छोटी छोटी कहानियां ६
बे लगाम
भूमि बहुत बोलती थी. सभी उसे समझाते मगर हाज़िर जवाब के साथ बहुत बातूनी थी। एक दिन उसके भाई के जन्मदिन के कारण भाई के दोस्त और उसकी कुछ सहेलियां भी आयी थी। आज वो कुछ ज्यादा ही जोश में थी। उसके पापा मम्मी ने टोका की लड़की हैं और लड़की की तरह रह और ज्यादा उछल कूद मत कर। मगर वो तो किसी की सुनती ही नहीं थी। बड़े छोटे सबसे हँसी मज़ाक कर रही थी। किसी की भी खिल्ली उड़ाना उसके लिए बहुत ही मामूली बात थी। वही उसके बड़े भाई शांत और सीमा में रह कर बात करने वाले थे क्योंकि वो सरकारी नौकरी के उच्च पदों के लिए परीक्षा दे रहे थे । उनके दोस्तों में एक बहुत ही सीधा सादा लड़का राम कुछ भी नहीं बोल रहा था। उसके कपडे और जूतों से बहुत ही सामान्य व्यक्तितव वाला दिख रहा था। भूमि जब अपनी सहेलियों के साथ उन्हें खाना परोस रही थी तो भाई के सभी दोस्तों के साथ उसे भी उलूल झुलुल बोल रही थी। भाई के दोस्त भी भूमि से मस्ती कर रहे थे। भाई ने बताया की ये साधारण घर का लड़का हैं और कम बोलता हैं। इस पर भूमि ने ताने मारते हुए कहा की सही भी हैं जिसका जितना घर उच्च श्रेणी का होगा वो उतना ही शक्तिशाली होगा तभी तो बिना डर के बोल सकता हैं।वरना जो कमजोर होगा वो क्या तो बोलेगा और क्या तो करेगा। उस लड़के का नाम बहुत ही साधारण था। राम। भूमि जानबूझ कर अपने नौकर रामू को बारबार राम राम कह कर बुला रही थी और राम से माफ़ी भी मांग रही थी। राम इन फालतू बातों की तरफ ध्यान कम दे रहा था। मगर भुमि थी की आज तो इस राम के मज़े लेने हैं। उसे ऐसा कमज़ोर व्यक्ति ही चाहिए जिससे वो मजे ले। खाना पूरा होने के बाद जब भूमि की सहेलियां और भाई दोस्त जाने लगे तो एक छोटे डिब्बे में कुछ खाने का सामान रख कर भूमि ने राम को पकड़ाया और कहा की अगर घर में खाना ना हो तो सुबह उठ कर इसका नास्ता कर लेना। सभी जोर जोर से हसने लगे। राम ने वो डिब्बा ले लिया और धन्यवाद दिया। सभी या तो गाडी लेकर आये या फिर उनके घर से गाडी लेने को आयी। राम ऐसे ही पैदल रवाना हो गया। उसके मुंह पर किसी भी प्रकार का कोई भाव नहीं था की उसको कोई लेने नहीं आया या वो पैदल ही आया। भूमि ने राम को कहा की कोई टैक्सी ले ले और वो पैसे दे देगी। मगर राम बिना बोले वहां से चुपचाप निकल गया।
कुछ दिन बाद उसके भाई की और उसके दोस्तों की उच्च पदों पर नौकरी मिल गयी सभी अपने अपने रास्ते निकल पड़े. एक दिन भूमि के पिताजी अपने बेटे के लिए शहर के सबसे बड़े सेठ की बेटी का हाथ मांगने उनके घर गए। क्योंकि उस शहर का एस पी उनका बेटा बनने वाला हैं। सेठ भगवानदास भी बहुत खुश हुए। उन्होंने अपनी बेटी लक्ष्मी को जब पूछा तो उसने भूमि के भाई को पसंद तो कर लिया मगर अपने बड़े भाई की आज्ञा के बगैर वो और उसके पिताजी कुछ नहीं कर सकते हैं। भूमि के पिताजी ने अपने बेटे किसी कारण से शहर से बाहर होने के कारण कुछ दिनों में जवाब देने को बोलै तो भूमि ने कहा की .. लक्ष्मी आपको शादी करनी हैं तो आप ही जवाब दे दो ना कहाँ भाई वाई के चक्कर में पड़ती हो। लक्ष्मी ने कहा की हमारे घर में सभी बड़े अपनी राय देते हैं फिर फैसला होता हैं न की कोई नादानी में या जल्दबाज़ी में फैसला लिया जाता हैं। बड़े भाई ने भी भूमि को समझाया की चुप रहो और जो इनके घर का फैसला होगा वही हमे मानना हैं। हम लोग तीन चार दिन बाद आकर बात कर लेंगे। भूमि थोड़ी नाराज़ सी होकर रूठ गयी। मगर भगवान् दास और भूमि के पिताजी ने प्यार
