यहाँ।
पंडित डरता हुआ बोला ... नहीं नहीं यजमान जी आपने गलत सूना मेने गृह शांति का ही बोला और वही कर रहा हूँ ।चतुर्वेदीजी धमकी देकर चले गए। पंडित सोचने लगा की क्या फर्क पड़ता हैं गृह और आत्मा में हैं तो शांतिो ही मगर यहाँ शांति कही भी नज़र नहीं आती चलो .. हवन ही तो करवाना हैं .. वरना मेरा हवन हो जायेगा। पंडित अपनी तैयारी में लगा रहा।
मजनू .. पंडित सारी तैयारी हो गयी।
पंडित .. जी यजवान। .सब तैयारी हो गयी हैं।
मजनू .. अब बता दुल्हन और दूल्हा किधर बैठेंगे।?
पंडित सोचने लगा कि अब ये कोनसी नयी मुशीबत आई हैं .. अच्छा अच्छा गृह शांति के जुगल जोड़े की बात कर रहे हैं।
पंडित . इधर सामने ही दोनों बैठेंगे।
मजनू .. पंडित ये फेरे लेने के लिए जो पंडाल बनते हैं वो तो नहीं बनाए फिर फेरे कैसे लेंगे और पंडित कुछ भी गड़बड़ की तो तुझे तो इसी हवन में डालने के बाद गंगा में बहा दूंगा।
पंडित सर पकड़ कर सोचने लगा की यहाँ तो आज कोई बड़ी लड़ाई होगी क्योंकि जगह एक हैं और पार्टियां दो ..
डॉ घुंघरू ..... दो नहीं तीन .. मैं भी हूँ अभी बाकी। अबे पंडित इतने जोर से सोचेगा तो मुझे सुनाई देगा ही वैसे मैं डॉ हु और सिर्फ मैं ही तुझे यहाँ से निकाल सकता हूँ अगर तू मेरा कहना माने तो यहाँ से ज़िंदा निकल पाएगा वर्ना ये दोनों गुंडे तुझे और मुझे कच्चा चबा जायेंगे।
पंडित बोलै .. आपको यहाँ कौनसा हवन करवाना हैं . अब किस तरह की तैयारी करू।
डॉ घुंघरू .. कुछ नहीं तुझे जो करना हैं वो कर मगर आखिर में इस पुड़िया को हवन कुंड में डाल देना।
पंडित सोचने लगा की तीनो ने अलग अलग पुड़िया दी हैं। तीनों की पूड़ियों को डाल दूंगा। मरने दो इन सबको। में तो अपना गमछा मुंह पर ढँक कर भांगने की तैयारी करता हूँ , ज़िंदा रहूँगा तो माल तो बाद में भी कमा लूंगा। .जैसे जैसे हवन शुरू होने को हुआ सभी हवन कुंड के पास आ गए। पारुल पूरी दुल्हन की तरह सजधज कर खड़ी थी। मजनू सिर्फ उसी को देख रहा था। पंडित ने हवन शुरू करने से पहले यजमान को आसन ग्रहण करने को कहा और सोचने लगा की कोनसे यजवान यहाँ पर बैठेंगे। किसको बोलू और किसकी बात पर ध्यान दू। मजनू कूद कर बेठ गया . चतुर्वेदीजी हैरान की ये क्या पागलपन हैं। इससे पहले कुछ बोलते मजनू ने पारुल का हाथ पकड़ कर बैठा दिया। पारुल भी बेठ गयी। उसने सोचा शायद पापा की कोई चाल होगी। जब चतुर्वेदीजी की और देखा तो उन्होंने वहां से उठने का इशारा किया। पंडित भी घबरा गया की ये क्या हो रहा हैं . दूल्हे को जल्दी हैं या दुल्हन को या फिर कही लड़की को उठा कर तो नहीं लाये हैं. घबराए पंडित ने आनन फानन में वो सारी पुड़िया एकसाथ हवन में डाल दी। तीनों पुड़िया जब एकसाथ हवन में धु धु कर जलने लगी और केमिकल होने के कारण पुरे मैदान में घना धुँआ हो गया। सभी बचने की तैयारी तो कर रखे थे मगर इसका असर तीन गुना ज्यादा था इसलिए सभी की आँखों झलने लगी। खासते हुए सभी इधर उधर टकराते हुए गिरने लगे। अपनी जान ज्यादा प्यारी होने के कारण सभी बदले की भावना को छोड़ कर बस वहां से भागने लगे। किसी को कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा था। एक दूसरे को धक्का देते हुए किसी तरह बाहर की तरफ भागने में लगे थे। चतुर्वेदीजी की उम्र ज्यादा और नज़र का चश्मा भी बड़ा होने के कारण बड़ी मुश्किल से गिरते सँभालते वहां से निकलने की कुाशिश कर रहे थे लकिन सभी उन्हें