छोटी छोटी कहानियां ----- नादान देशभक्त
बात सन् १९२० की हैं। कान्हु अभी सिर्फ १४ बरस का था मगर उसके चाचाजी रूपमल जो की करीब ३५ साल के हैं अपने गॉव में देशभक्ति के लिए कुछ न कुछ करते रहते हैं। जब भी कोई स्वतंत्र सेनानी उनके गॉव आता तो रूपमल उनके लिए अपनी पूरी ताकत लगा देता। खाना पीना रहना और उन्हें छुपाना सभी काम उन्हें के जिम्मे था। रूपमल अपने भतीजे को भी धीरे धीरे ऐसा ही बनाना चाहता था। शुरू शुरू में कान्हु को थोड़ा अजीब लगता था मगर अब वो इसको केवल काम करने के हिसाब से ही यह काम करता था क्योकि उसको इस काम का उद्देश्य क्या हैं इससे मतलब नहीं बस काम में हाथ बटाना ही हैं। यही उसका लक्ष्य हैं। भारतमाता की जय बोलते काम करना हैं। इससे ऊर्जा मिलती हैं ये उसके चाचाजी ने बताया था। एक दिन कुछ स्वतन्त्रता सेनानी जलियावाला बाग़ का बदला लेने के लिए कुछ बारूद और हथियार लेकर उनके गॉव आये। रूपमल ने उन्हें अलग अलग जगह पर छिपाया। वो करीब १०-११ लोग थे जिसमे दो लड़कियां भी थी जिनकी उम्र करीब २५-२६ साल थी। उन लड़कियों को रूपमल ने अपने घर में रखा बाकि सभी को यहाँ वहां रिस्तेदारों आदि के घरों में ठहरा दिया। आधी रात को कुछ अंग्रेज सैनिकों के साथ आये और सभी घरों की तलाशी शुरू कर दी। रूपमल ने सभी को इस तरह से ठहरवाया की सब तरह की तलाशी के बाद भी उन्हें कुछ नहीं मिला। क्योकि रूपमल ने जिन तीन लड़को को गॉव के साहुकार के घर रुकवाया वहां से जब सैनिक लड़को को पकड़ कर लायी तो रूपमल ने उन्हें कहा की ये साहुकार चोर हैं , इसको भी को पकड़ कर ले जाओ और ये साहुकार इस गॉव में दादागिरी भी करता हैं इसके घर में कोई शरीफ आदमी रह ही नहीं सकता और ये लड़के भी ऐसे ही दीखते हैं। साहुकार ने भी रूपमल को गाली देनी शुरू कर दी। दोनों आपस में लड़ाई करने लगे। पूरा गॉव एकदूसरे के ऊपर लांछन लगाने लगे। जो लड़के बाहर से आये वो भी उसी लड़ाई में शामिल हो गए औे रूपमल को भला बुरा कहने लगे। अंग्रेज और उनके सैनिक इस प्रकार फंस गए की उन्हें जिसको पकड़ने आये वो भूल कर गॉव के झगड़े को सुलझाने में व्यस्त हो गए। सभीको अपने अपने घर में जाने को कह कर सैनिक गॉव वालों को धमकाने लगे। रूपमल यही चाहते थे। गॉव वाले जब एकसाथ अपने अपने घर जाने लगे तब अंग्रेज सैनिक ने ध्यान दिया की शायद ये गॉव वालों की चाल हैं। इसलिए वो अपनी सैनिकों को लेकर वापस रवाना तो हुए मगर गॉव के बाहर जंगल में छुप कर स्वतन्त्रता सेनानियों का इंतज़ार \करना उचित समझा। भोर होने से पहले सभी स्वतन्त्रता सेनानी को गॉव छोड़ना था इसलिए वो सुबह जल्दी उठकर जब जाने को हुए तो दूध लेने के बहाने रूपमल ने गॉव की सीमा के पास छोड़ने का इरादा किया। अंग्रेज और उसके सैनिक घात लगाए पहले से ही बैठे थे। स्वतन्त्रता सेनानियों ने कुछ सामान रूपमल के कहने पर पास एक कुएं में छुप कर रख दिया क्योकि अगर पकडे भी गए तो सारे हथियार अंग्रेजों को नहीं मिलेगा। अंग्रेजों को कुछ सामान के साथ की पकड़े जायेंगे और हमारा काम भी हो जायेगा। जैसे ही गॉव की सीमा के पास सभी पहुंचे सैनिकों ने धावा बोल दिया। रूपमल ने गोलियों की आवाज़ सुन कर उसी दिशा में दौड़ने लगे। मगर तब तक अंग्रेजो ने करीब ८-९ जनो को मार डाला और दोनों लड़कियां बची उन्हें गॉव की ही समझ कर गॉव की तरफ बढ़ गए। रूपमल छुपते हुए दोनों स्वतन्त्रता सेनानियों जो की लड़कियां थी को वहां से ले आये। अंग्रेज और उनके सैनिक पुरे गॉव को घेर कर एक एक घर में ढूंढने लगे। शामू उसी गॉव का था मगर वो अंग्रेजो की मदद करके अपने आप को बहादुर साबित करके इनाम पाना चाहता था। वो था भी लालची। जब उसने रूपमल के घर से दोनोंलड़कियों को अंग्रेज पकड़ कर बाहर लाये तब शामू ने की बताया की ये दोनों इस गॉव की नहीं हैं। रूपमल से जब इनका रिस्ता पूछा तो कहा की ये दोनों कान्हु की मौसेरी बहने हैं और कान्हु को लेने के लिए शहर से आई हैं। कान्हु को जब डरा धमका कर पूछा तो उसने भी यही कहा। इधर शामू को रूपमल ने उसके बेटे को जान से मारने की धमकी देते हुए इशारा किया तो शामू कुछ पलटा। सभी सैनिक और अंग्रेज के जाने के बाद शामू ने रूपमल से माफ़ी मांगी और बोला की मुझसे गलती हो गयी। रूपमल ने कहा की अगर तूने ये सब बता देता तो तेरे बेटे के साथ तुजे भी इस गॉव में जिन्दा गाड़ देते। हम अपने देश के लिए अपने बच्चों की भी बलि दे सकते हे तो दूसरों की क्यों नहीं। रूपमल ने सिर्फ धमकाया था। मगर जब अंग्रेजो के सामने कान्हु को लेने की बात याद आई यो उसने कान्हु को उन लड़कियों के साथ शहर तक जाने को बोला। कान्हु कभी भी गॉव के बाहर नहीं गया हुआ था इसलिए डरने लगा। डर इसलिए और ज्यादा लगने लगा की अकेला घर से जाना वो भी लड़कियों के साथ , जिसके पीछे अंग्रेजी पुलिस पड़ी हुयी हैं। डर के मारे बुरा हाल हो रहा था।
चाचाजी ने थोड़ा बहुत हौशला बढ़ाया। तब जाकर वो जाने को राज़ी हुआ। दोनों लड़कियों के साथ बैलगाड़ी में
सारे हथियार वगेरा लेकर निकल पड़े। जैसेही गॉव के बाहर आये अंग्रेजों के सैनिकों ने घेर लिया। जब सैनिकों ने बन्दुके तानी तो कान्हु जोर जोर से रोने लगा। ये देख कर जो भारतीय सैनिक था वो उसको चुप करवाने लगा। कान्हु घबराया हुआ काँपने लगा। सैनिक ने पानी पिलाया और दिलाशा देते हुए चुप करने की कोशिश करने लगे। मगर कान्हु इतना ज्यादा घबरा गया की संभाले नहीं संभल रहा था। कान्हु को देख कर वो लड़कियां भी घबरा गयी। सभी को घबराते देख सैनिक ने छोड़ने का फैसला किया। उस सैनिक के अलावा कोई भी दया नहीं दिखा रहा था। कान्हु और उन लड़कियों के पास बन्दुके और कुछ हथगोले थे मगर वो सभी बैलगाड़ी के चक्कों के बीच में चारे में छुपा रखे थे। जिसपर किसी की नज़र नहीं गयी। अंग्रेज सैनिक ने उस हिंदुस्तानी सैनिक को साथ जाने का कह कर सभी को रवाना किया। सभी सैनिक फिर से गॉव की तरफ जाने लगे जहां उन्हें रूपमल को पकड़ना था। ये बात उस सैनिक ने बताई जो की कुछ दुरी तक उन्हें छोड़ने साथ आया।।।।।।।।।२...
