छोटी छोटी कहानियाँ 1
हकीकत एक वारिश की
बहुत पुरानी तो नहीं मगर कुछ नयी भी नहीं हैं। जामगढ़ के ठाकुर साब के यहाँ आज ख़ुशी का दिन हैं। ठाकुर साब की बीबी को खुशखबरी हैं मतलब उन्हें माँ बनने का सौभाग्य प्राप्त होने वाला हैं कुछ की महीनों बाद।
ठाकुर साब बहुत खुश हैं। ठाकुर साब खुद अपनी बीबी की देख भाल का जिम्मा ले रखा हैं और सबसे कह दिया हैं की कोई भी उनकी आज्ञा के बगैर ठकुराईन को किसी भी प्रकार का खाना दवाई आदि नहीं दिया जाये। कुछ वैद भी नियुक्त कर रखे थे जो की चौबीसों घंटे ठकुराइन की देखभाल करते हैं। वैद की पत्निया भी महल भी रह रही थी। ठकुर साब अपनी बीबी के साथ एकांत में विराजमान थे। क्योकि किसी को भी उनके पास जाने की अनुमति नहीं थी
ठाकुर साब ... ठकुराइन बेटा ही होगा ना। . कंही हमारी तरह .....
ठकुराइन ... आप ऐसे न कहे .. इतनी बड़ी बात हमने दुनियां से छिपा रखी हैं तो अब आप बार बार उसको क्यों याद करके मुझे शर्मिंदा कर रहे हैं।
ठाकुर साब। .. नहीं नहीं आप का बलिदान मैं यो ही व्यर्थ नहीं जाने दूंगा।
ठकुराइन ... मेरा बलिदान कुछ नहीं हैं .. आप तो जन्म से अपना बलिदान देते आ रहे हैं। आज आप मुझे आपने जन्म से अब तक की बात बताये।
ठाकुर साब ... कुछ नहीं ठकुराइन .. हमारे पिताजी बहुत ही तेज़ दिमाग वाले और बहादुर व्यक्ति थे। सचमुच में वे परम वीर व्यक्ति थे। मगर एक ज्योतिषी ने कहा की आपके घर में आने वाले ५० साल तक कोई बेटा पैदा नहीं होगा। इसलिए आप का वंश यही समाप्त हो जायेगा। यदि आप चाहे तो किसी का बच्चा गोद ले सकते हैं।
पिताजी ने बच्चा गोद लेने की बात से नाराज़ हुए और उन्होंने कहा की ये मेरी शान के खिलाफ हैं इसलिए मैं खुद बेटा पैदा करूँगा और वो भी अपनी धर्मपत्नी से। कुछ समय बाद पिताजी को बेटी के रूप में रूपमाला बहन की प्राप्ति हुयी . फिर जयमाला। उसके बाद हमारे पिताजी काफी उदास रहने लगे। एक दिन उन्होंने देखा की जयमाला जब थोड़ी बड़ी हुयी थी तो वो अपने आप को लड़का की मानती थी। कुछ भी कहो उसका जवाब लड़का बनकर ही देती थी तब माताजी ने उनसे विनती की आप इसको लड़की की तरह रखे वरना
जब लड़की बड़ी होगी तब ये दिक्कत कुछ बढ़ जाएगी। पिताजी ने उसी समय सोच लिया की एक बेटा जरूर होगा। थोड़े समय बाद माताजी फिर से माँ बनने को हुयी। पिताजी और माताजी ने इस महल में बच्चे का जन्म न देकर कही दूर पैदा करने की ठानी। दोनों दूर पहाड़ियों में जहां पिताजी को कोई नहीं जानता था वहा चले गए। जब हमारा जन्म हुआ तो माँ और पिताजी फिर दुखी हुए। माँ ने कहा की ये भी एक तरह से बेटा हैं। पिताजी बोल .. ये बेटा ही हैं। आज से इसको कुंवर साब से पुकारेंगे।
माँ मगर जब बड़ी होगी तब क्या कहोगे।
पिताजी .. तब तक मैं इसको ऐसा बना दूंगा की ये किसी लड़के से कम नहीं होगी मतलब ये हैं की होगा। ठकुराइन आपको इस कुंवर की कसम हैं आप मरते दम तक ये राज़ आप छुप कर रखेंगी।
