वेलकम महात्माजी ८
चतुर्वेदीजी के आदमी जो लगे हुए हैं वो सभी पुलिस में है आज कुछ ज्याद गस्त लगा रखी हैं मकान के चारो तरफ।
मजनू ये सब देख कर बोला .. भाई यहाँ तो सचमुच की पुलिस लगा राखी हैं आज .. लगता हैं आज अपना एनकाउंटर यही होने वाला हैं। भाई आज कुछ नहीं कर सकते हम लोग।
उदय .. कंट्रोल मजनू कंट्रोल .. जहां कंट्रोल करना हैं वहां करता नहीं और जहां नहीं करना था वहां किया।
मजनू .. ऐसी बात नहीं हैं भाई हरबार आप ही कंट्रोल कंट्रोल कहते रहते हैं वरना ये सेठ और ये डॉ कब के आउट ऑफ़ कंट्रोल की दुनिया में पहुंच चुके थे।
डॉ घुंघरू .. ये ये हर बार मुझे कहता हैं खुद का पता नहीं सेल . जब देखो मेरी मुशीबत खड़ी कर देता हैं।
अगर आज सेठ ने तुम्हारे साथ मुझे कुछ किया तो में तो साफ़ मना करडुंगा की इनदोनो को जो करना हैं करो मैं इनलोगो के साथ नहीं हूँ। तुम तुम्हारी जनो। क्योंकि में यहाँ हस्पताल बनांने आया हूँ। हुजे कोई डर नहीं हैं। अब तुम दोनों कुत्ते की मौत मरोगे और मैं आराम से कभी भी मौका देख कर भाग जाऊंगा और दुबई में तुम लोगो की मृत्यु का जस्न मनाऊंगा।
उदय और मजनू ने चुपचाप रहना ही पसंद किया क्योंकि सेठ को डॉ की जरुरत हैं इसलिए इस डॉ की बात में थोड़ी बहुत सच्चाई नज़र आई।
तीनो जब बैठक में पहुंच तो वहां पहले से चतुर्वेदीजी और पारुल के साथ कुछ गम्भीर बात करते नज़र आये।
डॉ घुंघरू सीधे चतुर्वेदीजी के पास जाकर बैठ गया और कहने लगा ... नमस्कार सेठजी .. आज ये दोनों तो भाग ही जाते अगर मैं छुप कर इनदोनो का पीछा करके पकड़वाया और इनदोनो का यहाँ लाया। सालो को यही ख़त्म करदो। बहुत ज्यादा उछलते हैं। आज तो इनकी गंगाजी में अस्थि विषर्जित करवा ही दो। और मुझे दुबई से हसपताल के लिए नयी नयी मशीन लाने के लिए जाने दो। क्योंकि इनदोनो का मेरा कोई सम्बन्ध नहीं हैं।
उदय .. कोई कैसे सम्बन्ध नहीं हैं। मेरी बहन आपके बेटे को ब्याही हैं और मेरा भांनजा भी मेरी बहन से शादी करके गया हैं. .
मजनू .. भाई क्यों मुंह लगते हो इस बे पेंदे के लोटे से। जबभी कही भी फंसता हैं सीधे पाला पलट लेता हैं जाने दो न इसको।
उदय .. कैसे जाने दू। हमारा समधी जो हैं। हमारी दोनों प्यारी बहने इसके घर की दुल्हन बानी हैं।
डॉ घुंघरू .. वो तुम्हारी सगी बहने नहीं हैं इसलिए तुम लोगो से मेरा कोई सम्बन्ध भी नहीं हैं। चलो यहाँ से। तुम दोनों सोचते हो की सेठजी के साथ मैं जो हस्पताल बनारहा हूँ इसलिए तुम दोनों मुझसे रिस्ता रख कर यहाँ से छूट जाओगे। अगर इन्होने छोड़ भी दिया तो पारुल बेटी से कह कर तुम्हे अंदर करवा दूंगा।
चतुर्वेदीजी और पारुल जोर जोर से हसने लगे। डॉ घुंघरू भी बनावटी हसी के साथ हंसने लगा।
पारुल ने मजनू के पास आकर आँखे मिला कर बोली। ..... तुम दोनों में एक बात पक्की हैं खास कर इस मजनू में। साली रस्सी जल गयी मगर बल नहीं गए। ये यहाँ बाबाजी के साथ आकर हमलोगो को ठगने का प्लान किया। वो भी शादी के साथ।