से जब समझाया की हां तो हैं मगर लड़की के भाई की भी हा जरुरी हैं। सभी वापस आ गए।
चार दिन बाद नए कलेक्टर की मीटिंग होनी थी। नए कलेक्टर रामप्रसाद किसी कारण से अपना पद दो दिन पहले सम्भाल लिया और आज भूमि के भाई के साथ उनकी मीटिंग थी मगर इन वक्त पर दूसरे दिन की तय हुयी। भूमि का भाई थोड़ा नाराज़ हुआ मगर कलेक्टर के आगे उसकी भी बोलती बंद थी। शाम को भगवानदास के घर से बुलावा आया। सभी घर के सदस्य तैयार हो कर नगर सेठ के यहाँ पहुंच गए। गेट के पास ही भूमि को राम दिखाई दिया। उसने बिना सोचे समझे राम को पुकार लिया। बड़े भाई और माँ पिताजी भी भोचचंगे रह गए। मगर बड़े भाई का कभी दोस्त रहा इसलिए सभी एक बार उससे मिल लिए। राम साधारण चप्पल पहने बगीचे में कुछ कर रहा था। आज भी वो चुप था। भूमि ने कहा की माली की नौकरी मिली हैं तो अच्छा हैं मगर यहाँ ये मत बताना की तुम कभी भैया के दोस्त थे। हमारी इज़्ज़त का सवाल हैं। बड़े भैया ने राम से माफ़ी मांगी और अंदर चले गए। सभी बैठे बात कर रहे थे तब भगवानदास ने बताया की उनका बेटा आ गया हैं और इस शहर का कलेक्टर भी बन गया हैं। बड़े भैया खुश होकर बोले की। . आज हमारी मीटिंग होनी थी मगर उन्होंने कल की रख दी मगर अब कोई बात नहीं हम आज कुछ बात कर लेंगे और हमारी जान पहचान भी हो जाएगी।
कलेक्टर साब कब तक आ रहे हैं। लक्ष्मी बोली भैया कब गए बस टहलकदमी करके अंदर आ रहे होंगे।
इतने में राम अंदर आया। और आ कर सामने की खाली पड़े सोफे पर बैठ गया। भूमि ने उसको वहां से उठकर दूर खड़े होने को बोला और लक्ष्मी को कहा की ये हमारे भाई का बचपन का दोस्त हैं। थोड़ा गरीब तो हैं मगर सीधा सादा होने के कारण इसे पता नहीं की कहाँ बैठना चाहिए और कहाँ नहीं। इतना कहते हुए उसने राम हो पकड़कर खड़ा कर दिया। सभी दंग रह गए। मगर भूमि चुप नहीं हो रही थी। उसने अपने भाई की झूठी दरयादिली की बात कहने लगी की इससे मेरे भाई ने ही सहायता की और बहुत बार हमने अपने घर से खाना खिलाया। भगवानदास खड़े हो कर भूमि को हसंते हुए एक बात सुनने को कही मगर भूमि थी की चुप ही नहीं हो रही थी। बड़े भैया ने डांट कर भूमि को चुप किया तब जाकर भूमि चुप हुयी। भगवानदास ने कहा की आपको शायद इस लड़के की जानकारी नहीं हैं ,
भूमि फिर बिच में बोल पड़ी .. ओह्ह तो आपने भी इसकी पढ़ाई लिखाई और खाने पिने का ध्यान रखा। आप कितने महान हैं। वैसे ऐसे लोगो की सहायता करते रहना चाहिए।
भगवानदास बोले की इसकी सारी पढ़ाई लिखाई का खर्चा मेने उठाया हैं और मेने ही इसको खिलाया पिलाया।
भूमि .. कब से चाचाजी ?