पिताजी जब वापस महल में आये तो ऐलान किया की हमारे पुत्र रत्न पीड़ा हुआ हैं इसलिए पुरे शहर में जश्न मनाया जाये। ज्योतिाचार्य को बुलवाकर पिताजी ने अपनी ये खुशखबरी सुनाई और उन्हें हीरो जेवरातों से भर दिया। मगर ज्योतिाचार्य इस बात से कतई स्वीकार नहीं कर पा रहे थे की उनके यहाँ पुत्र हो सकता हैं। मगर इतनी सारी स्वर्ण मुद्रा देख कर वो चुप रहे। थोड़े समय बाद हम बीमार हो गए। दूर परदेश से एक वैद को बुलाया जिसने हमारा इलाज किया और उसी समय वो चला गया। पिताजी ने सभी दासियों और दासो को कहदिया की कुंवर साब को कोई भी नहीं छुएगा और नहीं कोई साइड कमरे में जायेगा। कुंवर साब की वेशभूषा
भी अलग तरह की बनायीं जाये जिससे कुंवर साब फिर से बीमार ना हो पाए। पिताजी ने माताजी की खास दासी लीला को मेरी देखभाल का जिम्मा सौंपा। लाली ने माँ की तरह मेरी देखभाल की जब तक मैं १५ साल का न हो गया। धीरे धीरे मेरी परवरिश लड़के की तरह हुयी। दोनों बहने शादी के बाद ससुराल चली गयी। पिताजी का जब देहांत हुआ तब सबसे ज्यादा मुश्किलें खड़ी हुए। ।अंतिम संस्कार के समय जब नंगे बदन होना था तो माँ ने बिमारी का बहाना करके हुजे इस तरह कपडे पहनाए की मैं कही भी लड़की नज़र नहीं आया। बाल मुंडन भी करवा लिया। पिताजी की सख्त हिदायत थी की मैं कभी भी लड़की की तरह नज़र न आउ। इसलिए हमेशा एक लड़ाकू लड़के की तरह रहा। समय के साथ बहनों ने जब माँ से शादी की बात की तो तीनो में बहस होने लगी तब मैंने माँ की आज्ञा का पालन करते हुए आपसे शादी की और शादी के कुछ समय तक आपसे दूर रहा। आप भी हम पर शक करते हुए काफी बार झगड़ा किया, गुस्सा हुए मगर जब सच्चाई सामने आये तब आपने हमे काबुल किया। माताजी के देहांत के बाद आप हमेशा हमारे साथ रही। आज आपने हमारे लिए अपने आपको पूरा समर्पित कर दिया और हमारे कहने पर आप किसी और से माँ बनने को तैयार भी हो गयी। ये आपका त्याग कभी नहीं भुलाए भुला जा सकता हैं।
ठकुराइन .. आपने आज तक अपने पिताजी के कारन लड़की से लड़का बने रहे , मुझसे शादी भी की तो क्या मैं आपके लिए इतना भी नहीं कर सकती और आप ये दूसरों से माँ बनी ऐसा न कहे। . ये आपका ही हैं और हमेशा रहेगा। क्योकि आपने जिस तरीके से किसी पराये मर्द को हमे छूने दिया वो न तो स्वयं जानता हैं और न ही हम जान सके की वो कौन था इसलिए आप आज के बाद कभी भी नाम न ले।
ठाकुर साब जो की एक लड़की थे मगर हावभाव से अपने आप को लड़का साबित करते रहे। चाहे केसा भी समय आया। हर मुश्किल से लड़ते हुए आज पुरे गॉव में धाक जमा राखी हैं। अपनी पत्नी को किसी तरह समझा बजा कर माँ बनने को तैयार किया तो उन्हें उस व्यक्ति की तलाश हुयी जो ये काम तो कर दे मगर यहाँ से दूर चला जाये। ज्ञानी होने के साथ वो बलवान बहादुर भी हो। इस सोच के साथ जब परदेश से एक बहुत बड़ा व्यापारी अपने बेटे के साथ आया। उसके बेटे की उम्र करीब २५-२७ साल होने के साथ वो सुन्दर ज्ञानी और बलवान भी लग रहा था। कुंवर साब ने उन्हें ख़ास कमरे में सुलवाया