उदय .. देखो हम दोनों के पास भगवान् का दिया सब कुछ हैं धन हैं दौलत हैं इज्जत भी हैं मगर हमलोगो की शक्ल के कारण हमारी कितनी बार तो शादी के मंडप से लड़की भाग गयी इसलिए मैंने जब हिन्दुस्तान में हर एरे गेरे बाबा के साथ लड़कियों देखि तो लगा की यहाँ तो कोई तो मिलेगी जिससे हम शादी करके वापस दुबई आ जायेंगे उस लड़की के साथ। मगर यहाँ तो कुछ और ही कहानी चल पड़ी।
पारुल .. ये देखो। . दूल्हा। . अबे तेरी बेटी की बेटी भी शादी के लायक हो गयी होती अगर तुम लोगो की समय पर शादी होटी तो। बनने चले दूल्हे। और ये मजनू ,,, नाम से ही लगता हैं कोई मजनू टाइप का आशिक होगा मगर ये तो अब लैला मजनू के टाइम का मजनू हैं जो लैला तो मर गयी और अपने इस मजनू को छोड़ गयी।
चले हैं शादी करने। कितना माल लेकर आये हो और अब कितना हो गया ये बताओ
उदय .. क्या लेकर आये अकेली जान ही तो हैं और वही आप ले लो। बचा क्या हैं हमारे पास। सब कुछ वही छोड़ भागे थे ,
मजनू . भाई अब कुछ पैसे बचे हैं वो भी दे दो क्योंकि अपना यहाँ कोई सुनाने वाला नहीं हैं।
पारुल .. वाह रे मेरे मजनू वाह .. क्या बात कही हैं थोड़े बहुत . अबे होटल से सारा सामान मेने यहाँ मंगवाया हैं उसमे से करीब १० करोड़ रूपये निकले हैं वो क्या किसी आश्रम के लिए छोड़ कर जाना चाहते हो।
उदय। . आप वो सब रख लीजिए हमे सिर्फ दुबई टिकट करवा दे बस। हम आराम से अपने घर पहुंच जाये।
खाली हाथ आये हैं और खाली हाथ जाना चाहते हैं और जब आपको पैसे मिलगये तो आप हमे यहाँ क्यों पकड़ कर लए।
डॉ घुंघरू .. कौनसा घर। तुम लोगो का कोई घरबार तो हैं नहीं। यहाँ वहां कही भी भटकते रहते हो।
पारुल .. ज्ञानी बाबाजी। . अभी तक आपका बाबाजी का भूत उतरा नहीं हैं क्या , कहो तो उतार दू एक झटके में। उदय .. अब जो करना हैं कर दीजिये।
चतुर्वेदीजी जोर जोर से हँसते हुए बोले .. तुम तीनो में सिर्फ एक जना ही बच सकता हैं और वो हैं
डॉ घुंघरू। . हा वो मैं हूँ। मुझे पता था की सेठजी अपना हस्पताल बनाएंगे तो मेरे कारण ही ..
चतुर्वेदीजी ... नहीं डॉ। वो तुम नहीं हो। वो केवल मजनू हैं।
डॉ घुंघरू .. क्या बात करते हैं सेठ जी ये मजनू ये मजनू। . आप अभी भी पारुल की शादी के कारण इसको बचा रहे हैं।
पारुल। . अबे अंकल .. थोड़ा सा तो अक्ल काम में लो .. मैं इस बूढ़े मजनू से शादी नहीं कर सकती। ये रिटायर होने की दहलीज़ पर खड़ा हैं और आप हे की मुझे फ़साने में लगे हैं। इसने पापा की जान बचायी ये जानते हुए भी की अगर पापा बच गए तो इसको मार डालेंगे फिर भी इसने जान बचायी।
मजनू .. थैंक्यू सेठजी थैंक्यू .. मगर सेठजी अगर आप छोड़ ही रहे हैं तो उदय भाई को भी छोड़ दीजिये।
उदय .. नहीं नहीं मजनू। तू चला जा। आज तुजे नयी ज़िन्दगी मिल रही हैं। . तू चला जा।
पारुल ..ओए सन १८५७ की पैदाइशों आज तुम दोनों कोछोड रहे हैं जाओ आज से आप लोग आज़ाद हैं मगर तुम्हारा पैसा तुम्हे नहीं मिलेगा।
उदय। . जान हैं तो जहाँन हैं। हम दुबई जा कर वापस पैसा बना लेंगे।
डॉ घुंघरू .. बना लेंगे का क्या मतलब। बिना अपनों के कोई कुछ कर सकता हैं क्या। मैं तुम्हारा एकमात्र रिस्तेदार हु वहां। इसलिए चलो तीनो आज ही दुबई निकल पड़ते हैं।
उदय। . क्यों समधीजी आज भी कुछ ज्यादा ऊचे स्वर में बोल रहे थे हमारा क्या रिश्ता। और अब