भगवानदास .. जन्म से।
भूमि ओह्ह तो क्या इसके पिताजी कुछ नहीं कमाते हैं सारे दिन खाली पड़े रहते हैं।
भगवानदास .. हा बेटे सारे दिन घरपर पड़े रहते हैं ..
भूमि .. चाचाजी आप इसको आपके यहाँ नौकरी दे दी तो इसके पिताजी को भी नौकरी क्यों नहीं दी।
भगवानदास . बेटे इसके पिताजी बहुत ज़िद्दी हैं कुछ करते ही नहीं। कुछ भी समझा लो
भूमि .. कहाँ हैं रामू के पिताजी अभी में समझती हु अच्छा अच्छा को मेने ठीक कर दिया हैं। इस रामू को भी पूछ लो।इसको भी मेने ही इस काबिल बनाया हैं वरना ये माली भी नहीं बन सकता था। . हा
भगवांदाद .. ये लो इसके पिताजी
और खुद खड़े हो गए। भूमि इधर उधर देखने लगी मगर कोई नज़र नहीं आया।
भगवानदास बोले .. बेटे मैं ही हु इसका पिता और यही हैं रामप्रसाद कलेक्टर
सभी उछल कर खड़े हो गए . एकदूसरे को आँखे फाड़ कर देखने लगे। बड़े भाई की तो हालत खराब हो गयी।
भूमि के पिताजी ने भगवानदास से माफ़ी मांगी और कहा .. हम आपके लायक नहीं हैं हमारी बेटी कुछ ज्यादा ही बोल गयी इसलिए हम आपलोगो से माफ़ी मांगते हैं।
भूमि जोर जोर से रोने लगी और शर्मिंदगी महशुस करने लगी। आज पहली बार उसे बातूनी और बे लगाम होने हा अहशास हुआ। उसने भगवानदास से पैर छू कर माफ़ी मांगी तो भूमि के पिताजी को बड़ा अचरज हुआ क्योंकि भूमि उनके भी पैर नहीं छूती तो आज ये कैसे हो गया।
बड़े भैया ने भी आज्ञा लेकर वापस जाने के लिए सभी के साथ बाहर की तरफ जाने लगे।
राम ने आवाज़ देकर सभी को रोका तो बड़े भैया घबरा गए की आज तो बहुत बड़ी मुशीबत खड़ी हो गयी हैं।
सभी एकदूसरे की तरफ देखने लगे। राम ने सभी को अपने पास बुलाया और कहा की आप जिस काम से यहाँ पर आये हैं वो तो कर लीजिए।
भूमि वो हम अपने भाई रिश्ता लेकर आये हैं लक्ष्मी के लिए । रामू तुम ......माफ़ करना में भूल गयी रामप्रसाद जी आप हा दीजिये।
भूमि के पिताजी ने कहा कि कलेक्टर साब शायद हमसे बहुत बड़ी भूल गईहैं हम अपने से काफी बड़े घर में रिश्ता आये हमारी इस नादानी को माफ़ करे और हम लोगो को यहाँ जाने आज्ञा। दे।
राम ने सभी को वापस बैठने को कहा। सभी जगह पर बैठ गए।
भूमि और उसके परिवार सोचने लगे की भूमि वजह से आज कलेक्टर साब बहुत ही ज्यादा गुस्सा करेंगे और
हमे जलील भी।
रामप्रसाद अपनी बहन साथ अंदर चले गए। उनकी माताजी पिताजी भी अंदर चले गए। बाहर भूमि को सभी डांटने लगे। भूमि गलती समझ चुकी थी। उसने रोते हुए कहा की मेरी ये आदत धीरे धीरे ख़त्म हो जाएगी और में कलेक्टर साब के पैर पकड़ कर माफ़ी मांग कर भाभी के लिए हां करवाउंगी। बड़े भैया ने ऐसा कुछ भी नहीं करने को कहा। भूमि को सिर्फ चुप रहने की हिदायत दी गयी।
रामप्रसाद अपने माता पिता और बहन के साथ बाहर आये.सभी ख़ामोश बैठे थे। किसी की हिम्मत नहीं की कुछ बोले।
भगवानदास ने चुपी तोड़ते हुए कहा कि ये रिश्ता हमे एक शर्त पर मंज़ूर हैं।
भैया ... आप जो कहोगे वो सर आँखों पर।
भगवानदास .. सोचलो कही बाद में पछताना ना पड़े।