बात सन् १९२० की हैं। कान्हु अभी सिर्फ १४ बरस का था मगर उसके चाचाजी रूपमल जो की करीब ३५ साल के हैं अपने गॉव में देशभक्ति के लिए कुछ न कुछ करते रहते हैं। जब भी कोई स्वतंत्र सेनानी उनके गॉव आता तो रूपमल उनके लिए अपनी पूरी ताकत लगा देता। खाना पीना रहना और उन्हें छुपाना सभी काम उन्हें के जिम्मे था। रूपमल अपने भतीजे को भी धीरे धीरे ऐसा ही बनाना चाहता था। शुरू शुरू में कान्हु को थोड़ा अजीब लगता था मगर अब वो इसको केवल काम करने के हिसाब से ही यह काम करता था क्योकि उसको इस काम का उद्देश्य क्या हैं इससे मतलब नहीं बस काम में हाथ बटाना ही हैं। यही उसका लक्ष्य हैं। भारतमाता की जय बोलते काम करना हैं। इससे ऊर्जा मिलती हैं ये उसके चाचाजी ने बताया था। एक दिन कुछ स्वतन्त्रता सेनानी जलियावाला बाग़ का बदला लेने के लिए कुछ बारूद और हथियार लेकर उनके गॉव आये। रूपमल ने उन्हें अलग अलग जगह पर छिपाया। वो करीब १०-११ लोग थे जिसमे दो लड़कियां भी थी जिनकी उम्र करीब २५-२६ साल थी। उन लड़कियों को रूपमल ने अपने घर में रखा बाकि सभी को यहाँ वहां रिस्तेदारों आदि के घरों में ठहरा दिया। आधी रात को कुछ अंग्रेज सैनिकों के साथ आये और सभी घरों की तलाशी शुरू कर दी। रूपमल ने सभी को इस तरह से ठहरवाया की सब तरह की तलाशी के बाद भी उन्हें कुछ नहीं मिला। क्योकि रूपमल ने जिन तीन लड़को को गॉव के साहुकार के घर रुकवाया वहां से जब सैनिक लड़को को पकड़ कर लायी तो रूपमल ने उन्हें कहा की ये साहुकार चोर हैं , इसको भी को पकड़ कर ले जाओ और ये साहुकार इस गॉव में दादागिरी भी करता हैं इसके घर में कोई शरीफ आदमी रह ही नहीं सकता और ये लड़के भी ऐसे ही दीखते हैं। साहुकार ने भी रूपमल को गाली देनी शुरू कर दी। दोनों आपस में लड़ाई करने लगे। पूरा गॉव एकदूसरे के ऊपर लांछन लगाने लगे। जो लड़के बाहर से आये वो भी उसी लड़ाई में शामिल हो गए औे रूपमल को भला बुरा कहने लगे। अंग्रेज और उनके सैनिक इस प्रकार फंस गए की उन्हें जिसको पकड़ने आये वो भूल कर गॉव के झगड़े को सुलझाने में व्यस्त हो गए। सभीको अपने अपने घर में जाने को कह कर सैनिक गॉव वालों को धमकाने लगे। रूपमल यही चाहते थे। गॉव वाले जब एकसाथ अपने अपने घर जाने लगे तब अंग्रेज सैनिक ने ध्यान दिया की शायद ये गॉव वालों की चाल हैं। इसलिए वो अपनी सैनिकों को लेकर वापस रवाना तो हुए मगर गॉव के बाहर जंगल में छुप कर स्वतन्त्रता सेनानियों का इंतज़ार \करना उचित समझा। भोर होने से पहले सभी स्वतन्त्रता सेनानी को गॉव छोड़ना था इसलिए वो सुबह जल्दी उठकर जब जाने को हुए तो दूध लेने के बहाने रूपमल ने गॉव की सीमा के पास छोड़ने का इरादा किया। अंग्रेज और उसके सैनिक घात लगाए पहले से ही बैठे थे। स्वतन्त्रता सेनानियों ने कुछ सामान रूपमल के कहने पर पास एक कुएं में छुप कर रख दिया क्योकि अगर पकडे भी गए तो सारे हथियार अंग्रेजों को नहीं मिलेगा। अंग्रेजों को कुछ सामान के साथ की पकड़े जायेंगे और हमारा काम भी हो जायेगा। जैसे