मजनू .. मेने कहा था ना की ये डॉ बिन पेंदे का लौटा हैं। अब इसको हमारी रिश्तेदारी याद आई और इतनी देर ये हमे मरवाने का काम कर रहा था , क्यों डॉ आज कुछ ज्यादा घुंघरू बजा रहे थे।
डॉ घुंघरू। . वो क्या आज सुबह केले खाये थे इसलिए बार बार जुबान फिसल रही थी।
चतुर्वेदीजी .. उदय बाबाजी मतलब उदय जी आप सभी वापस जाये क्योकि आप लोग भाईलोग जरूर हैं मगर आपलोगो में प्यार भी बहुत हैं आपस में इसलिए आप लोग आराम से अपने घर दुबई जाये और जो आपका पैसा हैं वो हम रख लेते हैं .. और डॉ घुंघरू जी आप यहाँ आते रहना क्योकि आपको यहाँ उन्ही पैसो से हस्पताल खोलना हैं।
पारुल। . और हाँ एक बात और इस बार जब आप लोग भारत आये तो ये गंदे विचार मत लाना की आया लड़कियां ऐसे ही हाथ आ जाती हैं। कोई विधवा आश्रम में किसी बूढी औरते होगी जो अब भी अपना घर बसाने की सोच रही होगी तो आपदोनों के लिए फोटो भेज दूंगी और उन्हें भी आपकी पहले फोटो दिखा कर आपके रिटायरमेंट की खबर दे दूंगी क्यों मजनू ... भाई
उदय .. मजनू चलो यहाँ से।
इस तरह से तीनो वापस दुबई के लिए निकल पड़े। और फिर अपनी इंपोर्टेड वाइफ की तलाश में।
जय हिन्द। . . . . . . . . . . . .
चतुर्वेदीजी के आदमी जो लगे हुए हैं वो सभी पुलिस में है आज कुछ ज्याद गस्त लगा रखी हैं मकान के चारो तरफ।
मजनू ये सब देख कर बोला .. भाई यहाँ तो सचमुच की पुलिस लगा राखी हैं आज .. लगता हैं आज अपना एनकाउंटर यही होने वाला हैं। भाई आज कुछ नहीं कर सकते हम लोग।
उदय .. कंट्रोल मजनू कंट्रोल .. जहां कंट्रोल करना हैं वहां करता नहीं और जहां नहीं करना था वहां किया।
मजनू .. ऐसी बात नहीं हैं भाई हरबार आप ही कंट्रोल कंट्रोल कहते रहते हैं वरना ये सेठ और ये डॉ कब के आउट ऑफ़ कंट्रोल की दुनिया में पहुंच चुके थे।
डॉ घुंघरू .. ये ये हर बार मुझे कहता हैं खुद का पता नहीं सेल . जब देखो मेरी मुशीबत खड़ी कर देता हैं।
अगर आज सेठ ने तुम्हारे साथ मुझे कुछ किया तो में तो साफ़ मना करडुंगा की इनदोनो को जो करना हैं करो मैं इनलोगो के साथ नहीं हूँ। तुम तुम्हारी जनो। क्योंकि में यहाँ हस्पताल बनांने आया हूँ। हुजे कोई डर नहीं हैं। अब तुम दोनों कुत्ते की मौत मरोगे और मैं आराम से कभी भी मौका देख कर भाग जाऊंगा और दुबई में तुम लोगो की मृत्यु का जस्न मनाऊंगा।
उदय और मजनू ने चुपचाप रहना ही पसंद किया क्योंकि सेठ को डॉ की जरुरत हैं इसलिए इस डॉ की बात में थोड़ी बहुत सच्चाई नज़र आई।
तीनो जब बैठक में पहुंच तो वहां पहले से चतुर्वेदीजी और पारुल के साथ कुछ गम्भीर बात करते नज़र आये।
डॉ घुंघरू सीधे चतुर्वेदीजी के पास जाकर बैठ गया और कहने लगा ... नमस्कार सेठजी .. आज ये दोनों तो भाग ही जाते अगर मैं छुप कर इनदोनो का पीछा करके पकड़वाया और इनदोनो का यहाँ लाया। सालो को यही ख़त्म करदो। बहुत ज्यादा उछलते हैं। आज तो इनकी गंगाजी में अस्थि विषर्जित करवा ही दो। और मुझे दुबई से हसपताल के लिए नयी नयी मशीन लाने के लिए जाने दो। क्योंकि इनदोनो का मेरा कोई सम्बन्ध नहीं हैं।
उदय .. कोई कैसे सम्बन्ध नहीं हैं। मेरी बहन आपके बेटे को ब्याही हैं और मेरा भांनजा भी मेरी बहन से शादी करके गया हैं. .