भूमि चाचाजी आप मुझसे जो गलतियां हुयी हैं उसके लिए भैया को सजा ना देकर मुझे दीजिये मगर आप लोग हां कर दीजिये क्योंकि भैया लक्ष्मी भाभी को बहुत पसंद करते हैं।
भगवानदास .. चलो ठीक हैं तुम्हे सज़ा दे देते हैं। तुम्हे एक काम करना होगा। हमारे कलेक्टर साब को कुछ साल पहले एक लड़की पसंद आई जिसको आज भी ये उस लड़की को बहुत ज्यादा पसंद करता हैं उसे ढूंढ कर लानी हैं।
भूमि .. बस इतनी सी बात। ऐसे ढूंढ लाउंगी आप बस उसका नाम बता दीजिये।
भगवानदास .. हम्म्म्म वो लड़की इसको पसंद नहीं करती हैं मगर एक दिन इसको एक गिफ्ट दिया जो की आज तक सम्भाल कर रखा हैं बस यही उसकी निशानी हैं।
भूमि .. चाचाजी सिर्फ गिफ्ट से कैसे दूंदूंगी। भैया आप पुलिस में हे आपको इनकी मदद करनी होगी ,
बड़े भैया ने वो गिफ्ट मंगवाया। उस गिफ्ट को एक अच्छे से कागज़ में लपेट कर रखा गया था। भैया देखते ही भूमि के हाथ में पकड़ा दिया। भूमि ने पूरा कागज़ खोल कर उस गिफ्ट को देखने लगी। मगर वो कुछ समझ नहीं पा रही थी की ये इतना गन्दा डब्बा हैं और देने वाली भी कैसी गन्दी होगी।
उसने हाथ से वो डब्बा फेक दिया और बोली की छी ये तो बहुत गन्दा हैं ऐसा कोई गिफ्ट देता हैं क्या। आप कलेक्टर होकर उस गन्दी गंवार लड़की से प्यार करते हैं।
भगवानदास .. जी हा हमारा बेटा पहली बार जब उसको देखा तब से उसी से प्यार करता हैं और बोला की शादी भी उसी से करेगा , मेने तो इसको समझा दिया अगर तुम समझा सको तो समझा दो।
भूमि कुछ बोलने को हुयी मगर कलेक्टर साब को देख वापस चुपचाप बैठ गयी। मुंह उदास करके गर्दन हिलते हुए बोली की मैं ये काम नहीं कर सकती। आपके लिए ये लड़की नहीं ढूंढ सकती हूँ।
सभी खामोश बैठे थे। लक्ष्मी से रहा नहीं गया और बोली ... अगर आप इसे ढूंढ नहीं सकती हैं तो फिर मुझे भी शादी नहीं करनी क्योंकि मेरी शादी भइया की शादी के साथ साथ ही होगी। भूमि के हाथ में अभी भी वही डब्बा था तो लक्ष्मी बोली .. एक काम करे भूमिजी आप ये डब्बा वापस मेरे भैया को दे दीजिये और आपका काम हो जायेगा
भूमि .. डब्बा देने से मेरा काम पूरा हो जायेगा ये कैसे।
लक्ष्मी .. आप भैया को एक बार ये डब्बा तो दीजिये।
भूमि ने जैसे ही वो डब्बा दिया भगवानदास और उनका परिवार जोर जोर से हंसने लगा। भूमि का परिवार आँखे फाडे केवल इधर उधर देखने लगे।
लक्ष्मी बोली ... भूमि जी ये डिब्बा जब भैया को उस लड़की ने डब्बा दिया तो भइया इसके बदले अपना दिल दे आये। तब से ठान रखा हैं की शादी उसी लड़की से करेंगे और आज उस लड़की ने फिर वही डब्बा भैया को दिया हे और आज भी भैया उस लड़की को प्यार करते हे। अरी मेरी होने वाली भाभी। .. आपने ने ही ये डब्बा दिया हैं भैया को और उसी दिन भैया ने हम सब को ये राज़ की बात बता दी थी कि किस प्रकार एक लड़की ने इनका मज़ाक उदय मगर वो मज़ाक उड़ाती रही और भइया उससे प्यार में डूबता गए।
भूमि .. मेने दिया ये डब्बा .. कब
राम .. जब आपके भाईसाब का जन्म दिन था तब।
भूमि शर्म के मारे पसीना पसीना हो रही थी और सभी जोर जोर से हंस रहे थे।
बे लगाम