धक्का देकर उन्हीके ऊपर से भाग रहे थे और चतुर्वेदीजी हेल्प के लिए चिल्ला रहे थे। , उनकी बेटी भी उन्हें नहीं संभाल रही थी क्योकि उसने इतना भारी लहंगा पहन रखा था जिससे वो अपने आपको सँभालने में भी परेशान हो रही थी । चतुर्वेदीजी के आदमी सबसे पहले भाग छूटे। मजनू ने जब चतुर्वेदीजी को भागते लोगो के निचे आते देखा तो उसने किसी तरह अपने को सँभालते हुए चतुर्वेदीजी के पास पहुंचकर उन्हें खड़ा करने में सहायता करने लगा। चतुर्वेदीजी को कुछ दिखाई नहीं दे रहा था मगर पारुल ने ये सब देख लिया की मजनू पापा की सहायता कर रहा हैं। चतुर्वेदीजी उदय मजनू को गालियां देते हुए बाहर की तरफ निकलने लगे। मजनू के साथ उदय भाई और डॉ घुंघरू भी किसी तरह बच कर बाहर आ गए। वहां भी थोड़ा बहुत धुँआ हो रहा था।सभी अपनी अपनी कार के पास खड़े होकर अपने आप को सम्भाल रहे थे। चातुर्वेदीजी ने पारुल को दिलासा देते हुए उन तीनों को नहीं छोड़ने को कहने लगे तब पारुल ने बताया की किस तरह मजनू ने आपकी जान बचायी। चतुर्वेदीजी बोले .. पारुल बेटी ये सब बातें कही तुम उसके प्यार में तो नहीं बोल रही हो।
पारुल .. नहीं पिताजी उनसे प्यार तो मेरी जूती भी न करे। में तो इसलिए बोल रही हु की आपको बचा कर बाहर लेन वाला कोई और नहीं मजनू ही हैं।
चतुर्वेदीजी मजनू को ढूंढने लगे मगर डॉ घुंघरू के साथ मजनू और उदय भाई वहां से भाग निकले।
पारुल ने वायरलेस से अपने पुलिस लाइन में बताया की इन लोगो को भागने नहीं दिया जाये और इन्हे पकड़ कर हमारे घर लाये। उधर मजनू उदय भाई और डॉ घुंघरू के साथ एक पुरानी बस से शहर छोड़ कर भागने के लिए बैठ गए मगर नाकाबंदी के कारण वो चैकपोस्ट पर पकडे गए। डॉ घुंघरू फिर से उनदोनो से लड़ने लगे और पुलिसवालों को बोल की उनदोनो को ही पकड़ ले जाओ न की मुझे। मैं तो डॉ हु और कोई एक्सीडेंट हुआ हैं इसलिए मुझे गॉव जाना पड़ रहा हैं।
पुलिस .. डॉ साब क्या आपको मालूम हैं की आपको कोनसा गॉव जाना हैं। गॉव का नाम का नाम बताओ। .
डॉ घुंघरू .. वो वो वो ठाणे गॉव जाना हैं।
पुलिस। डॉ साब यहाँ ठाणे गॉव नहीं हैं वो महाराष्ट्र में हे इसलिए ज्यादा होशियारी नहीं सीधे सीधे पुलिस स्टेशन चलो
डॉ। . ये ठीक हैं मैं भी पुलिस स्टेशन ही चलने को तैयार हूँ। और सोचने लगे की उस बाप बेटी से तो अच्छा पुलिस स्टेशन जाऊ और वहां से अपना आप को किसी तरह छुड़वा कर वापस दुबई भाग जाता हूँ।
उदय भाई और मजनू दोनों चुपचाप जीप में बैठ गए। उन्हें पता हैं की यहाँ से भागना बहुत ही मुश्किल काम हैं।
जीप सीधे चतुर्वेदीजी के बंगले में आ गयी। जब तीनो बाहर निकले तो भौचंगे रह गए।
उदय ... ये लो ये तो सेठ का मकान हैं और हम लोग फिर वही आ गए।
मजनू ... कहा था मेने इस डॉ मजनू मनहूश हे .. जब भी मिलता हैं साली मुशीबत ख़त्म नहीं बढ़ती ही जाती हैं
उदय .. कंट्रोल मजनू कंट्रोल .. अब हमारे समधीजी हैं। जाने दे दुबई में कर देंगे इनको इसबार पूरा
.. डॉ मजनू .. अबे गधो मुशीबत मैं नहीं तुम लोग हो .. पता नहीं कोनसी घडी में में तुम लोगो से रिस्ता जोड़ा। मेरी तो मुसीबतें कभी ख़त्म नहीं हो रही हैं वरना मैं सीधे सीधे अपना हस्पताल चला रहा था। हे भगवान् इन दोनों से मेरा कब छुटकारा मिलेगा। कमीनों मैं अगर अब तुम्हारे किसी भी तरह साथ हुआ तो पहले तुम्हे मारूंगा फिर अपने आप को।
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