साथ ही उन्हें मदहोश करने वाली मदिरा का भी सेवन करवाया। ये बात सिर्फ कुंवर साब को ही मालूम थी। वो खुद ख़ास थे इसलिए उनकी आज्ञा के बिना कोई भी ख़ास महल में नहीं आ जा सकता था। अपनी पत्नी को भी मदहोश करने की मदिरा पिलाने के साथ जब सभी झूमने लगे तब उनदोनो का मिलन करवाया। सुबह तड़के ठकुराइन को वापस अपने कमरे भी खुद ही छोड़ आये और उस व्यापारी के बेटे को भी इस प्रकार बतलाया की आपने एक दासी के साथ गलत हरकत करने की कोशिश की इसलिए आप चुप चाप यहाँ से निकल जाये वरना हंगामा होने के बाद हम आप को अपराधी मान कर सज़ा सुना देंगे जो की आपकी छवि के अनुरुप नहीं होगा व्यापारी और उसका बेटा कथकुर साब से बोले की हम ऐसा नहीं कर सकते हैं , कही आप हमे लुटने के कारन ऐसा तो नहीं बोल रहे हैं। ठाकुर साब बोले। . आप उम्र में बड़े हैं और हमारे मेहमान भी हैं इसलिए आप को हम अच्छे घराने का जान कर ही जाने को कह रहे हैं। काफी बहस के बाद जब व्यापारी को पता चला की शायद हमें और ठाकुर साब को गलत फहमी हो गयी हैं तो उन्होंने चुपचाप निकलना ही बेहतर समझा। इस प्रकार ठाकुर साब का काम भी बन गया ,
महल में खुशिया ही खुशियां हो रही थी। ठाकुर साब ज्योतिषाचार्य जी बात को सही मानने लगे की पिताजी के वंश यानि हमारी परिवार पुत्र नहीं हो सकता मगर इसको झूठा बतलाने के लिए पिताजी ने जो कदम उठाया उसे आज मैं पूरा करने जा रहा हु। ये सही हैं की पिताजी का वंश नहीं होगा मगर ये बात सिर्फ में और ठकुराइन ही जानते हैं।
कुछ समय के बाद ठाकुर साब के घर में पुत्र पैदा हुआ। मगर जन्म देते ही ठकुराइन चल बसी। जब ठकुराइन का अंतिम संस्कार किया जाया और जो रस्मे पूरी की गए उससे ठाकुर साब घबरा गए। कही मेरी बात सभी को पता चली तो मेरे साथ मेरे बेटे को भी कोई नहीं अपनाएगा। उन्होंने प्रण किया की जैसे ही छोटे कुंवर साब १० बरस के होंगे मैं संन्यास लेकर चला जाऊंगा। कही दूर जहां कोई न पहचाने और गुमनाम ज़िन्दगी जी लुंगी। तब पूर्ण स्त्री बनकर अपना शरीर का त्याग करुँगी। कुंवर साब ने ऐसा ही किया उन्होंने अपने पुत्र को भी ये भनक नहीं लगने दी की वो कौन हैं।
हकीकत एक वारिश की
बहुत पुरानी तो नहीं मगर कुछ नयी भी नहीं हैं। जामगढ़ के ठाकुर साब के यहाँ आज ख़ुशी का दिन हैं। ठाकुर साब की बीबी को खुशखबरी हैं मतलब उन्हें माँ बनने का सौभाग्य प्राप्त होने वाला हैं कुछ की महीनों बाद।
ठाकुर साब बहुत खुश हैं। ठाकुर साब खुद अपनी बीबी की देख भाल का जिम्मा ले रखा हैं और सबसे कह दिया हैं की कोई भी उनकी आज्ञा के बगैर ठकुराईन को किसी भी प्रकार का खाना दवाई आदि नहीं दिया जाये। कुछ वैद भी नियुक्त कर रखे थे जो की चौबीसों घंटे ठकुराइन की देखभाल करते हैं। वैद की पत्निया भी महल भी रह रही थी। ठकुर साब अपनी बीबी के साथ एकांत में विराजमान थे। क्योकि किसी को भी उनके पास जाने की अनुमति नहीं थी
ठाकुर साब ... ठकुराइन बेटा ही होगा ना। . कंही हमारी तरह .....