भूमि बहुत बोलती थी. सभी उसे समझाते मगर हाज़िर जवाब के साथ बहुत बातूनी थी। एक दिन उसके भाई के जन्मदिन के कारण भाई के दोस्त और उसकी कुछ सहेलियां भी आयी थी। आज वो कुछ ज्यादा ही जोश में थी। उसके पापा मम्मी ने टोका की लड़की हैं और लड़की की तरह रह और ज्यादा उछल कूद मत कर। मगर वो तो किसी की सुनती ही नहीं थी। बड़े छोटे सबसे हँसी मज़ाक कर रही थी। किसी की भी खिल्ली उड़ाना उसके लिए बहुत ही मामूली बात थी। वही उसके बड़े भाई शांत और सीमा में रह कर बात करने वाले थे क्योंकि वो सरकारी नौकरी के उच्च पदों के लिए परीक्षा दे रहे थे । उनके दोस्तों में एक बहुत ही सीधा सादा लड़का राम कुछ भी नहीं बोल रहा था। उसके कपडे और जूतों से बहुत ही सामान्य व्यक्तितव वाला दिख रहा था। भूमि जब अपनी सहेलियों के साथ उन्हें खाना परोस रही थी तो भाई के सभी दोस्तों के साथ उसे भी उलूल झुलुल बोल रही थी। भाई के दोस्त भी भूमि से मस्ती कर रहे थे। भाई ने बताया की ये साधारण घर का लड़का हैं और कम बोलता हैं। इस पर भूमि ने ताने मारते हुए कहा की सही भी हैं जिसका जितना घर उच्च श्रेणी का होगा वो उतना ही शक्तिशाली होगा तभी तो बिना डर के बोल सकता हैं।वरना जो कमजोर होगा वो क्या तो बोलेगा और क्या तो करेगा। उस लड़के का नाम बहुत ही साधारण था। राम। भूमि जानबूझ कर अपने नौकर रामू को बारबार राम राम कह कर बुला रही थी और राम से माफ़ी भी मांग रही थी। राम इन फालतू बातों की तरफ ध्यान कम दे रहा था। मगर भुमि थी की आज तो इस राम के मज़े लेने हैं। उसे ऐसा कमज़ोर व्यक्ति ही चाहिए जिससे वो मजे ले। खाना पूरा होने के बाद जब भूमि की सहेलियां और भाई दोस्त जाने लगे तो एक छोटे डिब्बे में कुछ खाने का सामान रख कर भूमि ने राम को पकड़ाया और कहा की अगर घर में खाना ना हो तो सुबह उठ कर इसका नास्ता कर लेना। सभी जोर जोर से हसने लगे। राम ने वो डिब्बा ले लिया और धन्यवाद दिया। सभी या तो गाडी लेकर आये या फिर उनके घर से गाडी लेने को आयी। राम ऐसे ही पैदल रवाना हो गया। उसके मुंह पर किसी भी प्रकार का कोई भाव नहीं था की उसको कोई लेने नहीं आया या वो पैदल ही आया। भूमि ने राम को कहा की कोई टैक्सी ले ले और वो पैसे दे देगी। मगर राम बिना बोले वहां से चुपचाप निकल गया।
कुछ दिन बाद उसके भाई की और उसके दोस्तों की उच्च पदों पर नौकरी मिल गयी सभी अपने अपने रास्ते निकल पड़े. एक दिन भूमि के पिताजी अपने बेटे के लिए शहर के सबसे बड़े सेठ की बेटी का हाथ मांगने उनके घर गए। क्योंकि उस शहर का एस पी उनका बेटा बनने वाला हैं। सेठ भगवानदास भी बहुत खुश हुए। उन्होंने अपनी बेटी लक्ष्मी को जब पूछा तो उसने भूमि के भाई को पसंद तो कर लिया मगर अपने बड़े भाई की आज्ञा के बगैर वो और उसके पिताजी कुछ नहीं कर सकते हैं। भूमि के पिताजी ने अपने बेटे किसी कारण से शहर से बाहर होने के कारण कुछ दिनों में जवाब देने को बोलै तो भूमि ने कहा की .. लक्ष्मी आपको शादी करनी हैं तो आप ही जवाब दे दो ना कहाँ भाई वाई के चक्कर में पड़ती हो। लक्ष्मी ने कहा की हमारे घर में सभी बड़े अपनी राय देते हैं फिर फैसला होता हैं न की कोई नादानी में या जल्दबाज़ी में फैसला लिया जाता हैं। बड़े भाई ने भी भूमि को समझाया की चुप रहो और जो इनके घर का फैसला होगा वही हमे मानना हैं। हम लोग तीन चार दिन बाद आकर बात कर लेंगे। भूमि थोड़ी नाराज़ सी होकर रूठ गयी। मगर भगवान् दास और भूमि के पिताजी ने प्यार
