छोटी छोटी कहानियां ५
अकेला क्यों २
देव और अजय कुछ समझा भी नहीं सकते थे क्योकि वो जीवन के दोस्त न बन कर साजन के दोस्त बनकर आये। साजन सबकुछ सुन रहा था मगर आज वो न बोल सकता हैं न देख सकता हैं। थोड़ा बहुत खड़ा होता हैं तो सहारा जरुरी हैं। माताजी और पिताजी अपने आप को कोसने लगे की भगवान् किस गलती की सजा दे रहा हैं।
जीवन अपने साथियों के साथ वापस वहा से आकर अपनी पढ़ाई की तरफ ध्यान देने लगा। पढ़ाई के साथ वो नौकरी भी करने लगा। पिताजी अपनी दूकान और अपने बड़े बेटे की जिम्मेदारी में इतना खो गए की उन्हें जीवन की याद तक नहीं रही। वो किस प्रकार जीवन यापन कर रहा होगा। माताजी ने एकदो बार जिक्र किया मगर पिताजी ने अनसुना करके अपनी पत्नी को भी भूलने का कह दिया।बिच बिच में वो अपने शहर जाकर अपने माताजी पिताजी का हाल चाल जान कर आता रहता था।गुमसुम रहने की आदत ज्यादा हो गयी थी इसलिए जब रूपा ने अपने प्यार के बारे में कहा तो उसका सही समय पर जवाब नहीं देने के कारण वो भी दूर चली गयी। देव और अजय भी अपनी नौकरी के कारण अन्य शहरों में चले गए। आज वो अपने घर में अकेला रहता हैं।ऑफिस से घर और घर से ऑफिस बस ये दिनचर्या रह गयी। न किसी से बोलना और न ही किसी से कोई शिकायत। एक दिन जब वो छुपकर अपने घर के पास गया तो पता चला साजन भैया नहीं रहे। किसी तरह हिम्मत करके जब पिताजी के सामने गया तो पिताजी ने गुस्से में पास पड़ी छड़ी से पीटना शुरू कर दिया साथ में उसे अब कभी भी घर न आने की हिदायत दे डाली। एक आखरी उम्मीद थी की भैया टिक होंगे तब सब सच सामने आएगा मगर अब सब ख़त्म हो गया। बहन विदेश में रहने के कारण अभी तक वापस नहीं आई हैं।
जीवन अपना जीवन जैसे तेसे निकल रहा था। कोई दोस्त या हमदर्द नहीं। जीने की कोई राह नहीं। थोड़ा बहुत
घर में समय निकलने के लिए लिखने की कोशिश करता हैं मगर एक लाइन भी नहीं लिख पाता हैं और वही पुरानी यादें उसे परेशां करती रहती हैं। अंदर ही अंदर अपने आप बातें करना यही उसकी ज़िन्दगी रह गयी हैं।
अकेला क्यों २
देव और अजय कुछ समझा भी नहीं सकते थे क्योकि वो जीवन के दोस्त न बन कर साजन के दोस्त बनकर आये। साजन सबकुछ सुन रहा था मगर आज वो न बोल सकता हैं न देख सकता हैं। थोड़ा बहुत खड़ा होता हैं तो सहारा जरुरी हैं। माताजी और पिताजी अपने आप को कोसने लगे की भगवान् किस गलती की सजा दे रहा हैं।
जीवन अपने साथियों के साथ वापस वहा से आकर अपनी पढ़ाई की तरफ ध्यान देने लगा। पढ़ाई के साथ वो नौकरी भी करने लगा। पिताजी अपनी दूकान और अपने बड़े बेटे की जिम्मेदारी में इतना खो गए की उन्हें जीवन की याद तक नहीं रही। वो किस प्रकार जीवन यापन कर रहा होगा। माताजी ने एकदो बार जिक्र किया मगर पिताजी ने अनसुना करके अपनी पत्नी को भी भूलने का कह दिया।बिच बिच में वो अपने शहर जाकर अपने माताजी पिताजी का हाल चाल जान कर आता रहता था।गुमसुम रहने की आदत ज्यादा हो गयी थी इसलिए जब रूपा ने अपने प्यार के बारे में कहा तो उसका सही समय पर जवाब नहीं देने के कारण वो भी दूर चली गयी। देव और अजय भी अपनी नौकरी के कारण अन्य शहरों में चले गए। आज वो अपने घर में अकेला रहता हैं।ऑफिस से घर और घर से ऑफिस बस ये दिनचर्या रह गयी। न किसी से बोलना और न ही किसी से कोई शिकायत। एक दिन जब वो छुपकर अपने घर के पास गया तो पता चला साजन भैया नहीं रहे। किसी तरह हिम्मत करके जब पिताजी के सामने गया तो पिताजी ने गुस्से में पास पड़ी छड़ी से पीटना शुरू कर दिया साथ में उसे अब कभी भी घर न आने की हिदायत दे डाली। एक आखरी उम्मीद थी की भैया टिक होंगे तब सब सच सामने आएगा मगर अब सब ख़त्म हो गया। बहन विदेश में रहने के कारण अभी तक वापस नहीं आई हैं।
जीवन अपना जीवन जैसे तेसे निकल रहा था। कोई दोस्त या हमदर्द नहीं। जीने की कोई राह नहीं। थोड़ा बहुत
घर में समय निकलने के लिए लिखने की कोशिश करता हैं मगर एक लाइन भी नहीं लिख पाता हैं और वही पुरानी यादें उसे परेशां करती रहती हैं। अंदर ही अंदर अपने आप बातें करना यही उसकी ज़िन्दगी रह गयी हैं।
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