ठकुराइन ... आप ऐसे न कहे .. इतनी बड़ी बात हमने दुनियां से छिपा रखी हैं तो अब आप बार बार उसको क्यों याद करके मुझे शर्मिंदा कर रहे हैं।
ठाकुर साब। .. नहीं नहीं आप का बलिदान मैं यो ही व्यर्थ नहीं जाने दूंगा।
ठकुराइन ... मेरा बलिदान कुछ नहीं हैं .. आप तो जन्म से अपना बलिदान देते आ रहे हैं। आज आप मुझे आपने जन्म से अब तक की बात बताये।
ठाकुर साब ... कुछ नहीं ठकुराइन .. हमारे पिताजी बहुत ही तेज़ दिमाग वाले और बहादुर व्यक्ति थे। सचमुच में वे परम वीर व्यक्ति थे। मगर एक ज्योतिषी ने कहा की आपके घर में आने वाले ५० साल तक कोई बेटा पैदा नहीं होगा। इसलिए आप का वंश यही समाप्त हो जायेगा। यदि आप चाहे तो किसी का बच्चा गोद ले सकते हैं।
पिताजी ने बच्चा गोद लेने की बात से नाराज़ हुए और उन्होंने कहा की ये मेरी शान के खिलाफ हैं इसलिए मैं खुद बेटा पैदा करूँगा और वो भी अपनी धर्मपत्नी से। कुछ समय बाद पिताजी को बेटी के रूप में रूपमाला बहन की प्राप्ति हुयी . फिर जयमाला। उसके बाद हमारे पिताजी काफी उदास रहने लगे। एक दिन उन्होंने देखा की जयमाला जब थोड़ी बड़ी हुयी थी तो वो अपने आप को लड़का की मानती थी। कुछ भी कहो उसका जवाब लड़का बनकर ही देती थी तब माताजी ने उनसे विनती की आप इसको लड़की की तरह रखे वरना
जब लड़की बड़ी होगी तब ये दिक्कत कुछ बढ़ जाएगी। पिताजी ने उसी समय सोच लिया की एक बेटा जरूर होगा। थोड़े समय बाद माताजी फिर से माँ बनने को हुयी। पिताजी और माताजी ने इस महल में बच्चे का जन्म न देकर कही दूर पैदा करने की ठानी। दोनों दूर पहाड़ियों में जहां पिताजी को कोई नहीं जानता था वहा चले गए। जब हमारा जन्म हुआ तो माँ और पिताजी फिर दुखी हुए। माँ ने कहा की ये भी एक तरह से बेटा हैं। पिताजी बोल .. ये बेटा ही हैं। आज से इसको कुंवर साब से पुकारेंगे।
माँ मगर जब बड़ी होगी तब क्या कहोगे।
पिताजी .. तब तक मैं इसको ऐसा बना दूंगा की ये किसी लड़के से कम नहीं होगी मतलब ये हैं की होगा। ठकुराइन आपको इस कुंवर की कसम हैं आप मरते दम तक ये राज़ आप छुप कर रखेंगी।
पिताजी जब वापस महल में आये तो ऐलान किया की हमारे पुत्र रत्न पीड़ा हुआ हैं इसलिए पुरे शहर में जश्न मनाया जाये। ज्योतिाचार्य को बुलवाकर पिताजी ने अपनी ये खुशखबरी सुनाई और उन्हें हीरो जेवरातों से भर दिया। मगर ज्योतिाचार्य इस बात से कतई स्वीकार नहीं कर पा रहे थे की उनके यहाँ पुत्र हो सकता हैं। मगर इतनी सारी स्वर्ण मुद्रा देख कर वो चुप रहे। थोड़े समय बाद हम बीमार हो गए। दूर परदेश से एक वैद को बुलाया जिसने हमारा इलाज किया और उसी समय वो चला गया। पिताजी ने सभी दासियों और दासो को कहदिया की कुंवर साब को कोई भी नहीं छुएगा और नहीं कोई साइड कमरे में जायेगा। कुंवर साब की वेशभूषा
भी अलग तरह की बनायीं जाये जिससे कुंवर साब फिर से बीमार ना हो पाए। पिताजी ने माताजी की खास दासी लीला को मेरी देखभाल का जिम्मा सौंपा। लाली ने माँ की तरह मेरी देखभाल की जब तक मैं १५ साल का न हो गया। धीरे धीरे मेरी परवरिश लड़के की तरह हुयी। दोनों बहने शादी के बाद ससुराल चली गयी। पिताजी का जब देहांत हुआ तब सबसे ज्यादा मुश्किलें खड़ी हुए। ।अंतिम संस्कार के समय जब नंगे बदन होना था तो माँ ने बिमारी का बहाना करके हुजे इस तरह कपडे पहनाए की मैं कही भी लड़की नज़र नहीं आया। बाल मुंडन भी करवा लिया। पिताजी की सख्त हिदायत थी की मैं कभी भी लड़की की तरह नज़र न आउ। इसलिए हमेशा एक लड़ाकू लड़के की तरह रहा। समय के साथ बहनों ने जब माँ से शादी की बात की तो तीनो में बहस होने लगी तब मैंने माँ की आज्ञा का पालन करते हुए आपसे शादी की और शादी के कुछ समय तक आपसे दूर रहा। आप भी हम पर शक करते हुए काफी बार झगड़ा किया, गुस्सा हुए मगर जब सच्चाई सामने आये तब आपने हमे काबुल किया। माताजी के देहांत के बाद आप हमेशा हमारे साथ रही। आज आपने हमारे लिए अपने आपको पूरा समर्पित कर दिया और हमारे कहने पर आप किसी और से माँ बनने को तैयार भी हो गयी। ये आपका त्याग कभी नहीं भुलाए भुला जा सकता हैं।