से जब समझाया की हां तो हैं मगर लड़की के भाई की भी हा जरुरी हैं। सभी वापस आ गए।
चार दिन बाद नए कलेक्टर की मीटिंग होनी थी। नए कलेक्टर रामप्रसाद किसी कारण से अपना पद दो दिन पहले सम्भाल लिया और आज भूमि के भाई के साथ उनकी मीटिंग थी मगर इन वक्त पर दूसरे दिन की तय हुयी। भूमि का भाई थोड़ा नाराज़ हुआ मगर कलेक्टर के आगे उसकी भी बोलती बंद थी। शाम को भगवानदास के घर से बुलावा आया। सभी घर के सदस्य तैयार हो कर नगर सेठ के यहाँ पहुंच गए। गेट के पास ही भूमि को राम दिखाई दिया। उसने बिना सोचे समझे राम को पुकार लिया। बड़े भाई और माँ पिताजी भी भोचचंगे रह गए। मगर बड़े भाई का कभी दोस्त रहा इसलिए सभी एक बार उससे मिल लिए। राम साधारण चप्पल पहने बगीचे में कुछ कर रहा था। आज भी वो चुप था। भूमि ने कहा की माली की नौकरी मिली हैं तो अच्छा हैं मगर यहाँ ये मत बताना की तुम कभी भैया के दोस्त थे। हमारी इज़्ज़त का सवाल हैं। बड़े भैया ने राम से माफ़ी मांगी और अंदर चले गए। सभी बैठे बात कर रहे थे तब भगवानदास ने बताया की उनका बेटा आ गया हैं और इस शहर का कलेक्टर भी बन गया हैं। बड़े भैया खुश होकर बोले की। . आज हमारी मीटिंग होनी थी मगर उन्होंने कल की रख दी मगर अब कोई बात नहीं हम आज कुछ बात कर लेंगे और हमारी जान पहचान भी हो जाएगी।
कलेक्टर साब कब तक आ रहे हैं। लक्ष्मी बोली भैया कब गए बस टहलकदमी करके अंदर आ रहे होंगे।
इतने में राम अंदर आया। और आ कर सामने की खाली पड़े सोफे पर बैठ गया। भूमि ने उसको वहां से उठकर दूर खड़े होने को बोला और लक्ष्मी को कहा की ये हमारे भाई का बचपन का दोस्त हैं। थोड़ा गरीब तो हैं मगर सीधा सादा होने के कारण इसे पता नहीं की कहाँ बैठना चाहिए और कहाँ नहीं। इतना कहते हुए उसने राम हो पकड़कर खड़ा कर दिया। सभी दंग रह गए। मगर भूमि चुप नहीं हो रही थी। उसने अपने भाई की झूठी दरयादिली की बात कहने लगी की इससे मेरे भाई ने ही सहायता की और बहुत बार हमने अपने घर से खाना खिलाया। भगवानदास खड़े हो कर भूमि को हसंते हुए एक बात सुनने को कही मगर भूमि थी की चुप ही नहीं हो रही थी। बड़े भैया ने डांट कर भूमि को चुप किया तब जाकर भूमि चुप हुयी। भगवानदास ने कहा की आपको शायद इस लड़के की जानकारी नहीं हैं ,
भूमि फिर बिच में बोल पड़ी .. ओह्ह तो आपने भी इसकी पढ़ाई लिखाई और खाने पिने का ध्यान रखा। आप कितने महान हैं। वैसे ऐसे लोगो की सहायता करते रहना चाहिए।
भगवानदास बोले की इसकी सारी पढ़ाई लिखाई का खर्चा मेने उठाया हैं और मेने ही इसको खिलाया पिलाया।
भूमि .. कब से चाचाजी ?