मजनू .. भाई क्यों मुंह लगते हो इस बे पेंदे के लोटे से। जबभी कही भी फंसता हैं सीधे पाला पलट लेता हैं जाने दो न इसको।
उदय .. कैसे जाने दू। हमारा समधी जो हैं। हमारी दोनों प्यारी बहने इसके घर की दुल्हन बानी हैं।
डॉ घुंघरू .. वो तुम्हारी सगी बहने नहीं हैं इसलिए तुम लोगो से मेरा कोई सम्बन्ध भी नहीं हैं। चलो यहाँ से। तुम दोनों सोचते हो की सेठजी के साथ मैं जो हस्पताल बनारहा हूँ इसलिए तुम दोनों मुझसे रिस्ता रख कर यहाँ से छूट जाओगे। अगर इन्होने छोड़ भी दिया तो पारुल बेटी से कह कर तुम्हे अंदर करवा दूंगा।
चतुर्वेदीजी और पारुल जोर जोर से हसने लगे। डॉ घुंघरू भी बनावटी हसी के साथ हंसने लगा।
पारुल ने मजनू के पास आकर आँखे मिला कर बोली। ..... तुम दोनों में एक बात पक्की हैं खास कर इस मजनू में। साली रस्सी जल गयी मगर बल नहीं गए। ये यहाँ बाबाजी के साथ आकर हमलोगो को ठगने का प्लान किया। वो भी शादी के साथ।
उदय .. देखो हम दोनों के पास भगवान् का दिया सब कुछ हैं धन हैं दौलत हैं इज्जत भी हैं मगर हमलोगो की शक्ल के कारण हमारी कितनी बार तो शादी के मंडप से लड़की भाग गयी इसलिए मैंने जब हिन्दुस्तान में हर एरे गेरे बाबा के साथ लड़कियों देखि तो लगा की यहाँ तो कोई तो मिलेगी जिससे हम शादी करके वापस दुबई आ जायेंगे उस लड़की के साथ। मगर यहाँ तो कुछ और ही कहानी चल पड़ी।
पारुल .. ये देखो। . दूल्हा। . अबे तेरी बेटी की बेटी भी शादी के लायक हो गयी होती अगर तुम लोगो की समय पर शादी होटी तो। बनने चले दूल्हे। और ये मजनू ,,, नाम से ही लगता हैं कोई मजनू टाइप का आशिक होगा मगर ये तो अब लैला मजनू के टाइम का मजनू हैं जो लैला तो मर गयी और अपने इस मजनू को छोड़ गयी।
चले हैं शादी करने। कितना माल लेकर आये हो और अब कितना हो गया ये बताओ
उदय .. क्या लेकर आये अकेली जान ही तो हैं और वही आप ले लो। बचा क्या हैं हमारे पास। सब कुछ वही छोड़ भागे थे ,
मजनू . भाई अब कुछ पैसे बचे हैं वो भी दे दो क्योंकि अपना यहाँ कोई सुनाने वाला नहीं हैं।
पारुल .. वाह रे मेरे मजनू वाह .. क्या बात कही हैं थोड़े बहुत . अबे होटल से सारा सामान मेने यहाँ मंगवाया हैं उसमे से करीब १० करोड़ रूपये निकले हैं वो क्या किसी आश्रम के लिए छोड़ कर जाना चाहते हो।
उदय। . आप वो सब रख लीजिए हमे सिर्फ दुबई टिकट करवा दे बस। हम आराम से अपने घर पहुंच जाये।
खाली हाथ आये हैं और खाली हाथ जाना चाहते हैं और जब आपको पैसे मिलगये तो आप हमे यहाँ क्यों पकड़ कर लए।
डॉ घुंघरू .. कौनसा घर। तुम लोगो का कोई घरबार तो हैं नहीं। यहाँ वहां कही भी भटकते रहते हो।
पारुल .. ज्ञानी बाबाजी। . अभी तक आपका बाबाजी का भूत उतरा नहीं हैं क्या , कहो तो उतार दू एक झटके में। उदय .. अब जो करना हैं कर दीजिये।
चतुर्वेदीजी जोर जोर से हँसते हुए बोले .. तुम तीनो में सिर्फ एक जना ही बच सकता हैं और वो हैं
डॉ घुंघरू। . हा वो मैं हूँ। मुझे पता था की सेठजी अपना हस्पताल बनाएंगे तो मेरे कारण ही ..
