Wednesday, 4 May 2016

छोटी छोटी कहानियां ४

छोटी छोटी कहानियां ४
अकेला क्यों ?
जीवनराम अपने कमरे में अकेले बैठा कुछ लिखने की कोशिश कर रहा था। क्या लिखू ये समझ नहीं आ रहा था। आज पहली बार उसे कुछ लिखने की चाहत हुयी।  मगर क्या लिखू किसपर लिखू।  क्योंकि लिखने को बहुत कुछ था मगर लिखने की लिए कुछ नहीं था। उसकी ज़िन्दगी भी ऐसी ही थी। आज शहर में अकेला अपने कमरे में समय को याद करते हुए अपनी कहानी लिखने की सोचने लगा ,मगर पेन था की कुछ लिखने को राज़ी नहीं था सोचन्ते सोचते अपनी पुरानी  यादों में खो गया।  अपने बड़े भाई और अपनी छोटी बहन के साथ स्कूल जाना और वापस मस्ती करते आना ये एक तरह का नियम था।  रोज़ स्कूल से आते वक्त अपने बड़े भाई का बैग और छोटी बहन का बैग उसे ही उठाना होता था।  बड़ा भाई रास्ते में अपने दोस्तों से मटरगस्ती करते लड़ाई लड़ते आता था इसलिए बड़े भाई ने अपना बैग जीवन को दे रखा था और छोटी बहन तो उसकी बहुत प्यारी थी उसको कोई तकलीफ न हो इसलिए आते जाते दोनों समय उसका बैग वही उठा कर चलता था। बड़े भाई साजन हमेशा कुछ न कुछ करते रहते थे लड़ाई झगड़ा दादा गिरी ये सब जीवन को कम पसंद था मगर बड़े भाई की मार से हमेशा चुप रहता था।  बड़ा होने के नाते बड़े भाई की हर बात को मानता था।  हर नयी चीज़ जो पापा लाते वो भले ही सबमे बराबर बाटी जाती मगर जीवन के हिस्से का सामान भी बड़ा भाई छीन लेता था।  उसकी छोटी बहन और माताजी ये सब जानती थी मगर हमेशा चुप रहती थी। बहन सीमा ये बड़े भाई के डर से और माताजी घर में सुख शांति के कारण चुप रहते थे इस कारण साजन हमेशा जिद करता रहता था।  पापा के सामने अत्यन्त भोला और मासूम बन कर अपने सभी काम करवा लेता था। नए कपडे खुद के लिए और जो पुराने या छोटे हो जाते वो जीवन को मिलते थे।  जीवन ये सब अभी से समझने तो लग गया मगर दूसरों की तरह वो भी चुप रहता था। धीरे धीरे सहन करने की उसकी क्षमता बढ़ती गयी और साजन की दादागिरी भी बढती गयी।  एक दिन मोहल्ले में लड़को की पास के मोहल्ले वालों से झगड़ा हो गया। घर के ज्यादातर काम जीवन को करने होते थे इसलिए वो घर का सामान लेने जैसे ही उस दूसरे मोहल्ले से गुजरा लड़कों ने घेर कर बुरी तरह से मारा।  भाग कर अपने भाई के आया और बताया की पास के मोहल्ले के लड़कों ने उसे बिनावजह पीटा।  साजन अपने साथियों के साथ जैसे ही घर से निकला सामने से पिताजी आ गए।  बड़े भाई ने जीवन के साथ जो हुआ बताया तो पिताजी ने जीवन को डांटा की तू ही गलत हैं , हमेशा झगड़ा करता रहता हैं कब तक तेरा ये भाई उनसे माफ़ी मांगता रहेगा और कब तक तू ऐसा ही गुंडा गर्दी करता रहेगा। इससे पहले कुछ बोल पाता बड़े भाई ने भी डांट लगा दी और झगडे को यही समाप्त करने को बोला। जीवन केवल सुनता रहा।  दूसरे दिन बड़े भाई साजन अपने यार दोस्तों को लेकर पास के मोहल्ले में मार पिट करने गए। झगड़ा बहुत बढ़ गया और कुछ गुंडे वहां कर हथियारों से सबको मरने लगे।  साजन के सिर में लोहे की छड़ से वार किया गया।  