ही गॉव की सीमा के पास सभी पहुंचे सैनिकों ने धावा बोल दिया। रूपमल ने गोलियों की आवाज़ सुन कर उसी दिशा में दौड़ने लगे। मगर तब तक अंग्रेजो ने करीब ८-९ जनो को मार डाला और दोनों लड़कियां बची उन्हें गॉव की ही समझ कर गॉव की तरफ बढ़ गए। रूपमल छुपते हुए दोनों स्वतन्त्रता सेनानियों जो की लड़कियां थी को वहां से ले आये। अंग्रेज और उनके सैनिक पुरे गॉव को घेर कर एक एक घर में ढूंढने लगे। शामू उसी गॉव का था मगर वो अंग्रेजो की मदद करके अपने आप को बहादुर साबित करके इनाम पाना चाहता था। वो था भी लालची। जब उसने रूपमल के घर से दोनोंलड़कियों को अंग्रेज पकड़ कर बाहर लाये तब शामू ने की बताया की ये दोनों इस गॉव की नहीं हैं। रूपमल से जब इनका रिस्ता पूछा तो कहा की ये दोनों कान्हु की मौसेरी बहने हैं और कान्हु को लेने के लिए शहर से आई हैं। कान्हु को जब डरा धमका कर पूछा तो उसने भी यही कहा। इधर शामू को रूपमल ने उसके बेटे को जान से मारने की धमकी देते हुए इशारा किया तो शामू कुछ पलटा। सभी सैनिक और अंग्रेज के जाने के बाद शामू ने रूपमल से माफ़ी मांगी और बोला की मुझसे गलती हो गयी। रूपमल ने कहा की अगर तूने ये सब बता देता तो तेरे बेटे के साथ तुजे भी इस गॉव में जिन्दा गाड़ देते। हम अपने देश के लिए अपने बच्चों की भी बलि दे सकते हे तो दूसरों की क्यों नहीं। रूपमल ने सिर्फ धमकाया था। मगर जब अंग्रेजो के सामने कान्हु को लेने की बात याद आई यो उसने कान्हु को उन लड़कियों के साथ शहर तक जाने को बोला। कान्हु कभी भी गॉव के बाहर नहीं गया हुआ था इसलिए डरने लगा। डर इसलिए और ज्यादा लगने लगा की अकेला घर से जाना वो भी लड़कियों के साथ , जिसके पीछे अंग्रेजी पुलिस पड़ी हुयी हैं। डर के मारे बुरा हाल हो रहा था।
चाचाजी ने थोड़ा बहुत हौशला बढ़ाया। तब जाकर वो जाने को राज़ी हुआ। दोनों लड़कियों के साथ बैलगाड़ी में
सारे हथियार वगेरा लेकर निकल पड़े। जैसेही गॉव के बाहर आये अंग्रेजों के सैनिकों ने घेर लिया। जब सैनिकों ने बन्दुके तानी तो कान्हु जोर जोर से रोने लगा। ये देख कर जो भारतीय सैनिक था वो उसको चुप करवाने लगा। कान्हु घबराया हुआ काँपने लगा। सैनिक ने पानी पिलाया और दिलाशा देते हुए चुप करने की कोशिश करने लगे। मगर कान्हु इतना ज्यादा घबरा गया की संभाले नहीं संभल रहा था। कान्हु को देख कर वो लड़कियां भी घबरा गयी। सभी को घबराते देख सैनिक ने छोड़ने का फैसला किया। उस सैनिक के अलावा कोई भी दया नहीं दिखा रहा था। कान्हु और उन लड़कियों के पास बन्दुके और कुछ हथगोले थे मगर वो सभी बैलगाड़ी के चक्कों के बीच में चारे में छुपा रखे थे। जिसपर किसी की नज़र नहीं गयी। अंग्रेज सैनिक ने उस हिंदुस्तानी सैनिक को साथ जाने का कह कर सभी को रवाना किया। सभी सैनिक फिर से गॉव की तरफ जाने लगे जहां उन्हें रूपमल को पकड़ना था। ये बात उस सैनिक ने बताई जो की कुछ दुरी तक उन्हें छोड़ने साथ आया।।।।।।।।।२...
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