भगवानदास .. जन्म से।
भूमि ओह्ह तो क्या इसके पिताजी कुछ नहीं कमाते हैं सारे दिन खाली पड़े रहते हैं।
भगवानदास .. हा बेटे सारे दिन घरपर पड़े रहते हैं ..
भूमि .. चाचाजी आप इसको आपके यहाँ नौकरी दे दी तो इसके पिताजी को भी नौकरी क्यों नहीं दी।
भगवानदास . बेटे इसके पिताजी बहुत ज़िद्दी हैं कुछ करते ही नहीं। कुछ भी समझा लो
भूमि .. कहाँ हैं रामू के पिताजी अभी में समझती हु अच्छा अच्छा को मेने ठीक कर दिया हैं। इस रामू को भी पूछ लो।इसको भी मेने ही इस काबिल बनाया हैं वरना ये माली भी नहीं बन सकता था। . हा
भगवांदाद .. ये लो इसके पिताजी
और खुद खड़े हो गए। भूमि इधर उधर देखने लगी मगर कोई नज़र नहीं आया।
भगवानदास बोले .. बेटे मैं ही हु इसका पिता और यही हैं रामप्रसाद कलेक्टर
सभी उछल कर खड़े हो गए . एकदूसरे को आँखे फाड़ कर देखने लगे। बड़े भाई की तो हालत खराब हो गयी।
भूमि के पिताजी ने भगवानदास से माफ़ी मांगी और कहा .. हम आपके लायक नहीं हैं हमारी बेटी कुछ ज्यादा ही बोल गयी इसलिए हम आपलोगो से माफ़ी मांगते हैं।
भूमि जोर जोर से रोने लगी और शर्मिंदगी महशुस करने लगी। आज पहली बार उसे बातूनी और बे लगाम होने हा अहशास हुआ। उसने भगवानदास से पैर छू कर माफ़ी मांगी तो भूमि के पिताजी को बड़ा अचरज हुआ क्योंकि भूमि उनके भी पैर नहीं छूती तो आज ये कैसे हो गया।
बड़े भैया ने भी आज्ञा लेकर वापस जाने के लिए सभी के साथ बाहर की तरफ जाने लगे।
राम ने आवाज़ देकर सभी को रोका तो बड़े भैया घबरा गए की आज तो बहुत बड़ी मुशीबत खड़ी हो गयी हैं।
सभी एकदूसरे की तरफ देखने लगे। राम ने सभी को अपने पास बुलाया और कहा की आप जिस काम से यहाँ पर आये हैं वो तो कर लीजिए।
भूमि वो हम अपने भाई रिश्ता लेकर आये हैं लक्ष्मी के लिए । रामू तुम ......माफ़ करना में भूल गयी रामप्रसाद जी आप हा दीजिये।
भूमि के पिताजी ने कहा कि कलेक्टर साब शायद हमसे बहुत बड़ी भूल गईहैं हम अपने से काफी बड़े घर में रिश्ता आये हमारी इस नादानी को माफ़ करे और हम लोगो को यहाँ जाने आज्ञा। दे।
राम ने सभी को वापस बैठने को कहा। सभी जगह पर बैठ गए।
भूमि और उसके परिवार सोचने लगे की भूमि वजह से आज कलेक्टर साब बहुत ही ज्यादा गुस्सा करेंगे और
हमे जलील भी।
रामप्रसाद अपनी बहन साथ अंदर चले गए। उनकी माताजी पिताजी भी अंदर चले गए। बाहर भूमि को सभी डांटने लगे। भूमि गलती समझ चुकी थी। उसने रोते हुए कहा की मेरी ये आदत धीरे धीरे ख़त्म हो जाएगी और में कलेक्टर साब के पैर पकड़ कर माफ़ी मांग कर भाभी के लिए हां करवाउंगी। बड़े भैया ने ऐसा कुछ भी नहीं करने को कहा। भूमि को सिर्फ चुप रहने की हिदायत दी गयी।
रामप्रसाद अपने माता पिता और बहन के साथ बाहर आये.सभी ख़ामोश बैठे थे। किसी की हिम्मत नहीं की कुछ बोले।
भगवानदास ने चुपी तोड़ते हुए कहा कि ये रिश्ता हमे एक शर्त पर मंज़ूर हैं।
भैया ... आप जो कहोगे वो सर आँखों पर।
भगवानदास .. सोचलो कही बाद में पछताना ना पड़े।