चतुर्वेदीजी ... नहीं डॉ। वो तुम नहीं हो। वो केवल मजनू हैं।
डॉ घुंघरू .. क्या बात करते हैं सेठ जी ये मजनू ये मजनू। . आप अभी भी पारुल की शादी के कारण इसको बचा रहे हैं।
पारुल। . अबे अंकल .. थोड़ा सा तो अक्ल काम में लो .. मैं इस बूढ़े मजनू से शादी नहीं कर सकती। ये रिटायर होने की दहलीज़ पर खड़ा हैं और आप हे की मुझे फ़साने में लगे हैं। इसने पापा की जान बचायी ये जानते हुए भी की अगर पापा बच गए तो इसको मार डालेंगे फिर भी इसने जान बचायी।
मजनू .. थैंक्यू सेठजी थैंक्यू .. मगर सेठजी अगर आप छोड़ ही रहे हैं तो उदय भाई को भी छोड़ दीजिये।
उदय .. नहीं नहीं मजनू। तू चला जा। आज तुजे नयी ज़िन्दगी मिल रही हैं। . तू चला जा।
पारुल ..ओए सन १८५७ की पैदाइशों आज तुम दोनों कोछोड रहे हैं जाओ आज से आप लोग आज़ाद हैं मगर तुम्हारा पैसा तुम्हे नहीं मिलेगा।
उदय। . जान हैं तो जहाँन हैं। हम दुबई जा कर वापस पैसा बना लेंगे।
डॉ घुंघरू .. बना लेंगे का क्या मतलब। बिना अपनों के कोई कुछ कर सकता हैं क्या। मैं तुम्हारा एकमात्र रिस्तेदार हु वहां। इसलिए चलो तीनो आज ही दुबई निकल पड़ते हैं।
उदय। . क्यों समधीजी आज भी कुछ ज्यादा ऊचे स्वर में बोल रहे थे हमारा क्या रिश्ता। और अब
मजनू .. मेने कहा था ना की ये डॉ बिन पेंदे का लौटा हैं। अब इसको हमारी रिश्तेदारी याद आई और इतनी देर ये हमे मरवाने का काम कर रहा था , क्यों डॉ आज कुछ ज्यादा घुंघरू बजा रहे थे।
डॉ घुंघरू। . वो क्या आज सुबह केले खाये थे इसलिए बार बार जुबान फिसल रही थी।
चतुर्वेदीजी .. उदय बाबाजी मतलब उदय जी आप सभी वापस जाये क्योकि आप लोग भाईलोग जरूर हैं मगर आपलोगो में प्यार भी बहुत हैं आपस में इसलिए आप लोग आराम से अपने घर दुबई जाये और जो आपका पैसा हैं वो हम रख लेते हैं .. और डॉ घुंघरू जी आप यहाँ आते रहना क्योकि आपको यहाँ उन्ही पैसो से हस्पताल खोलना हैं।
पारुल। . और हाँ एक बात और इस बार जब आप लोग भारत आये तो ये गंदे विचार मत लाना की आया लड़कियां ऐसे ही हाथ आ जाती हैं। कोई विधवा आश्रम में किसी बूढी औरते होगी जो अब भी अपना घर बसाने की सोच रही होगी तो आपदोनों के लिए फोटो भेज दूंगी और उन्हें भी आपकी पहले फोटो दिखा कर आपके रिटायरमेंट की खबर दे दूंगी क्यों मजनू ... भाई
उदय .. मजनू चलो यहाँ से।
इस तरह से तीनो वापस दुबई के लिए निकल पड़े। और फिर अपनी इंपोर्टेड वाइफ की तलाश में।
जय हिन्द। . . . . . . . . . . . .
No comments:
Post a Comment