डर के मारे सभी दोस्त वहां से भाग गए। साजन सड़क पर गिर पड़ा।  गुंडे भी भाग गए।  कोई साजन को बचाने आगे नहीं आ रहा था।  खून भी काफी बाह गया। एक आदमी ने आकर साजन की माँ को सूचना दी की आपके बेटे को किसी ने सर पर जोर से मरने के कारण सर फट गया और सड़क पर गिरा पड़ा हैं  . उसकी माँ और दो तिन लोगो ने बड़ी मुश्किल से हस्पताल ले गए। पिताजी को भी सूचना दी गयी। वो भी अपनई दूकान बंद करके भागते हुए हस्पताल पहुंचे।
डॉक्टरों की काफी कोशिश के बाद साजन बच तो गया मगर उसकी हालात काफी ख़राब हो गयी।  डॉक्टर बोले की ये बच तो गए मगर चोट गहरी होने के कारण इनकी याददास्त और आँखे दोनों खो गयी हैं। ये अब २४ जानते निकलने के बाद पता चलेगा की और क्या क्या हरकते बंद हुयी हैं। दिन बीतते गए।  मगर साजन का बोलना देखना और समझाना सब बंद हो गया था। पिताजी ने जीवन को मारा पीटा और बहुत सी उलटी सीधी बात कही की उसकी हरकतों के कारण आज बड़ा भाई नहीं के बराबर हो गया , वो केवल ज़िंदा लाश की तरह रह गया।  जीवन की बात कोई नहीं सुन रहा था। अब उसके पिताजी और माताजी जीवन से नफरत करने लगे मगर बेटा होने के कारण उसको कुछ नहीं बोल पा रहे थे। जीवन भी एकेला सा हो गया।  सहन करना उसको पहले से आता था। धीरे धीरे घर में सभी जीवन से बात कम करने लगे। रिस्तेदार भी जीवन से दूर रहते थे।  सभी साजन के ठीक होने की दुआ करते थे ,बड़े भाई के ठीक की दुआ जीवन भी करता था।  छोटी बहन सब कुछ जानते हुए भी जीवन से कोई हमदर्दी नहीं रखती थी. जबकि जीवन अपनी बहन की सभी तरह का ख्याल रखता था।  पढ़ाई के लिए दूसरे शहर में दाखिला मिला था पिताजी ने बिना सोच समझे जीवन को भेज दिया।  उनके मन में अभी भी जीवन के लिए कोई जगह नहीं थी। वो जीवन से बहुत नफरत करते थे। दूसरे शहर में पिताजी ने एक कमरा दिलवाया और वापस अपने शहर चले गए। मनी आर्डर से पैसे आ जाते मगर घर आने को कभी भी नहीं कहते थे।  जीवन भी चुप रहना सिख गया। पढ़ाई में अव्वल नंबर से पास हुआ तो कोई ख़ुशी नहीं हुयी मां और पापा को।  उनकी साडी ख़ुशी बस साजन भइया की सेवा में ख़त्म हो गयी।  सीमा भी बड़ी हो गयी उसकी जब शादी तय हुयी तब घर से निमंत्रण पत्र जरूर आया। ख़ुशी के साथ आशु निकल पड़े की आज सभी ने इतना पराया कर दिया की छोटी की शादी में भी इस प्रकार बुलाया जा रहा हैं।  मगर दिमाग से तेज़ और शांति से काम करने वाला जीवन अपने दो ख़ास दोस्तों को साडी बात बता रखी थी।  जब उन्हें शादी की बात मालूम हुयी तो सभी ने शामिल होने की बात बताई। अजय और देव दो दोस्त और देव की बहन रूपा सभी ने शादी में शामिल होने का इरादा किया।  जीवन ने देव और अजय को बताया की पापा अकेले सारा काम कर रहे हैं और उसको कोई भी जिम्मेदारी नहीं देना चाहते बल्कि जीवन को सिर्फ आने को कहा हैं अगर हाथ बटाता हैं तो जीवन को आने की भी जरुरत नहीं हैं। देव ने इसकेलिए एक रास्ता निकाला की वो और अजय रूपा को लेकर चार पांच दिन पहले