भूमि चाचाजी आप मुझसे जो गलतियां हुयी हैं उसके लिए भैया को सजा ना देकर मुझे दीजिये मगर आप लोग हां कर दीजिये क्योंकि भैया लक्ष्मी भाभी को बहुत पसंद करते हैं।
भगवानदास .. चलो ठीक हैं तुम्हे सज़ा दे देते हैं। तुम्हे एक काम करना होगा। हमारे कलेक्टर साब को कुछ साल पहले एक लड़की पसंद आई जिसको आज भी ये उस लड़की को बहुत ज्यादा पसंद करता हैं उसे ढूंढ कर लानी हैं।
भूमि .. बस इतनी सी बात। ऐसे ढूंढ लाउंगी आप बस उसका नाम बता दीजिये।
भगवानदास .. हम्म्म्म वो लड़की इसको पसंद नहीं करती हैं मगर एक दिन इसको एक गिफ्ट दिया जो की आज तक सम्भाल कर रखा हैं बस यही उसकी निशानी हैं।
भूमि .. चाचाजी सिर्फ गिफ्ट से कैसे दूंदूंगी। भैया आप पुलिस में हे आपको इनकी मदद करनी होगी ,
बड़े भैया ने वो गिफ्ट मंगवाया। उस गिफ्ट को एक अच्छे से कागज़ में लपेट कर रखा गया था। भैया देखते ही भूमि के हाथ में पकड़ा दिया। भूमि ने पूरा कागज़ खोल कर उस गिफ्ट को देखने लगी। मगर वो कुछ समझ नहीं पा रही थी की ये इतना गन्दा डब्बा हैं और देने वाली भी कैसी गन्दी होगी।
उसने हाथ से वो डब्बा फेक दिया और बोली की छी ये तो बहुत गन्दा हैं ऐसा कोई गिफ्ट देता हैं क्या। आप कलेक्टर होकर उस गन्दी गंवार लड़की से प्यार करते हैं।
भगवानदास .. जी हा हमारा बेटा पहली बार जब उसको देखा तब से उसी से प्यार करता हैं और बोला की शादी भी उसी से करेगा , मेने तो इसको समझा दिया अगर तुम समझा सको तो समझा दो।
भूमि कुछ बोलने को हुयी मगर कलेक्टर साब को देख वापस चुपचाप बैठ गयी। मुंह उदास करके गर्दन हिलते हुए बोली की मैं ये काम नहीं कर सकती। आपके लिए ये लड़की नहीं ढूंढ सकती हूँ।
सभी खामोश बैठे थे। लक्ष्मी से रहा नहीं गया और बोली ... अगर आप इसे ढूंढ नहीं सकती हैं तो फिर मुझे भी शादी नहीं करनी क्योंकि मेरी शादी भइया की शादी के साथ साथ ही होगी। भूमि के हाथ में अभी भी वही डब्बा था तो लक्ष्मी बोली .. एक काम करे भूमिजी आप ये डब्बा वापस मेरे भैया को दे दीजिये और आपका काम हो जायेगा
भूमि .. डब्बा देने से मेरा काम पूरा हो जायेगा ये कैसे।
लक्ष्मी .. आप भैया को एक बार ये डब्बा तो दीजिये।
भूमि ने जैसे ही वो डब्बा दिया भगवानदास और उनका परिवार जोर जोर से हंसने लगा। भूमि का परिवार आँखे फाडे केवल इधर उधर देखने लगे।
लक्ष्मी बोली ... भूमि जी ये डिब्बा जब भैया को उस लड़की ने डब्बा दिया तो भइया इसके बदले अपना दिल दे आये। तब से ठान रखा हैं की शादी उसी लड़की से करेंगे और आज उस लड़की ने फिर वही डब्बा भैया को दिया हे और आज भी भैया उस लड़की को प्यार करते हे। अरी मेरी होने वाली भाभी। .. आपने ने ही ये डब्बा दिया हैं भैया को और उसी दिन भैया ने हम सब को ये राज़ की बात बता दी थी कि किस प्रकार एक लड़की ने इनका मज़ाक उदय मगर वो मज़ाक उड़ाती रही और भइया उससे प्यार में डूबता गए।
भूमि .. मेने दिया ये डब्बा .. कब
राम .. जब आपके भाईसाब का जन्म दिन था तब।
भूमि शर्म के मारे पसीना पसीना हो रही थी और सभी जोर जोर से हंस रहे थे।
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