ठकुराइन .. आपने आज तक अपने पिताजी के कारन लड़की से लड़का बने रहे , मुझसे शादी भी की तो क्या मैं आपके लिए इतना भी नहीं कर सकती और आप ये दूसरों से माँ बनी ऐसा न कहे। . ये आपका ही हैं और हमेशा रहेगा। क्योकि आपने जिस तरीके से किसी पराये मर्द को हमे छूने दिया वो न तो स्वयं जानता हैं और न ही हम जान सके की वो कौन था इसलिए आप आज के बाद कभी भी नाम न ले।
ठाकुर साब जो की एक लड़की थे मगर हावभाव से अपने आप को लड़का साबित करते रहे। चाहे केसा भी समय आया। हर मुश्किल से लड़ते हुए आज पुरे गॉव में धाक जमा राखी हैं। अपनी पत्नी को किसी तरह समझा बजा कर माँ बनने को तैयार किया तो उन्हें उस व्यक्ति की तलाश हुयी जो ये काम तो कर दे मगर यहाँ से दूर चला जाये। ज्ञानी होने के साथ वो बलवान बहादुर भी हो। इस सोच के साथ जब परदेश से एक बहुत बड़ा व्यापारी अपने बेटे के साथ आया। उसके बेटे की उम्र करीब २५-२७ साल होने के साथ वो सुन्दर ज्ञानी और बलवान भी लग रहा था। कुंवर साब ने उन्हें ख़ास कमरे में सुलवाया साथ ही उन्हें मदहोश करने वाली मदिरा का भी सेवन करवाया। ये बात सिर्फ कुंवर साब को ही मालूम थी। वो खुद ख़ास थे इसलिए उनकी आज्ञा के बिना कोई भी ख़ास महल में नहीं आ जा सकता था। अपनी पत्नी को भी मदहोश करने की मदिरा पिलाने के साथ जब सभी झूमने लगे तब उनदोनो का मिलन करवाया। सुबह तड़के ठकुराइन को वापस अपने कमरे भी खुद ही छोड़ आये और उस व्यापारी के बेटे को भी इस प्रकार बतलाया की आपने एक दासी के साथ गलत हरकत करने की कोशिश की इसलिए आप चुप चाप यहाँ से निकल जाये वरना हंगामा होने के बाद हम आप को अपराधी मान कर सज़ा सुना देंगे जो की आपकी छवि के अनुरुप नहीं होगा व्यापारी और उसका बेटा कथकुर साब से बोले की हम ऐसा नहीं कर सकते हैं , कही आप हमे लुटने के कारन ऐसा तो नहीं बोल रहे हैं। ठाकुर साब बोले। . आप उम्र में बड़े हैं और हमारे मेहमान भी हैं इसलिए आप को हम अच्छे घराने का जान कर ही जाने को कह रहे हैं। काफी बहस के बाद जब व्यापारी को पता चला की शायद हमें और ठाकुर साब को गलत फहमी हो गयी हैं तो उन्होंने चुपचाप निकलना ही बेहतर समझा। इस प्रकार ठाकुर साब का काम भी बन गया ,
महल में खुशिया ही खुशियां हो रही थी। ठाकुर साब ज्योतिषाचार्य जी बात को सही मानने लगे की पिताजी के वंश यानि हमारी परिवार पुत्र नहीं हो सकता मगर इसको झूठा बतलाने के लिए पिताजी ने जो कदम उठाया उसे आज मैं पूरा करने जा रहा हु। ये सही हैं की पिताजी का वंश नहीं होगा मगर ये बात सिर्फ में और ठकुराइन ही जानते हैं।
कुछ समय के बाद ठाकुर साब के घर में पुत्र पैदा हुआ। मगर जन्म देते ही ठकुराइन चल बसी। जब ठकुराइन का अंतिम संस्कार किया जाया और जो रस्मे पूरी की गए उससे ठाकुर साब घबरा गए। कही मेरी बात सभी को पता चली तो मेरे साथ मेरे बेटे को भी कोई नहीं अपनाएगा। उन्होंने प्रण किया की जैसे ही छोटे कुंवर साब १० बरस के होंगे मैं संन्यास लेकर चला जाऊंगा। कही दूर जहां कोई न पहचाने और गुमनाम ज़िन्दगी जी लुंगी। तब पूर्ण स्त्री बनकर अपना शरीर का त्याग करुँगी। कुंवर साब ने ऐसा ही किया उन्होंने अपने पुत्र को भी ये भनक नहीं लगने दी की वो कौन हैं।
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