उसके शहर जाते हैं और पापाजी के साथ हाथ बटाते हैं और जीवन के दोस्त न बन कर साजन के दोस्त बन कर जायेंगे।  इस तरह काम भी हो जायेगा और किसी को पता भी नहीं चलेगा। देव रूपा और अजय जब शहर पहुंचे तो जीवन पापा ने किससे और क्यों मिलने आये हो। जीवन ने अजय और देव को हर एक बात बता रखी थी इसलिए पिताजी को साजन के दोस्त होने का जल्दी विश्वाश करवा लिया।  अब वो बेहिचक वहां का काम सम्भाल रखा था। जीवन भी उनके साथ शहर तो आ गया मगर घर के आस पास नहीं गया।  रात को देर तक जब दोस्त आते तो होने साथ घर का खाना भी लाते जो की जीवन बड़े चाव से खाता क्योंकि वो उसकी माँ के हाथो से बनाया खाना हैं । रूपा ने जीवन की आँखों में आँशु देखे तो जीवन के प्रति प्यार और उमड़ पड़ा।  वो जीवन के इस दर्द को देखकर कर रो पड़ी। देव और अजय ने रूपा को इशारा करके चुप किया और जीवन को छेड़ने लगे। शादी के एक दिन पहले एक छोटी रस्म में भाई का फ़र्ज़ निभाना था।  साजन को बड़ी मुश्किल से समझाया और खड़ा किया।  साजन का इलाज हुआ उससे उसको थोडी थोड़ी  याददास्त के साथ उठाना बैठना भी धीरे धीरे होने लगा था। परेशानी सिर्फ आँखों की रह गयी थी। दिखना और बोलना अभी सुरु नहीं हुआ। मगर मुंह से आवाज़ थोड़ी बहुत निकाल लेता था। देव ने  हाथ पकड़ कर जब साजन को खड़ा किया तो साजन एकदम चौक उठा।  उसे उसमे से जीवन की खुशबू आई। देव के सर पर हाथ रखा और नाक  कान पर हाथ फेरने लगा।
देव समाज गया। उसके कहा की वो देव हैं न की जीवन। पास बैठी सीमा ने सुन लिया। उसके आँखों में से आँशु निकल आये। माँ और पिताजी शोरगुल में कुछ समझ नहीं पाए मगर आज साजन के चहरे पर बहुत ही प्यारी मुश्कान देख कर सभी खुश हुये। साजन अपने छोटे भाई की जुदाई में मौन रहता था। उसे धीरे धीरे अपने छोटे भाई की कुर्बानियां याद आती थी तो अपने आप से नफरत करता और जोर जोर से चिल्लाता। उसकी चिल्लाहट को दर्द समझ कर सभी जीवन से नफरत करते थे। मगर आज पहली बार साजन के चहरे पर खुशियां देख सभी खुश हुए।  शादी पर वैसे भी सभी खुश होते हैं मगर आज सभी दुगने खुश थे की साजन अपने आप में हंस रहा था।  जीवन भी छुप कर देख रहा था। सभी काम समय पर पुरे होने के साथ शादी भी आराम से निपट गयी। पिताजी से आज्ञा लेकर जब जीवन रवाना हुआ तो पिताजी ने रोका। जीवन को मानो ज़िन्दगी भर की ख़ुशी एकपल में मिल गयी मगर जब पिताजी ने बोलना शुरू किया तो सब कुछ ख़त्म होता नज़र आया। पिताजी ने कहा की  ..  शर्म कर। तेरी बहन कीशादी थी फिर भी तू ऐनवक्त पर आया।  कुछ नहीं तो सीमा का मन रखने को अपना मनहूस चेहरा लेकर थोड़ा जल्दी आ जाता। ये देख तेरे भाई के दोस्त और उसकी बहन पूरी शादी में ऐसे काम कर रहे थे जैसे इनकी सगी बहन की शादी हो। पता नहीं तुझे कब शर्म आएगी। कितना भी भला बुरा कहा पिताजी ने जीवन सिर्फ गर्दन झुका कर सुनता रहा। आज भी वो कुछ नहीं बोला। जब माँ और पिताजी ने उसको आज के बाद सम्पूर्ण रिस्ता तोड़ने का बोले तो उसके पैरों  की जमीन खिसक गयी। बिना कुछ बोले वो वहां से सीधा  बाहर की तरफ निकल पड़ा। रूपा भी उसके पीछे दौड़ पड़ी।  

No comments:

Post a Comment